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कैंटीन कर्मियों के धरने से सैनिकों की मुश्किल

Chandigarh

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। अपने वेतनमान और सुविधाओं की मांग को लेकर धरने पर बैठे कर्मचारियों की वजह से तीनों सेना की कैंटीन चार-पांच दिनों से बंद हैं। सेना न तो लोक लेखा समिति का आर्डर मानने को तैयार है, न ही कंट्रोलर एंड आडिटर जनरल आफ इंडिया की रिपोर्ट को और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर जिद पर अड़े हैं। नतीजतन, सैनिक कैंटीन से सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं।
कैंटीन कर्मचारियों के वेतनमान को सेंट्रलाइज नहीं किया गया है। उन्हें जो वेतनमान दिया जाता है, वह काफी कम है। कंट्रोलर एंड आडिटर जनरल आफ इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि देशभर में सेना की जितनी भी कैंटीन चल रही हैं, वे स्टोर डिपार्टमेंट के अभिन्न अंग हैं। जिस तरह कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट का आडिट होता है, उसी प्रकार यूनिट्स में चलने वाली सैन्य कैंटीन का भी आडिट होना चाहिए, ताकि उनकी कार्यप्रणाली और एकाउंटिंग का पूरा ब्योरा मिल सके।
इसके अतिरिक्त पीएसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिट में चलने वाली कैंटीन के कर्मचारियों का वेतनमान सीएसडी डिपो के कर्मचारियों के बराबर होना चाहिए और सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए। आल इंडिया डिफेंस सिविलियन कैंटीन इंप्लाइज यूनियन काफी समय से पीएससी की रिकमंडेशन को लागू करने का इंतजार कर रही थी। आल इंडिया डिफेंस सिविलियन कैंटीन इंप्लाइज यूनियन के महासचिव भरत भूषण और अध्यक्ष राजशेखरन नायर ने बताया कि काफी समय से यह डिमांड पेंडिंग चल रही थी। सेना इसे जब तक लागू नहीं करेगी, तब तक धरना जारी रहेगा।

यहां बंद हैं ताले
चंडी मंदिर कैंटीन, चंडीगढ़ कैंटीन, मोहाली कैंटीन, 12 विंग एयरफोर्स कैंटीन, थ्री बीआरडी कैंटीन, एनसीसी कैंटीन, हाई ग्राउंड एयरफोर्स कैंटीन के कर्मचारी धरने पर हैं।

50 लाख का रोजाना ट्रांजेक्शन
चंडीगढ़ रीजन की सेना की कैंटीन की बात करें तो यहां रोजाना करीब 50 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन होता है। कैंटीन से सीधे सेना के कर्मचारी और रिटायर्ड सैन्य अफसर जुड़े हैं। पंजाब और चंडीगढ़ रीजन में 10 लाख से ज्यादा रिटायर्ड अधिकारी हैं।

‘कैंटीन बंद होना गलत’
सेना के रिटायर्ड अधिकारी ब्रिगेडियर जीएस गाखल के अनुसार, किसी भी कारण से कैंटीन बंद नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे सेना के जवान और रिटायर्ड अधिकारी जुड़े हैं। कैंटीन बंद होने से इस तबके को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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