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50 करोड़ के सेब चट कर गए ट्राइसिटी वासी

Chandigarh

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। ट्राइसिटी वासी मौजूदा सीजन में अब तक 50 करोड़ रुपये के सेब चट कर चुके हैं। हालांकि यह खपत केवल सरकारी आंकड़ों में है, जबकि हकीकत में इससे दोगुनी खपत हो चुकी है। जी हां, यह सुनकर आपको अटपटा जरूर लगेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्राइसिटी में 50 करोड़ रुपये के सेब का कारोबार हो चुका है।
जानकारी के अनुसार शहर की सेक्टर-26 मंडी में सेब का कारोबार होता है। यहां आने वाले हर सामान पर 2 प्रतिशत मार्केट कमेटी की फीस वसूली जाती है। अभी तक सेब का आधा सीजन ही गुजरा है, लेकिन प्रशासन 1 करोड़ रुपये फीस के तौर पर आढ़तियों और व्यापारियों से इकट्ठा कर चुका है, जबकि अगले दिनों में कश्मीरी सेब की फसल आने वाली है। ट्राइसिटी की अनुमानित जनसंख्या करीब 16 लाख है। मोहाली और पंचकूला के व्यापारी भी सेक्टर-26 मंडी से सेब ले जाकर कारोबार करते हैं। ऐसे में प्रशासन को इस सीजन के अंत तक दो करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है।
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80 रुपये किलो बिक रहा है सेब
ज्यादा खपत होने के बावजूद रेट में कोई भी गिरावट नहीं हुई है। सबसे ज्यादा बिकने वाला रायल सेब 70 से 80 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। होलसेल में 25 किलो की पेटी 1300 से 1500 रुपये में बिक रही है।
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लेकिन सुविधा नहीं मिलती व्यापारी को
प्रशासन सेब से लाखों रुपये की कमाई करता है, लेकिन सेब के व्यापारियों को कोई भी सुविधा नहीं दी जाती है। इसके विपरीत सेब से भरी गाड़ियों को ट्रैफिक पुलिस द्वारा रोककर उनको परेशान किया जाता है। मंडी में पार्किंग की जगह तंग होने के कारण भी परेशानी होती है। सब्जी और फल मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय कपूर का कहना है कि व्यापारियों को मंडी में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि सेक्टर-39 में नई मंडी के लिए जगह तो खरीद ली गई है, लेकिन वहां पर मंडी शिफ्ट नहीं की जा रही है।
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फीस की चोरी भी होती है
मंडी में कई रास्ते ऐसे भी हैं जहां कर्मचारी तैनात नहीं हो सकते। इसके साथ ही कई बार ट्रक मंडी में आए बिना ही बाहर ही बिक जाते हैं, जिससे मार्केट फीस चोरी होती है।
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मार्केट कमेटी के निदेशक जूझार सिंह का कहना है कि सेब के सीजन में फीस के तौर पर प्रशासन को काफी आमदन होती है। उनका कहना है कि सेक्टर-39 में अगर मंडी शिफ्ट होती है तो वर्तमान आमदन के मुकाबले कमाई दोगुनी हो जाएगी।
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