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पीजीआई में खुलेगा इनोवेशन रिसर्च सेंटर

Chandigarh

Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पीजीआई में जल्द ही शहर के वैज्ञानिक और इंजीनियर्स रिसर्च कर सकेंगे। इनकी मदद से बीमारियों को दूर करने के लिए वैक्सीन, बीमारियों की पहचान करने वाले उपकरण तथा बायोमेडिकल स्पोर्ट सिस्टम और गंभीर रोगों के सस्ते इलाज के लिए चिकित्सकीय रिसर्च और हेल्थ टेक्नोलॉजी को डेवलप किया जाएगा। यह सब होगा पीजीआई के खुलने वाले इनोवेशन रिसर्च सेंटर में। पीजीआई में केंद्रीय बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से जल्द ही नया इनोवेशन सेंटर खोला जाएगा। यह घोषणा शनिवार को केंद्रीय राज्यमंत्री (प्लानिंग, साइंस एंड टेक्नोलॉजी) अश्वनी कुमार ने की।
उन्होंने कहा कि शोध ऐसे हों जिससे आम आदमी जुड़ा हो। इनोवेशन रिसर्च सेंटर में तमाम तरह की हेल्थ टेक्नोलॉजी डेवलप की जाएगी। इसके लिए स्थानीय इंजीनियर्स के साथ-साथ अन्य चिकित्सकीय एवं साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। अश्वनी कुमार ने बताया कि सिर्फ पीजीआई ही नहीं बल्कि ग्लोबल इनोवेशन सहयोग के लिए अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर स्टेनफोर्ड-इंडिया बायोडिजायन प्रोग्राम शुरू किया गया है, जो इंडियन मेडिकल टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को मजबूती देगा। इस बारे में पीजीआई निदेशक प्रो. योगेश चावला ने बताया कि इनोवेटिव रिसर्च से मरीजों को मदद मिलेगी। इनोवेटिव रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन हर साल पूरी दुनिया से दस वैज्ञानिकों को चुनता है। उनकी कोशिश है कि आने वाले समय में पीजीआई के इनोवटिव सेंटर से ऐसे वैज्ञानिकों को चुना जाए। पीजीआई के रिसर्च डे पर डीन प्रो. आमोद गुप्ता, सबडीन प्रो. कुसुम जोशी, नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. विनय सखूजा समेत पीजीआई की तमाम फैकल्टी और मेडिकल स्टूडेंट मौजूद थे।
चिकित्सा क्षेत्र में दो फीसदी खर्च होगी जीडीपी
अश्वनी कुमार ने कहा कि इस पंचवर्षीय योजना में चिकित्सा के क्षेत्र में दोगुनी जीडीपी खर्च की जाएगी। पहले जहां कुल सकल घरेलू उत्पाद का एक फीसदी खर्च किया जाता था, वहीं अब इस पंचवर्षीय योजना में दो फीसदी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इस पर हामी भरी है।
पीजीआई में शोध का बेहतर माहौल
जिस संस्थान में रोजाना छह हजार से ज्यादा मरीज इलाज कराने आते हैं वहां पर निश्चित रूप से शोध के लिए बेहतर माहौल होगा। यह कहना है कि देश की कई चिकित्सकीय एडवाइजरी कमेटी के सदस्य प्रो. वीआई मथान का। प्रो. मथान पीजीआई के रिसर्च डे पर बतौर मुख्य वक्ता मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पीजीआई में और बेहतरीन शोध हो सकते हैं। मथान ने नोबेल प्राइज पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि यह तो टिंटेड है। इसके लिए ग्रुपबाजी होती है।
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