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जेनेवा में छाए पीयू के प्रोफसर, स्कालर

Chandigarh

Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ। जेनेवा में बुधवार को जिस सेमिनार में गॉड पार्टिकल की खोज की घोषणा की गई, उसमें पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के दस रिसर्च स्कालर भी मौजूद थे। क्रांतिकारी सब-एटामिक पार्टिकल के बारे में बताते समय यूरोपीय सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) के वैज्ञानिकों ने पीयू की फिजिक्स लैब में हुए काम की सराहना की।
रिसर्च से जुड़ीं और बुधवार को ही शहर लौटीं डा. सुमन बाला ने कहा कि इस खोज का पहला कदम हमने पार किया है। हमारी टीम यह जानने की कोशिश कर रही थी कि हर भारी चीज ठोस क्यों होती है? वैसे हमने कोलेबरेटर के तौर पर काम किया है। हमारी टीम ने पीयू फिजिक्स विभाग की लैब में डाटा एनालिसिस किया था जो इस खोज का बड़ा हिस्सा था। गॉड पार्टिकल की खोज में पीयू के फिजिक्स विभाग के पांच प्रोफेसर भी जुड़े हैं जिनमें प्रो.जेबी सिंह और प्रो.सुमन बाला बैरी के अलावा प्रो.मंजीत कौर, डा.विपिन भटनागर और डा.जेएन कोहली शामिल हैं। हालांकि विभाग में दो दशक से ज्यादा समय से इस पर शोध हो रहा है और इस शोध से जुड़े कुछ शिक्षक अब रिटायर भी हो चुके हैं जिनमें पीयू के पीयू डीयूआई प्रो.आईएस मित्रा भी शामिल हैं।
इस खोज से जुड़े पीयू में फिजिक्स विभाग के प्रो.जेबी सिंह ने जेनेवा से फोन पर बातचीत में अमर उजाला को बताया कि चंडीगढ़ और पीयू के लिए यह गर्व की बात है कि यहां की फिजिक्स विभाग की लैब में हुए काम को भी विश्व स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि विश्व के पांच हजार से अधिक वैज्ञानिकों की मौजूदगी में जब पीयू का उल्लेख हुआ तो उनका सीना गर्व से फूल गया।
जेनेवा में गॉड पार्टिकल की खोज की घोषणा से पहले सर्न की ओर से दोपहर 12.30 बजे जब सेमिनार शुरू हुआ तो वहां पीयू के प्रो.जेबी सिंह के अलावा नितीश ढींगरा, अमनदीप कलसी और निशु नायब समेत पीयू के दस रिसर्च स्कालरों को देखकर चंडीगढ़ में उनके साथी खुशी से उछल पड़े। ये रिसर्च स्कॉलर्स हिग्स बोसोन से जुड़े कई टॉपिक्स पर शोध कर रहे हैं।
पीयू का यह था योगदान
पीयू की फिजिक्स लैब में दो डिटेक्टर तैयार हो रहे हैं। लार्ज हाइड्रान कोलाइडर (एलएचसी) के लिए डिटेक्टर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पीयू के पांच शिक्षकों की टीम एलएचसी के लिए रेजिस्टिव प्लेट्स चेकर (आरपीसी) बनाने की तैयारी में जुटी है और आरपीसी तैयार करने के लिए फिजिक्स विभाग में लैब भी बनी है। इसके लिए डीएसटी से विभाग को करोड़ों की ग्रांट भी मिली है। पीयू के शिक्षकों को डाटा की क्वालिटी की चेकिंग करने और डाटा एनालेसिस की जिम्मेदारी भी दी गई थी। पीयू के लैब में ही एचओ (आउटर हाइड्रानिक कैलोरीमीटर) भी तैयार हुआ था।
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