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पंजाब में पांच लाख से ज्यादा बच्चे बिना ड्रेस

Chandigarh

Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी स्कूलों में पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को ड्रेस देने के फैसले में भी भेदभाव उबर कर सामने आ रहा है। भेदभाव के अलावा इसे बच्चों का लाजमी एवं मुफ्त शिक्षा का अधिकार कानून-2009 का उल्लंघन भी माना जा रहा है।
सर्वशिक्षा अभियान कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों को ड्रेस के लिए प्रति बच्चा 400 रुपये की ग्रांट भेजी गई है। हालांकि यह चार सौ रुपया भी नाकाफी है लेकिन यह ग्रांट भी स्कूलों में पढ़ रहे सभी बच्चों के लिए नहीं है। राज्य के सरकारी स्कूलों में 21 लाख से ज्यादा बच्चे पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करते हैं। ज्यादातर बच्चे अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से संबंधित हैं और एक तिहाई के करीब हिस्सा सामान्य वर्ग का है। ड्रेस का पैसा सामान्य वर्ग के उन करीब पांच लाख बच्चों के लिए नहीं है, भले ही वे गरीब हैं। अध्यापकों को अपने ही स्कूल में बच्चों से भेदभाव करते हुए समस्या आ रही है। इनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में वही बच्चे आ रहे हैं जो किसी प्राइवेट स्कूल की थोड़ी फीस भी अदा करने के योग्य नहीं हैं। इस लिए उनको भी ड्रेस मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 17 लाख के करीब बच्चों के लिए ड्रेस के 70 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पंजाब सरकार के अधिकारी इससे यही कह कर पीछा छुड़ रहे हैं कि यह योजना भारत सरकार की है। जो भी नियम तय किए गए हैं राज्य सरकार उसका उल्लंघन नहीं कर सकती है।
बाक्स- दो वर्ष पहले पुस्तकों पर था झगड़ा
पंजाब के सरकारी स्कूलों में ही दो तरह की पूस्तकों के मुद्दे ने राज्य में तूल पकड़ लिया था। तत्कालीन डीजीएसई कृष्ण कुमार ने सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए पुस्तकें सर्वशिक्षा अभियान के तौर पर छपवा दी थी। उनकी क्वालिटी बेहतर थी लेकिन अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पुस्तकें पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड छपवाता था। इसमें पांच करोड़ रुपये भी ज्यादा लगे और क्वालिटी भी घटिया थी। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया था। अब ड्रेस का मामला भी उबरने के आसार हैं।

कोट-
सर्वशिक्षा अभियान में यह पूरा मामला केंद्र सरकार के हाथ में है। यह ठीक है कि सभी बच्चों को ड्रेस मिलनी चाहिए लेकिन सरकार ने अन्य छात्रों की ड्रेस का पैसा जारी ही नहीं किया है।
- काहन सिंह पन्नू, डीजीएसई, पंजाब
- (हमीर सिंह)
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