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नो सोल्यूशन, बातों का ई-रेवोल्यूशन

Chandigarh

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। बड़ी-बड़ी कंपनियों को आईटी पार्क में लाने के लिए लुभावने आफर्स देने वाला चंडीगढ़ और पंजाब इनमें समस्याओं से लगातार दो चार हो रहे संस्थानों की कोई सुध नहीं ले रहा है। खासकर स्थानीय स्माल एंड मीडियम एंटरप्रेन्योर (एसएमई) को तो यहां जगह तक नहीं मिल पा रही। मोहाली के आईटी पार्क में कंपनियां शेड्स में चल रही हैं। इसका भी इन आईटी कंपनियों को भारी भरकम किराया चुकाना पड़ रहा है। दूसरी ओर कई कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें वर्षों पहले प्लाट अलाट कर दिए गए मगर अब तक उन्होंने कोई इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया और न ही निकट भविष्य में इनमें कोई काम शुरू होने की उम्मीद है। इस तरह चंडीगढ़ में चले आईटी कान्क्लेव में बातों का ई-रेवोल्यूशन तो खूब दिखा मगर मौजूदा समस्याओं के सोल्यूशन पर बात करने की किसी को फुर्सत नहीं थी। यहां तक कि प्रशासन के अधिकारी सिर्फ ओपनिंग और क्लोजिंग सेशन में ही दिखे।
पंचकूला पलायन
चंडीगढ़ में डेस्टिनेशन आईटी नार्थ के लिए जो एसएमई आए उनको सोल्यूशन कुछ नहीं मिला। चंडीगढ़ में साफ्टवेयर टेक्नोलाजी पार्क आफ इंडिया (एसटीपीआई) से रजिस्टर्ड करीब 170 आईटी कंपनियां हैं। नान रजिस्टर्ड कंपनियों की संख्या दो सौ है। कंपनियां डीएलएफ में भारी भरकम किराया दे रही हैं। प्रशासन के पास जगह मुहैया करवाने की कोई व्यवस्था नहीं है। पांच ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने पंचकूला के आईटी पार्क में जाने की तैयारी कर ली है। आईटी पार्क में जिन कंपयिनो ंको जगह अलाट की गई है उसमें से कई में बीपीओ चल रहा है। कुछ साइट ऐसी हैं जिनकी कंपनियों का अब तक पता नहीं।
इज्जत बचाते हैं एसएमई
ई-रेवोल्यूशन हो या डेस्टिनेशन आईटी नार्थ, सभी में कान्क्लेव की शान एसएमई ही हैं। वही ऐसे हैं जो हर सेशन में मौजूद रहते हैं। उनके दम पर ही सारा काम चलता है। चंडीगढ़ की एसएमई कंपनियों ने यहां से साफ्टवेयर एक्सपोर्ट छह सौ करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया। चंडीगढ़ प्रशासन को यह नहीं मालूम कि यहां कितनी कंपनियां हैं।

-------बाक्स में------
पंजाब के आफर्स
1-सौ एकड़ चंडीगढ़ को देने का प्रस्ताव
2-चार सौ एकड़ जमीन खाली पड़ी है
3-क्वार्क सिटी की है यहां पर प्लानिंग
4-101 सेक्टर में बनेगा आईटी पार्क
5-आईटी पार्क में युवाओं को जगह देंगे

हालात हैं यह
शेड में चल रही है आईटी इंडस्ट्री
पंजाब इंफोटेक (पीएसआईडीसी) ने वर्ष 1978-79 में इलेक्ट्रानिक्स इंडस्ट्री को प्लाट अलाट किए। यह इंडस्ट्री फेल हो गई। इन शेड्स को आईटी और आईटीईएस सर्विसेज के लिए दे दिया गया। यह इंडस्ट्री अब तक शेड में चल रही हैं। आईटी प्रोफेशनल शेड्स को हिला तक नहीं सकते। डब्लूएचओ के अनुसार 15 वर्ष तक ही शेड्स की लाइफ होती है, जबकि ये 34 साल पुराने हो चुके हैं। आर्डिस के गगन छाबड़ा ने कहा कि आईटी कंपनी शेड में चल नहीं सकती। उनका काम कंप्यूटर बेस्ड है। बारिश के दिनों में पानी कंप्यूटर पर पड़ता है समझो बंटाधार। लंबोदरा इंफार्मेटिंक्स टेक्नोलाजी लिमिटेड के निदेशक संजीव वशिष्ठ ने कहा यहां की हालत सुधारने के लिए तीन पत्र लिखे जा चुके हैं। इसमें से एक पंजाब के मुख्यमंत्री को और पंजाब इंफोटेक को लिखा गया। हुआ कुछ नहीं।

अपना प्लाट है काम कर रहे हैं रेंट पर
लाजिक ईआरपी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर स्वर्णदीप सिंह ने कहा कि उनका प्लाट होते हुए भी उनको किराए की जमीन पर काम करना पड़ा रहा है। आईटी कंपनी के लिए एफआर 5 सभी जगह है जबकि पंजाब इंफोटेक इस शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं। पीएसआईसी ने हाल ही में कुछ आईटी कंपनियों को प्लाट अलाट किए हैँ। अब इन प्लाट की री सेल शुरू हो चुकी है। मोहाली के आईटी कंपनियों के प्रतिनिधियों के अनुसार प्लाट बिकने शुरू हो चुके हैं।
--
कोई बड़ी कंपनी नई आई
डेस्टिनेशन आईटी नार्थ में बड़ी कंपनियों को बुलाने का सपना खत्म हो गया है। की कंपनियां, जबकि एसटीपीआई और इंफोसिस के अतिरिक्त कोई भी बड़ी कंपनी इस कान्क्लेव में नहीं दिखी। जो आईं थीं वो वही पुरानी कंपनियां हैं।

क्या रहा अबकी बार नया
1-इंडस्ट्री की पार्टिशिपेशन
2-डेलीगेट की फीस माफ
3-आउटरीच एक्टिविटी की
4-लेक्चरर बुलाए गए यहां

योजना बन गई है यह
1-आईटी पार्क का खाली स्पेस एसएमई को
2-ईडीसी बिल्डिंग को जल्द ओपन करना
3-एजेंडा लाएंगे नया, पालिसी भी बनेगी

कोट------------------
डेस्टिनेशन आईटी नार्थ के आधार पर कई बदलाव आएंगे। हम एजेंडा तैयार करेंगे और कान्क्लेव में दिए गए सुझावों को पालिसी में भी कंसीडर किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि एसएमई को आईटी पार्क में बची जगह में ज्यादा से ज्यादा जगह दी जाए।
प्रेरणा पुरी
आईटी सचिव
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