आपका शहर Close

पाटिल के चार साल: विकास पर लगा ब्रेक

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Wed, 22 Jan 2014 11:28 AM IST
Development, Four Years, Shivraj Patil, Chandigarh
चार साल पहले वर्ष 2009 में 22 जनवरी को लोकसभा के पूर्व स्पीकर और पूर्व केंद्रीय गृह और रक्षा मंत्री शिवराज पाटिल ने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के पद की शपथ ली थी।
उस वक्त शहर के लोगों को उम्मीद बंधी थी कि पाटिल के आने से शहर के विकास में तेजी आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आज पाटिल प्रशासक के तौर पर चार साल पूरे कर रहे हैं और इन चार सालों में शहर में विकास की रफ्तार बढ़ने की बजाय थम गई है।

इन चार सालों में शहर के लिए किए कोई नया प्रोजेक्ट नहीं आया। जो पुराने प्रोजेक्ट थे उन पर भी बहुत ही धीमी गति से काम हो रहा है।

यूटी सचिवालय से राजभवन जाने वाली फाइलों को पाटिल की मंजूरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। शहर के आम नागरिकों से लेकर व्यापारी परेशान हैं।

लोगों की यह भी शिकायत है कि पाटिल अकसर प्रशासन के अधिकारियों को सुबह राजभवन में बुला लेते हैं। जो समय पब्लिक के लिए होता है, उस समय पर अधिकारी राजभवन होते हैं जिससे उन्हें बार बार आना पड़ता है।

पाटिल के फैसले

व्यापारी परेशान:
-पाटिल के निर्देश पर लीज होल्ड इंडस्ट्रियल प्लाटों के ट्रांसफर पर रोक लगाई गई है। यह रोक लगने से व्यापारी परेशान हैं। संपदा विभाग के साथ चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम की लीज होल्ड प्रापर्टी अब फ्री होल्ड नहीं हो सकेगी। इससे भी लोगों की दिक्कत बढ़ गई है।

ठेके नहीं हुए नीलाम:

-पाटिल के निर्देश पर नई एक्साइज पॉलिसी तैयार हुई और शहर की सड़कों के किनारे पर प्री फैब्रिकेटेड शेड में बने ठेके बंद हो गए। नई एक्साइज पॉलिसी के कारण कई ठेके नीलाम नहीं हो सके जिससे प्रशासन को काफी नुकसान हुआ।

प्रॉपर्टी की ऑक्शन नहीं:
-पाटिल ने निर्देश पर शहर में तीन सालों से प्रापर्टी की नीलामी नहीं हो सकी है। नीलामी न होने से प्रशासन को आमदनी नहीं हो रही है।

सफल नहीं रहा जनता दरबार:
-पाटिल के जन सुनवाई सत्र नियमित तौर पर नहीं लगे। कई बार तो दो माह तक सत्र नहीं लगे। सत्र में लोगों ने जो समस्याएं रखीं उनका समाधान भी नहीं हुआ।

बसों की संख्या हुई कम:
-पाटिल के निर्देश पर ही सीटीयू की लांग रूट पर चलने वाली बसों की संख्या को कम कर दिया गया। इससे लोग काफी परेशान हुए।

मेट्रो प्रोजेक्ट की कछुआ चाल:
-मेट्रो प्रोजेक्ट भी आगे नहीं बढ़ सका और मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार करने में प्रशासन को कई साल लग गए।

वाइल्ड लाइफ के प्रोजेक्ट अटके:
-नगर निगम का बजट समय पर पास नहीं हुआ। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड (एसडब्ल्यूएलबी) की बैठक तीन साल बाद होने से कई प्रोजेक्ट लटके रहे।

सलाहकार समिति को 8 माह बाद पुनर्गठन:

-प्रशासक की सलाहकार समिति का पुनर्गठन होने में आठ माह लग गए। लगभग 13 माह से समिति की बैठक नहीं हो सकी है। समिति के बैठक में लिए गए फैसलों पर अमल नहीं हुआ है।

वार्ड कमेटी के गठन में देरी:
-पाटिल की मंजूरी न मिलने के कारण वार्ड कमेटी का गठन समय पर नहीं हो सका। वहीं पाटिल के निर्देश पर शहर में अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया।

