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डिस्पेंसरियों का बजट बताया 24 करोड़ खर्चा धैला भी नहीं

Chandigarh

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। शहर की 20 डिस्पेंसरियों के रखरखाव और सुविधाओं के लिए इस साल नगर निगम ने 23 करोड़ 90 लाख रुपये का बजट बनया। प्रशासन की ओर से इसके लिए 10 करोड़ रुपये भी दे दिए गए, मगर अभी तक इस राशि में से एक भी पैसा डिस्पेंसरियों पर खर्च नहीं किया है, जबकि साल का अब ढाई महीने से भी कम समय बचा है। दूसरी ओर हालत यह है कि शहर में डेंगू और वायरल बुखार के चलते रोज 500 से 600 मरीज इन डिस्पेंसरियों में पहुंच रहे हैं। इनमें से कई डिस्पेंसरियों में न तो दवाइयां हैं और न ही इलाज और जांच की कोई सुविधा।
दो साल पहले ही निगम को सौंपी गई थी व्यवस्था
डिस्पेंसरियों के रखरखाव की जिम्मेवारी दो साल पहले ही प्रशासन से नगर निगम को सौंपी गई थी। पर नगर निगम ने बजट पारित होने के बाद भी अब तक डिस्पेंसरियों के रखरखाव या सुविधाओं का इजाफा करने के लिए अभी तक एक धैला नहीं खर्चा है। इसलिए बहुत सीमित सुविधाएं ही यहां हैं। इन डिस्पेंसरियों में प्राथमिक उपचार और मलेरिया की जांच की सुविधा है। मरीजों का कहना है कि कई डिस्पेंसरियों में प्रथामिक उपचार की दवाइयां तक नहीं मिल रही हैं। यहां आने वाले मरीजों को या तो सरकारी अस्पताल भेजा जाता है या निजी प्रयोगशालाओं में जांच करने के लिए कह दिया जाता है। सोमवार को सेक्टर-8 की डिस्पेंसरी में दो दर्जन से ज्यादा बुखार के मरीज पहुंचे थे। इन मरीजों की जांच के लिए यहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। नगर निगम के कमिश्नर विवेक प्रताप सिंह ने माना कि डिस्पेंसरियों में काफी सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि डिस्पेंसरियों में डाक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है।
भूल हो गई
नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार अकेला प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग नगर निगम को सौंपा जाना कोई अच्छा फैसला नहीं है। बाकी पूरा स्वास्थ्य विभाग प्रशासन के अधीन काम कर रहा है। उपचार से संबंधी मशीनरी ठीक तरह से चले यह किसी विशेषज्ञ नेतृत्व में ही संभव है। प्रशासन ने नगर निगम को नई भर्ती के लिए भी मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों और स्टाफ की भी काफी कमी चल रही है। पूर्व मनोनीत पार्षद एव डॉ. एपी सांवरिया का कहना है कि अगर डिस्पेंसरियों की व्यवस्था सही कर दी जाए तो सरकारी अस्पतालों पर भी बोझ कम होगा। फिलहाल तो मामूली बीमारियों का उपचार भी वहां नहीं मिल पा रहा है।

सड़क पर गाड़ी धोना डेंगू को न्यौता
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से सुबह नल और पाइप लगाकर वाहन धोने वालों के चालान काटना बंद कर दिया है। इसी कारण कई जगह सुबह सड़क किनारें पानी जमा हो जाता है। डेंगू का मच्छर साफ पानी के जमा होने से ही होता है।
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