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अस्‍पताल डकैती कांड के सभी अाराोपी बरी

Chandigarh

Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। अदालत में पुलिस की एक बार फिर से फजीहत हो गई। दो साल पहले कालका के राणा अस्पताल में पड़ी डकैती के मामले में पुलिस न तो डकैती साबित कर पाई और न ही रिकवरी। साथ ही आरोपियों की शिनाख्त में भी उसकी चालें उलटी पड़ गईं। इसका फायदा आरोपियों को मिला और बुधवार को अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
पुलिस के मुताबिक कालका स्थित राणा अस्पताल में तीन जून 2010 को तड़के ढाई से चार बजे मरीज के शक्ल में चार बदमाश दाखिल हुए। आरोपियों ने अस्पताल के मालिक रणधीर राणा, उनकी पत्नी और नर्स के हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए और करीब 22 लाख रुपये के गहने लूट लिए। पुलिस व सीआईए ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन दिसंबर को ओल्ड पंचकूला से यशपाल, सोमवीर और शहनवाज को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दावा किया था कि तीनों के पास से कुछ गहने भी बरामद कर लिए। वहीं एक अन्य आरोपी शादाब को पुलिस पकड़ नहीं पाई, जिसके चलते उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बदमाशों से गहने खरीदने वाले मेरठ निवासी आदिल को भी गिरफ्तार कर लिया था। बचाव पक्ष के वकील मनबीर सिंह राठी ने बताया कि उनके क्लाइंट के खिलाफ पुलिस एक भी सुबूत पेश नहीं कर पाई। नतीजतन अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
कस्टडी से भाग गया था यशपाल
करीब साल भर पहले आरोपी यशपाल पिहोवा के पास पुलिस की कस्टडी से भाग निकला था और आज तक उसका पता नहीं लग पाया है। इस मामले में तत्कालीन डीसीपी मनीष चौधरी ने दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि यशपाल को भगाने में पुलिसकर्मियों का हाथ था और वह पिहोवा से नहीं, बल्कि दिल्ली से भागा था। यशपाल पर और भी कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस इन प्वाइंटों पर खाई गच्चा
1. पुलिस ने ज्वेलरी तो रिकवर कर ली, लेकिन अदालत में साबित नहीं कर पाई यह ज्वेलरी रणधीर राणा की पत्नी की है। पुलिस ने ज्वेलरी की पहचान भी पत्नी से कराने के बजाए रणधीर राणा से करवाई गई।
2. पुलिस के मुताबिक यशपाल ने डकैती से पहले अपनी पत्नी की डिलीवरी अस्तपाल में करवाई थी। डाक्टर का परिवार उसे जानता था, लेकिन एफआईआर में उसका नाम दर्ज नहीं था।
3. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों की शिनाख्त पहले थाने में करवाई और फिर अदालत में। यदि सीधे अदालत में शिनाख्त करवाई जाती तो शायद फैसला कुछ और होता।
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