भाषण में पार्किंग और सौर ऊर्जा का मुद्दा:

शिवराज पाटिल के भाषण में उनकी कुछ पसंदीदा बातें होती हैं। पाटिल जब भी कहीं भाषण देते हैं वह पार्किंग की परेशानी दूर करने के लिए जमीन के नीचे या बिल्डिंग के ऊपर पार्किंग के लिए सुविधाएं बनाने की बात कहते हैं।

वह घर में जमीन के ऊपर या नीचे गाड़ियों की पार्किंग के लिए गैरेज बनाने पर जोर देते हैं। इसके अलावा उनके भाषण में सौर उर्जा का हमेशा उल्लेख होता है। वह कहते हैं कि प्रशासन सौर उर्जा को उपयोग में लाने के लिए हर प्रकार के प्रयास में लगा हुआ है।

लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा:

शहर में पिछले कई दिनों से चर्चा है कि शिवराज पाटिल आगामी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं और वह टिकट लेने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार पाटिल सक्रिय राजनीति में लौटना चाहते हैं। अगर पाटिल को टिकट मिल जाती है तो उन्हें राज्यपाल के पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

पाटिल के चार साल बेकार
प्रशासक के चार साल पूरे हो गए हैं। एक-एक दिन बेकार गया। प्रशासक ने कुछ काम नहीं किया है। सभी परेशानियां बरकरार हैं।
सुनील चोपड़ा, प्रधान रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-18

कोई काम नहीं हुआ। इसके लिए फॉसवेक को गृह मंत्रालय में जाना पड़ा। प्रशासक ने शहर के नागरिकों के लिए एक भी काम नहीं किया। उन्हें कभी भी चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में याद नहीं किया जाएगा।
पीसी सांघी, चेयरमैन, फॉसवेक

प्रशासक पूरे चार साल ‘लापता’ रहे। उन्होंने कोई मुद्दा नहीं सुलझाया। सोसाइटियों के लोग हों या हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले, कोई भी उनसे खुश नहीं।
- एसएस भारद्वाज, चेयरमैन, चंडीगढ़ सोशल वेलफेयर काउंसिल
Comments

स्पॉटलाइट

'पद्मावती' विवाद पर दीपिका का बड़ा बयान, 'कैसे मान लें हमने गलत फिल्म बनाई है'

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

'पद्मावती' विवाद: मेकर्स की इस हरकत से सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी नाराज

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

कॉमेडी किंग बन बॉलीवुड पर राज करता था, अब कर्ज में डूबे इस एक्टर को नहीं मिल रहा काम

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

हफ्ते में एक फिल्म देखने का लिया फैसला, आज हॉलीवुड में कर रहीं नाम रोशन

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

SSC में निकली वैकेंसी, यहां जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

Most Read

कुछ ऐसे होगी सुशील मोदी के बेटे की शादी, ना डीजे होगा ना लजीज खाना

No band baaja baraat and dahej in sushil modi's son wedding
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

शासन का आदेश दरकिनार, ‘सेटिंग’ कर बनाए गए यूपी बोर्ड परीक्षा के केंद्र

Up board examination center allotted on the basis of the recommendation
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

हार्दिक पटेल मामले में अखिलेश का बयान, कहा- 'किसी की प्राइवेसी को सार्वजनिक करना बहुत गलत बात'

akhilesh yadav statement about hardik patel cd case
  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

सीएम योगी बोले- अपराधी जेल जाएंगे या फिर भेजा जाएगा यमराज के पास

The Chief Minister said, offenders will go to jail or be sent to Yamraj
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

PoK पर फारूक के बिगड़े बोल, 70 साल में तय नहीं कर पाए अब कहते हैं ये हमारा हिस्सा है

Farooq Abdullah give reaction on POK
  • गुरुवार, 16 नवंबर 2017
  • +

अखिलेश ने बनवाई कृष्ण की सबसे बड़ी मूर्ति, कीमत-वजन जान दांतों तले दबा लेंगे उंगली

Akhilesh largest statue built Krishna, cost-weight John finger teeth will be suppressed under
  • मंगलवार, 14 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!