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नाजुक हालत में पूजा को घर भेज रहा था पीजाई

Chandigarh

Updated Tue, 04 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पीजीआई की बेरुखी और जनरल अस्पताल की लाचारी के चलते पूजा जिंदगी और मौत के बीच अपना इम्तहान दे रही है। पूजा जिस जनरल अस्पताल में अपना इलाज करा रही है वहां के डॉक्टरों का कहना है कि उसको न्यूरो के विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इलाज की जरूरत है। जबकि पीजीआई का दावा है कि उसको न्यूरो की कोई परेशानी ही नहीं है। इसलिए उसको तो घर के लिए डिस्चार्ज किया गया था। जबकि हकीकत यह है कि पूजा के ब्रेन में जमा ब्लड क्लॉट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। पीजीआई प्रशासन के पास इसका कोई जवाब भी नहीं है कि पूजा को ऐसी बदहाल हालात के बाद भी क्यों डिस्चार्ज किया गया।
जनरल अस्पताल में पूजा को अटेंड करने वाले सर्जरी विभाग के हेड डॉ. बीएस बल ने कहा कि उनके पास न्यूरो का कोई चिकित्सक ही नहीं हैं। पूजा की केयर के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी पर उनकी गलती न निकाली जाए। इसलिए पूजा के परिजनों से लिखवा कर भी लिया गया है। उन्होंने माना कि नर्सिंग केयर के लिए पीजीआई से कई बार उनके पास मरीज आते हैं। जनरल अस्पताल और जीएमसीएच के कुछ डॉक्टरों ने नाम न छापने पर बताया कि जो विभाग उनके अस्पतालों में नहीं हैं ऐसे में वह मरीज की केयर कैसे करेंगे। यह समझ से बाहर है।

कोट
पूजा के ब्रेन में जमा क्लॉट भी साफ नहीं हुआ है। ऐसे में अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों के आब्जर्वेशन की जरूरत है।
-डॉ. बीएस बल, जीएमएसएच-16 में पूजा का इलाज कर रहे सर्जरी विभाग के हेड
कोट
अब तो पूजा को न्यूरो की कोई प्राब्लम ही नहीं है। इसलिए उसको किसी अस्पताल की बजाए डिस्चार्ज किया गया था।
- मंजू वाडवलकर, प्रवक्ता, पीजीआई

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पीजीआई रोज भेजता है चार से पांच मरीज
पीजीआई के सूत्रों के मुताबिक एडवांस ट्रामा सेंटर में औातन रोजाना चार से पांच मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जाता है। एक महीने पहले पीजीआई ने मनीमाजरा की एक महिला मरीज को गले और नाक में लगी नली के बावजूद भी घर भेज दिया था। लाचार परिजन मनीमाजरा और जनरल अस्पताल के धक्के खाते रहे। इसी तरह से डेढ़ महीने पहले पटियाला के एक दो साल के बच्चे की हार्ट की सर्जर के दौरान ब्रेन में क्लाटिंग हो गई थी। कुछ दिन अस्पताल मेें रखने के बाद पीजीआई ने उस बच्चे को भी घर भेजने को कहा। लेकिन परिजनों खूब हंगामा किया तो पीजीआई निदेशक ने दखल देकर बच्चे को अस्पताल में इलाज करवाने को कहा था।

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यह हाल है पूजा का
पूजा के गले में सांस की नली पड़ी है। नाक में लिक्विड डाइट के लिए पाइप पड़ी है। उसके ब्रेन में जमा ब्लड क्लॉट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इस वजह से न तो वह बोल पा रही है और न ही कुछ समझ पा रही है। शरीर के अंग भी काम नहीं कर रहे हैं।
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यह है पूजा की डिस्चार्ज समरी
पीजीआई के डॉक्टरों ने डिस्चार्ज रिपोर्ट में लिखा है कि सिर में ब्लड क्लॉट खत्म हो रहा है। इसे सांस लेने के लिए सक्शन ट्यूब और फीड के लिए राइल्स ट्यूब लगाना जरूरी है। डॉक्टरों ने इन दोनों उपकरणों को खरीदकर, घर में ही पूजा की देखरेख की सलाह दी। उसे दो सप्ताह बाद न्यूरो सर्जरी की ओपीडी में फिर से दिखाने को कहा गया है।

आठ घंटे किसी ने नहीं ली सुध
गत शनिवार को दोपहर वार्ड से बाहर निकाले जाने के बाद करीब आठ घंटे तक पीजीआई में पूजा की किसी ने सुध नहीं ली। उसे रेफर करने के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी करने में यह वक्त लगा, लेकिन इस दौरान किसी डॉक्टर या नर्स ने उसकी सुध ली। पीजीआई में उसे करीब तीन बजे ही वार्ड से निकालकर भेज दिया गया, लेकिन उसे सामान्य अस्पताल में रात 10.20 बजे भरती किया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल से दस्तावेज इकट्ठे करने, पुलिस को डिस्चार्ज की इत्तला देने के बाद एंबुलेंस का भी खुद ही इंतजाम करना पड़ा। इस दौरान पूजा गंभीर हालत में स्ट्रेचर पर पड़ी रही।
17 अगस्त को अटावा चौक के पास सुबह करीब आठ बजे 10वीं की छात्रा 17 वर्षीय पूजा सीटीयू की चपेट में आ गई थी। उस दिन से शुक्रवार तक उसका इलाज पीजीआई में चल रहा था परिजनों का आरोप है कि महज कुछ मिनट पहले उन्हें जानकारी दी गई कि पूजा को डिस्चार्ज किया जाएगा। पूजा के पिता बैद्यनाथ ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें पूजा को घर ले जाने को कहा, लेकिन परिजनों ने इससे इंकार कर दिया। बाद में उसे सेक्टर-16 अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जहां वह उपचाराधीन है।
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