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पीजीआई की गलती से नहीं फैला संक्रमण

Chandigarh

Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। अनुपमा के शरीर में संक्रमण पीजीआई के चिकित्सकों की लापरवाही के कारण नहीं फैला। अनुपमा का काफी भयानक एक्सीडेंट हुआ था और ऐसे मामलों में संक्रमण को रोक पाना बहुत मुश्किल होता है। अनुपमा मामले की जांच के लिए प्रो. गिल की अध्यक्षता वाली कमेटी का कुछ ऐसा ही मानना है। गठन के दस दिन बाद शुक्रवार को पहली बार जांच के लिए पीजीआई पहुंची कमेटी के सदस्यों ने अनुपमा के पिता का बयान दर्ज कर एडवांस ट्रामा सेंटर का मुआयना किया। हालांकि कमेटी का कहना है कि अगले चरण में अनुपमा के इलाज में देरी की वजह की जांच की जाएगी। इसके लिए अगले सप्ताह अनुपमा का इलाज करने वाले डॉक्टरों को बुलाया जाएगा।
शुक्रवार दोपहर ढाई बजे पीजीआई के कैरो ब्लॉक में शुरू हुई जांच शाम तकरीबन पांच बजे खत्म हुई। सूत्रों के मुताबिक प्रो. गिल कमेटी के पांचों सदस्यों ने एडवांस ट्रामा सेंटर का मुआयना किया। इस दौरान कमेटी ने अनुपमा के अस्पताल पहुंचने से लेकर उसके प्री आपरेटिव रूम में जाने तक की पूरी प्रक्रिया और इसमें लगे समय की जांच की। कमेटी ने अनुपमा के इलाज की फाइल भी पढ़ी। कमेटी ने अनुपमा के पिता अमित सरकार से भी पूछताछ की। इसके बाद ही कमेटी ने यह निष्कर्ष निकाला कि बस का पहिया चढ़ने के कारण छात्रा का पैर बुरी तरह कुचला गया था। ऐसी स्थिति में उसको रिकवर करना बहुत मुश्किल होता है। सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने तकरीबन ढाई घंटे की जांच के दौरान पाया कि अनुपमा को जो संक्रमण हुआ उसमें पीजीआई या किसी डॉक्टर का कोई दोष नहीं है। विशेषज्ञ सदस्यों ने कहा कि ऐसी स्थिति में संक्रमण रोक पाना मुश्किल होता है। कमेटी के चेयरमैन प्रो. एसस गिल ने बताया कि ऐसे संक्रमण में किसी भी संस्थान या चिकित्सक का दोष नहीं होता है। यह अनुपमा का दुर्भाग्य था कि उसे गैस गैंगरीन संक्रमण हो गया। उन्होंने बताया कि बहुत कम मामलों में ऐसा संक्रमण होता है। प्रो. गिल के मुताबिक देश भर में सड़क हादसे के औसतन तीन लाख घायलों में से एक को ही गैस गैंगरीन संक्रमण होता है। प्रो. गिल ने बताया कि अगले हफ्ते अनुपमा का इलाज करने वाले और उस दौरान वहां मौजूद रहने वाले चिकित्सकों को बुलाया जाएगा।
पहले ही बता दिया था कि ड्रेसिंग का कोई रिकार्ड नहीं
कमेटी का कहना है कि वह नर्सों और वहां मौजूद अन्य कर्मियों से ड्रेसिंग के बारे में पूछताछ करेगी। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में बता दिया था कि अनुपमा की ड्रेेसिंग का पीजीआई के पास कोई रिकार्ड ही नहीं है। ऐसे में यह पूरी जांच प्रक्रिया फिर सवालों के घेरे में आएगी।
कोट
अगर पीजीआई के बाहर से आए डॉक्टर भी इस मामले में सबको क्लीन चिट देते हैं तो मैं कोर्ट की शरण में जाऊंगा। मैं अपनी बेटी के दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शूंगा।
- अमित सरकार, अनुपमा के पिता

दोषी होने पर डॉक्टर का लाइसेंस रद होगा
अमर उजाला ब्यूरो
अनुपमा मामले की जांच कर रही कमेटी के चेयरमैन तथा पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और बाबा फरीदकोट मेडिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. एसएस गिल से अमर उजाला ने यह जानने की कोशिश कि उनकी कमेटी कैसे लोगों का पीजीआई पर भरोसा बरकरार रखने में मदद करेगी और अनुपमा की मौत की असलियत सामने लाएगी।
सवाल : दस दिन से ज्यादा हो गए कमेटी को बने हुए। कहां तक पहुंची है आपकी जांच?
जवाब : जांच तो शुक्रवार से शुरू की है। अभी एक और बैठक होगी। उसके बाद कुछ नतीजा निकलेगा।
सवाल : आपने अनुपमा के मामले को बारीकी से समझा है। क्या लगता है कहां पर चूक हुई?
जवाब : अभी तो जांच चल रही है।
सवाल : संक्रमण के चलते अनुपमा का पैर काटना पड़ा और उसके पूरे शरीर में ये इंफेक्शन फैल गया। किसकी गलती है?
जवाब : इसमें किसी का दोष नहीं है। जिस तरह की इंजरी थी उसमें संक्रमण की संभावनाएं बहुत ज्यादा थी।
सवाल : फिर परिजनों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? क्या इलाज करने वाले डॉक्टर को यह बताना नहीं चाहिए था?
जवाब : यही तो अब जांचा जाना है कि मरीज की गंभीरता को कैसे लिया गया।
सवाल : क्या होगा अगर आपकी कमेटी ने पाया कि उसके इलाज में देरी हुई?
जवाब : मरीज का इलाज करने वाले कंसलटेंट का लाइसेंस तक रद किया जा सकता है।
सवाल : ऐसी दशा में क्या आपकी भी यही सिफारिश होगी?
जवाब : क्यों नहीं...बिल्कुल।
सवाल : अनुपमा की मौत के मामले में बनाई गई पुरानी कमेटी को तो खारिज कर दिया गया। आप के लिए तो यह अब चैलेंज होगा?
जवाब : पूरी टीम कमेटी सच्चाई के एक एक पहलू को जानेगी। किसी भी प्वाइंट को नजरंदाज नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होगा। जो दोषी होगा उसको सजा हर हाल मिलेगी।
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