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साइकोसोमैटिक इलनेस : बीमारियों के लक्षण जानकर खुद को घोषित कर रहे मरीज

Chandigarh

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। सीने में उठा दर्द कहीं कार्डियक प्रोब्लम तो नहीं, सिर में बार-बार होने वाला दर्द कहीं ब्रेन ट्यूमर तो नहीं, बार-बार पेशाब आने पर लगता है कि कहीं शुगर न हो जाए। अगर आपको ऐसे लक्षण हैं और जांच कराने के बाद कोई बीमारी नहीं निकलती है, लेकिन फिर भी ऐसा ही लगता है तो आप ‘साइकोसोमैटिक इलनेस’ के शिकार हो चुके हैं।
मनोचिकित्सकों का कहना है तकरीबन तीस से पैंतीस फीसदी लोगों को किसी भी तरह की बीमारी न होने के बावजूद भी इस तरह की मानसिक बीमारी होती है। ऐसे लक्षणों पर समय रहते मनोरोग चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
शहर में चल रही एनुअल नेशनल कांफ्रेंस ऑफ प्राइवेट साइकैट्री में शिरकत करने पहुंचे दिल्ली साइकैट्री एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. नीलम कुमार बोहरा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों में ‘साइकोसोमैटिक इलनेस’ किसी भी बीमारी के बारे में आधी अधूरी जानकारी होने पर होता है। इसमें मरीज किसी भी बीमारी के बारे में इंटरनेट या मैगजीन से जानकारी प्राप्त करके उनका मिलान खुद के लक्षणों से करता है। इसके बाद वह खुद ही अपने आप को बीमार घोषित कर लेता है। डॉ. बोहरा ने बताया कि यही स्थिति ‘साइकोसोमैटिक इलनेस’ होती है। उनकी ओपीडी में आने वाले 35 से 40 फीसदी मरीज इसी बीमारी का इलाज कराने पहुंचते हैं। ज्यादातर मरीज उनके पास पहुुंचने से पहले जनरल फिजीशियन से जांच करा चुके होते हैं और उनको कोई बीमारी नहीं होती है।

क्या है नुकसान
साइकोसोमैटिक इलनेस से पीड़ित के शरीर में कमजोरी, हाथ-पांव में दर्द, गैस बनना, सीने में जलन और दर्द होना, सिर में दर्द होना, स्ट्रेस होना और बार बार पेशाब आने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। डॉ. बोहरा के मुताबिक ऐसा तनाव के चलते होता है।

कैसे बचें ‘साइकोसोमैटिक इलनेस’ से
बेवजह अधिक न सोचें
अगर कोई बीमारी जैसे लक्षण हैं तो डाक्टर को दिखाएं
बेवजह खुद डॉक्टर बनकर किसी नतीजे पर न पहुंचें
सभी रिपोर्ट नार्मल हैं तो अपने काम को मन लगाकर करें
अलग-अलग बीमारियों के कई बार एक जैसे ही लक्षण होते हैं। इसलिए किसी भी गंभीर बीमारी को को-रिलेट न करें
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