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जिन नौ की सर्जरी का हवाला, वे भी तड़पे

Chandigarh

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पीजीआई जिन नौ गंभीर मरीजों को ढाल बनाकर छात्रा अनुपमा की मौत के मामले में अपनी गर्दन बचा रही है, वही अब उसके गले की फांस बन सकती है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि पीजीआई ने अनुपमा की सर्जरी जिन नौ मरीजों की जान बचाने का हवाला देते हुए टाली थी, उनकी भी सर्जरी 17 जुलाई को नहीं हो सकी। वहीं, 17 से लेकर 20 जुलाई तक एडवांस ट्रामा सेंटर के आपरेशन थिएटर में छात्रा जैसे हालात वाले अन्य मरीजों की सर्जरी होती रही, लेकिन उसकी सुध नहीं ली गई। छात्रा की 24 जुलाई को मौत होने के बाद पीजीआई प्रशासन ने बार-बार नौ मरीजों की सर्जरी उसी दिन होने की दलील दी थी, लेकिन अब यह भी सवालों के घेरे में है। वहीं, कानूनविदों का कहना है कि ऐसा कोई कानून ही नहीं है कि मरीजों की लिस्ट बनाकर सर्जरी की जाए।
ट्रामा सेंटर के सूत्रों का कहना है कि पीजीआई ने 17 जुलाई को जिन नौ मरीजों का हवाला दिया था, वे भी अपनी सर्जरी के लिए अगले कुछ दिनों तक इंतजार करते रहे। इन मरीजों की सर्जरी अगले तीन दिनों में की गई। हालांकि ट्रामा सेंटर के अधिकारियों का कहना है कि इन नौ मरीजों में से गंभीर मरीजों के आधार पर तीन से चार मरीजों की रोज सर्जरी की गई। इनकी सर्जरी तीन दिन में हो पाई, लेकिन इसके साथ अन्य गंभीर मरीजों की लाइन भी बढ़ती रही। इस वजह से अनुपमा की सर्जरी में देर हो रही थी। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या अनुपमा गंभीर नहीं थी, जो उसकी सर्जरी तीन दिन टाली गई। सूत्रों ने बताया कि अनुपमा की सर्जरी नान ओपन फ्रैक्चर थी इसलिए उसको गंभीर न मानते हुए उसकी सर्जरी टाली गई थी, लेकिन उसके जैसे अन्य मरीजों की सर्जरी कर दी गई। वरिष्ठ एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि पीजीआई ने मरीजों की जो भी लिस्ट तैयार की थी, उसकी कोई वैधानिक मान्यता ही नहीं है। उस लिस्ट को मरीज की गंभीरता के मुताबिक कभी भी बदला जा सकता था।

यह था मामला
सेक्टर 18 गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 11वीं क्लास की छात्रा अनुपमा 17 जुलाई को घर जाने के लिए बस में चढ़ रही थी। इसी दौरान ड्राइवर ने बस दौड़ा दी और उसके नीचे आकर वह बुरी तरह घायल हो गई। बाद मेें पीजीआई में डाक्टरों ने समय पर सर्जरी नहीं की और न ही पट्टियां बदली। इस वजह से इंफेक्शन फैलने के कारण 24 जुलाई को उसकी मौत हो गई।
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