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अटके हैं सुधार के सौ से ज्यादा प्रस्ताव

Chandigarh

Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से कई बार फटकार खाने के बाद भी अफसरों की आंखें नहीं खुल रही हैं। बढ़ती समस्या को देखते हुए सुधार के सौ से ज्यादा प्रस्ताव तो बनाए गए मगर ये फाइलों में ही अटक कर रह गए। हर फटकार के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से कुछ काम चलाऊ कदम उठाए जाते हैं मगर ढांचागत सुधार पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को प्रस्तावित सुधारों को लेकर अधिकारियों से बात की।
लेन सिस्टम
कुछ माह पहले हाईकोर्ट से फटकार खाने के बाद प्रशासन ने जनमार्ग के कुछ हिस्से पर लेन सिस्टम शुरू कराने का प्रयास किया था। आधे-अधूरे प्रयास के चलते अब स्थिति जस की तस है। हालांकि अधिकारी अब भी दावा कर रहे हैं कि जनमार्ग पर लेनिंग का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसे लेकर सख्ती भी बरती जाएगी। पर यह कितना सफल होगा इस पर सब मौन हैं।

स्लिप रोड
ज्यादातर हादसे चौराहों पर ही होते हैं। इसकी एक बड़ी वजह तो यह है कि स्लिप रोड जहां मिलते हैं, वे सीधे आ रहे चालक के लिए ब्लाइंड एरिया बनाते हैं। इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों का कहना है कि इसे देखते हुए प्रमुख और व्यस्त चौराहों के स्लिप रोड को लाइट प्वाइंट से पीछे करने का काम शुरू कर दिया है। इनमें रेलवे लाइट प्वाइंट, पीजीआई के पास वाला चौराहा भी शामिल है। सिर्फ गिनती के चौराहों की सूरत बदलने से किसी बड़े सुधार की उम्मीद कम ही है।

साइकिल ट्रेक
ज्यादातर साइकिल ट्रैक जर्जर हैं या इनके रास्ते में बड़े-बड़े पेड़ खड़े हैं और बंद हो गए हैं। इसके अलावा चौराहों पर भी साइकिल सवारों के लिए वैकल्पिक रास्ते नहीं हैं, जिसकी वजह से वे हादसों का शिकार होते रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइकिल ट्रेक सुधारने का प्रस्ताव है। चौराहों पर वैकल्पिक रास्ते के लिए भी सर्वे किया जा रहा है। अधिकारी डिवाइडर पार करने के रास्तों पर अभी विचार ही कर रहे हैं।

छात्रों के लिए बसों पर नहीं लगे बैनर
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए प्रशासन ने 10 बसें तो चलाईं मगर पहले से ही सवारियों से भरी होने के चलते समस्या का कोई समाधान नहीं दे सकीं। हाईकोर्ट ने कुछ माह पहले इन बसों पर बैनर और अन्य पहचान लगाने को कहा था ताकि आम सवारियां इनमें न बैठें। इस पर सीटीयू के अधिकारियों का कहना है बोर्ड बनने के लिए दिए गए हैं। जल्द ही इन्हें लगा दिया जाएगा। छात्राओं के लिए अलग बस चलाने पर भी सहमति हुई थी मगर इस पर अमल नहीं किया गया।

पुलिस का स्टाइल
अधिकतर चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी ट्रैफिक नियंत्रित करते नजर नहीं आते। उनका ज्यादा ध्यान चालान काटने पर रहता है, इसलिए वे चौराहों से थोड़े आगे या पीछे ही खड़े होते हैं और रास्ते में वाहन को रुकवा कर ट्रैफिक के लिए बाधा पैदा करते हैं और कई बार हादसे का कारण भी बनते हैं। ऐसे भी कई मामले हैं, जिनमें पुलिसकर्मी खुद वाहन रोकने की कोशिश में घायल हुए हैं।

ये हैं दिक्कते
ट्रैफिक पुलिस के सूत्रों के अनुसार ट्रैफिक व्यवस्था से सुधार के सौ से अधिक प्रस्ताव प्रशासन के पास रुके पड़े हैं। इनमें से ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार से जुड़े हैं। जेब्रा क्रासिंग मार्किंग, ट्रैफिक सिग्नलों की ऊंचाई को सही करना, लाइट प्वाइंट्स का सिंक्रोनाइजेशन और अच्छी तकनीक के सीसीटीवी कैमरों की इंस्टालेशन के प्रस्ताव अटके हुए हैं। इनकी वजह से ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं।
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कोट्स

सड़क पर वाहन चालकों को सुरक्षित चलने का मौका दिलाना ही हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कई जरूरी प्रस्ताव लंबे समय से अटके हैं। इनकी वजह से भी ट्रैफिक के प्रबंधन में समस्याएं पैदा हो रही हैं।
-मनीष चौधरी, एसपी ट्रैफिक
कई ऐसे प्रस्ताव रूके हैं, जिनकी वजह से ट्रैफिक के बेहतर प्रबंधन में समस्याएं पैदा हो रही हैं।
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चीफ इंजीनियर, एसके चड्ढा
विभाग की ओर से सभी पहलुओं का अध्ययन कर, लेनिंग और स्लिप रोड का काम किया जा रहा है। इसके अलावा चौराहों पर भी सभी तरह के वाहन चालकों को सुव्यवस्थित चलने का मौका देने के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही इन्हें अमली जामा भी पहनाया जाएगा।
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कोटस..
स्कूल समय में विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रहीं बसों पर जो बोर्ड लगाने हैं, वे बनने के लिए दे दिए हैं। अगले सप्ताह तक इन बसों पर बोर्ड लगा दिए जाएंगे। फिलहाल बसें कम हैं। नई बसों की खरीद की जानी है। उसके बाद लड़कियों के लिए भी अलग बसें चलाई जाएंगी।
-एसपी परमार जीएम चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग
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