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बच्चों के नाम पर ‘बड़ों’ ने खूब खाया

Chandigarh

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। नगर निगम की ओर से आयोजित बाल दिवस के कार्यक्रम के खर्च का जो हिसाब पास करवाया गया है, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। इस बिल से सबसे यह बात तो यह पता चलती है कि इस कार्यक्रम में बच्चों के नाम पर ‘बड़ों’ ने खूब खाया है। बच्चों को रिफ्रेशमेंट में खाने का जो सामना दिया गया और उसका जो खर्च बताया गया है वह बाजार रेट के मुताबिक करीब दोगुना बनता है। इसी तरह अतिथियों पर किया गया खर्च भी आसानी से हजम नहीं होता। यह कार्यक्रम 14 नवंबर को सेक्टर-22 के नेहरु पार्क में आयोजित किया गया था। नगर निगम की ओर से इस आयोजन पर कुल 4 लाख 54 हजार 798 रुपये खर्च किए गए हैं।
खरीद में कच्चे या गोलमाल
नगर निगम ने इस आयोजन के बाद जारी प्रेसनोट में बताया था कि करीब 500 बच्चों रिफ्रेशमेंट दिया गया। पास हुए बिल के मुताबिक इनके रिफ्रेशमेंट के लिए 48 हजार 907 रुपये का खाने का सामान खरीदा गया। इस हिसाब से प्रति बच्चे 96 रुपये 64 पैसे से ज्यादा खर्च किया गया। इस कार्यक्रम में हर बच्चे को रिफ्रेशमेंट में एक समोसा, सैंडविच, एक रुपये वाली एक्लेयर की एक टॉफी और एक 18 रुपये वाला जूस का 100 ग्राम पैकेट दिया गया। इतना सामान अगर 98 रुपये में खरीदा गया है। बाजार में यह सामान 44 से 45 रुपये खर्च करने पर मिल जाएगा। अगर इसमें 12.5 फीसदी वेट भी शामिल कर लिया जाए तो भी खर्च 50 रुपये से ज्यादा नहीं होगा। सेक्टर- 19 के न्यू केसरी स्वीटस के संचालक हरमेल केसरी का कहना है कि बाजार में एक समोसे की ज्यादा से ज्यादा 8 से 10 और एक सैंडविच की कीमत 15 रुपये है। इसके अलावा 18 रुपये का जूस और एक रुपये की टाफी। जाहिर है कि या तो दुगना खर्च करने वाले निगम के खरीददार अनाड़ी हैं या कोई गोलमाल है।

अतिथि खर्च मतलब 420
बालदिवस के इस आयोजन में अतिथियों के चाय पकौड़े और गुलाब जामुन पर खर्च तो बच्चों से भी करीब दोगुना हुआ। आयोजन में 150 से 200 के करीब अतिथि आए थे। इनके चाय पकौड़ों पर खर्च 84 हजार 323 रुपये खर्च हुए है। अगर कुल 200 अतिथि भी मानें तो इस चाय-पकौड़े का खर्च प्रति व्यक्ति 420 रुपये सेे ज्यादा आता है। एक चाय 5 रुपये और गुलाब जामुन 10 रुपये में मिल जाती है। इसके अलावा हर अतिथि 400 रुपये से ज्यादा के पकौड़े खा गया, यह बात भी आसानी से हजम नहीं होती। कार्यक्रम में तीन तरह के पकौड़े परोसे गए थे। इसमें पनीर के पकौड़े बाजार में 240 रुपये किलो और मैथी तथा आलू के पकौड़े 140 रुपये किलो मिलते हैं। इस आयोजन में हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन सत्यगोपाल मुख्य अतिथि थे।

एक सप्ताह बाद पास कराया बिल
इस आयोजन पर हुए खर्च को नगर निगम ने एक सप्ताह बाद वित्त एवं अनुबंध कमेटी से पास करवाया। मेयर राज बाला मलिक, कमिश्नर, पूर्व मेयर सुभाष चावला, प्रदीप छाबड़ा भी इस कमेटी के सदस्य हैं। अधिकारियों की ओर से इसका प्रस्ताव 20 नवंबर को सदन की बैठक में भी पेश किया गया। विपक्ष की सदस्य की सदस्य हरजिंद्र कौर और राजेश गुप्ता ने यह सवाल जरूर उठाया कि खर्च का प्रस्ताव आयोजन से पहले लाया जाना चाहिए था। खर्च कैसे किया गया, इस पर किसी ने सवाल नहीं उठाया और प्रस्ताव पास कर दिया गया। इस आयोजन का निर्णय आर्ट एंड कल्चर कमेटी ने लिया था।

कोट
आर्ट एंड कल्चर कमेटी के पास फाइनेंसियल पावर नहीं है। इसके लिए हुए खर्च का निर्णय भी कमेटी की ओर से नहीं किया गया। कमेटी ने सिर्फ बाल दिवस पर कार्यक्रम के आयोजन का फैसला किया था।
गुरबख्श रावत, चेयरपर्सन, आर्ट एंड कल्चर कमेटी
--
मैंने प्रस्ताव में शामिल बाल दिवस कार्यक्रम के खर्च के रिकार्ड को स्टडी नहीं किया है। इसलिए इस संबंध में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।
-सुभाष चावला, सदस्य, वित्त एवं अनुबंध कमेटी
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तय योजना के तहत ही अधिकारियों ने सारे खर्च को कार्यक्रम के एक सप्ताह बाद टेबल एजेंडा में पेश किया ताकि ज्यादा सवाल न उठें और यह आसानी से पास हो जाए। जबकि इस प्रस्ताव को मुख्य एजेंडा में लाया जाना चाहिए था।
-राजेश गुप्ता, सदस्य, अनुबंध कमेटी
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रिफ्रेशमेंट के इस बिल में 12.5 फीसदी वैट भी शामिल किया गया है। कुल 500 बच्चों को रिफ्रेशमेंट बांटी गई।
-राज बहादुर, केयर टेकर
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जो सामान बच्चों को रिफ्रेशमेंट में दिया गया है वह बाजार में 40 से 45 रुपये में मिल जाएगा। इस खर्च में गड़बड़ी है। 26 नवंबर को होने वाली सदन की बैठक में यह मामला उठाया जाएगा।
-अरुण सूद, भाजपा पार्षद
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ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऐसे में इसी तरह के खेल होंगे।
-मलकीयत सिंह, अकाली, पार्षद
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