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चौदह साल पुरानी याचिका पर ही होगा वोटिंग राइट का फैसला

Chandigarh

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के मनोनीत पार्षदों के वोटिंग राइट को चुनौती देने वाली उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जो राजस्थान निवासी दविंदर सिंह ने पिछले चुनावाें के तत्काल बाद हाईकोर्ट में दाखिल की थी। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस राकेश कुमार जैन पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर 1998 में दाखिल एक याचिका हाईकोर्ट में पहले से ही लंबित है। इसलिए हाईकोर्ट उसी याचिका पर सुनवाई करके इस मामले को निपटाएगा। हाईकोर्ट ने पहले से लंबित याचिका पर सुनवाई 5 फरवरी के लिए निर्धारित की है। हालांकि चंडीगढ़ नगर निगम के नए मेयर का चुनाव दिसंबर में फिर हो जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान निवासी दविंदर सिंह द्वारा उठाया गया मुद्दा तर्कसंगत है और उसके अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि 1998 में दाखिल याचिका में भी समान मुद्दे उठाए गए हैं इसलिए प्राथमिकता के आधार पर उस याचिका पर ही हाईकोर्ट अंतिम निर्णय लेगा। सुनवाई के दौरान शहर के समाज सेवक ज्ञान सिंह विरदी ने भी हाईकोर्ट में अरजी दाखिल कर उन्हें इस मामले में प्रतिवादी बनाने की अपील की। दाखिल अरजी में उन्होंने नगर निगम के मनानीत पार्षदाें के नामांकन में भेदभाव की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनकी अरजी पर हाईकोर्ट ने कहा कि उनके उठाए गए मुद्दे को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है। इसलिए खंडपीठ उनकी अरजी का विस्तृत अध्ययन करने के बाद खुद इस मामले को निपटाएगी।
.............
जनहित याचिका में यह मुद्दा उठा
राजस्थान निवासी दविंदर सिंह द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि चंडीगढ़ नगर निगम में 35 पार्षद हैं, जिनमें से 26 पार्षदों को सीधे जनता चुनती है, जबकि 9 पार्षदाें को मनोनीत किया जाता है। याचिका में कहा गया है कि 9 पार्षद सदन में 25 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन पार्षदाें की बैकडोर एंट्री रहती है, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। इसलिए इन पार्षदाें को वोटिंग राइट नहीं दिया जा सकता।
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