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जवाब नहीं, तो हाजिर रहें गृह सचिव: हाईकोर्ट

Chandigarh

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। ट्रैफिक व्यवस्थाओं, नाइट फूड स्ट्रीट के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन का आश्रालय (मानसिक रूप से कमजोर लोगों के शेल्टर होम) की सुविधाओं को लेकर भी गैर जिम्मेदराना रवैया सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अफसरशाही के इस रवैए पर कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस सूर्यकांत पर आधारित खंडपीठ ने मामले के एमिकस क्यूरे के सुझावों को लेकर यूटी प्रशासन के रवैए को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुझावों पर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा दिए कई आश्वासनों के बावजूद धरातल पर कुछ नहीं हो पाया है, जिससे सीधे प्रशासन का नकारात्मक रवैया झलक रहा है। हाईकोर्ट ने यूटी के गृह सचिव को अंतिम मौका देकर कहा कि अगली सुनवाई तक बताएं कि अभी तक क्या कदम उठाए गए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर प्रशासन जवाब दाखिल नहीं करेगा, तो ऐसी स्थिति में गृह सचिव को खुद हाईकोर्ट में उपस्थित रहना होगा। हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 1 फरवरी निर्धारित की है।
एमिकस क्यूरे ने यह बताया
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरे तनु बेदी ने खंडपीठ को बताया कि हाईकोर्ट ने उनके सुझावों को लेकर 27/7/2012 को आदेश जारी किए थे। इन आदेशों में हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी किए थे कि एमिकस क्यूरे द्वारा दिए बहुमूल्य सुझावों पर प्रशासन कार्य योजना तैयार कर इनको अमल में लाएं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जो सुझाव तर्कसंगत नहीं है, उनके बारे में हाईकोर्ट को बताया जाए। एमिकस क्यूरे ने कहा कि प्रशासन ने मामले की सुनवाइयों के दौरान कई बार आश्वासन दिया कि सुझावों पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने फिर आश्वासन देने की कोशिश की, जिसे हाईकोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट यह जानने में असमर्थ है कि एक संस्थान में सुधार के कामों को चलाने के लिए प्रशासन इतना समय क्यों लगा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रशासन को अंतिम मौका है और इसके बाद हाईकोर्ट को कड़े आदेश जारी करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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यह थे एमिकस के सुझाव
1. शेल्टर होम में रहने वालों के प्रति सरकारी कर्मचारियों, अफसरशाही का व्यवहार आदर भाव का हो।
2. जरूरी ऑफिशियल स्टॉफ और अटेंडेंट्स की नियुक्तियां की जाएं
3. कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग और ओरिऐंटेशन प्रोग्राम
4. शेल्टर होम रहे रहे लोगों को बाहर लेकर जाएं ताकि वे आम सोसायटी से घुल मिल सकें
5. कोर्ट आफिसर की नियुक्ति, जो समय समय पर वहां विजिट करे
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