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जीएमसीएच-32 में नर्सेज की हड़ताल से ठप हुई स्वास्थ्य सेवाएं

Chandigarh

Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में शुक्रवार को नर्सेज एसोसिएशन की हड़ताल की वजह से इमरजेंसी से लेकर अन्य वार्डों में मरीज दर्द से तड़पते और कराहते रहे, वहीं बाहर हड़ताली उनकी परवाह किए बिना जोरदार नारे लगाते रहे। नर्सेज की लगभग आठ घंटे चली हड़ताल में मेडिकल कालेज में एक भी रुटीन सर्जरी नहीं हो सकी। हड़ताल का असर इमरजेंसी सर्जरी पर भी पड़ा। आईसीयू से लेकर जनरल और प्राइवेट वार्ड से लेकर पीडियाट्रिक (बच्चा) वार्ड में मरीज दर्द से कराहते रहे, लेकिन उन्हें देखने कोई नहीं आया। डाक्टरों की समर वैकेशन के चलते हालात और ज्यादा खराब हो गए। अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग एसोसिएशन की दोपहर के बाद बैठक हुई, जिसमें हड़ताल को खत्म करने पर सहमति बन गई। इसके बाद मरीजों ने कुछ राहत की सांस ली।
जीएमसीएच में सुबह सात बजे से ही मरीजों के ऑपरेशन टलने शुरू हो गए। ओटी के सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार सुबह ऑपरेशन थिएटर को सर्जरी के लिए तैयार ही नहीं किया गया, लेकिन मरीजों को ओटी बंद होने की जानकारी नहीं थी।

स्थिति नहीं संभल पाया अस्पताल प्रशासन
35 के करीब सर्जरी हररोज रुटीन में होती है, लेकिन शुक्रवार को एक भी नहीं हुई
03 सर्जरी ही इमरजेंसी में हुई, जबकि रोजाना लगभग सात होती हैं।
1350 मरीज ही ओपीडी में आए, रोजाना 1550 के करीब आते हैं।
298 नर्सेज हैं जीएमसीएच में, 703 पद हैं कुल, बाकी हैं खाली
05 घंटे तक इलाज का करते रहे इंतजार, लेकिन नहीं आया कोई
08 घंटे के करीब चली हड़ताल, अस्पताल प्रशासन दिखा बेबस

दर्द और संवेदनहीनता की इंतहा
अंबाला कैंट से ब्लड इंफेक्शन के मरीज 13 वर्षीय हर्ष के चेकअप के लिए जीएमसीएच-32 में न तो कोई नर्स आया और न ही डाकटर। पांच घंटे तक इंतजार करने के बाद उसका परिवार रोते हुए पीजीआई रवाना हो गया। ऐसी ही दिक्कत इमरजेंसी में आए 50 से ज्यादा मरीजों को झेलनी पड़ी, लेकिन हड़ताली नहीं पिघले।

नर्सेज की जो भी मांगे हैं उनको पहले से ही मान लिया गया है। नर्सेज की नई भर्तियां तीन महीनों के अंदर हो जाएंगी। हड़ताल के दौरान मरीजों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। शुक्रवार को तीन मरीजों को ही पीजीआई रेफर किया गया है।
- डॉ. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच


हमारी मांगें मान ली गई हैं। प्रशासन ने हामी भरी है कि अगले तीन महीने में नर्सेज की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। इसलिए मरीजों की परेशानी को देखते हुए हम लोगों ने हड़ताल दोपहर को दो बजे खत्म कर दी।
- विजय कुमार, प्रेसीडेंट नर्सिंग एसोसिएशन
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