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जानिए, क्या है कैश सब्सिडी ट्रांसफर योजना

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 28 Nov 2012 02:54 PM IST
what is cash subsidy transfer plan know how to get money back
कैश सब्सिडी ट्रांसफर योजना के जरिए तमाम सरकारी योजनाओं की रकम जरूरतमंदों के खाते में सीधे जाएगी। विश्लेषकों का कहना है कि इसके जरिए बिचौलियों पर लगाम लग सकेगी और वे बाजार मूल्य पर सामान खरीद सकेंगे। मौजूदा समय लाभार्थियों को सामान सब्सिडी वाले रेट पर मिलता है। 'आपका पैसा आपके हाथ' के नारे के साथ पेश इस योजना के जरिए लगभग चार लाख करोड़ रुपये की कैश सब्सिडी लोगों के खातों में जाएगी।

एक जनवरी से लागू होगी योजना
एक जनवरी को पहले चरण में आंध प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम और त्रिपुरा आदि राज्यों के कुछ जिलों में इसे लागू किया जाएगा। जबकि जून, जुलाई 2013 तक उत्तर प्रदेश, बिहार समेत बाकी राज्यों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा।

कौन से जिले होंगे दायरे में
आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के पांच-पांच, हिमाचल और झारखंड के चार-चार, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा के तीन-तीन और हरियाणा, केरल और सिक्किम के दो-दो जिले। इन जिलों को इसलिए चुना गया क्योंकि वहां दिसंबर तक 80 फीसदी लाभार्थियों के आधार कार्ड बन जाएंगे।

क्या होंगे लाभ
इससे सरकार को योजना का पैसा उनके सही लाभार्थी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसी जा सकेगी। अभी कई राशन दुकानदार सब्सिडी वाला अनाज और अन्य वस्तुएं खुले बाजार में बेच देते हैं।

लेकिन आशंकाएं भी  
यह आशंका भी जताई जा रही है कि लाभार्थी सीधे मिली सब्सिडी का रकम का दुरुपयोग कर सकते हैं। जैसे कोई शराबी व्यक्ति इस रकम से अनाज न लेकर शराब खरीद ले।

और भी चुनौतियां
देश की करीब सवा अरब की आबादी में से सिर्फ 21 करोड़ लोगों के पास ही आधार कार्ड हैं, जबकि कैश ट्रांसफर आधार कार्ड के आधार पर ही होना है। ज्यादातर गरीबों के कोई बैंक खाते भी नहीं हैं, कई पिछड़े इलाकों में बैंक शाखाएं नहीं होना भी इस योजना को लागू करने में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

कैसे लागू होगी योजना
एलपीजी, केरोसिन की सब्सिडी राशि, पेंशन और छात्रवृत्ति की रकम और सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं की रकम सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगी।  

बेहतरीन रहे नतीजे
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह योजना आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, पांडिचेरी और सिक्किम में शुरू की जा चुकी है। इसके नतीजे भी बेहतरीन रहे।

विदेश में ऐसी योजना पर सशर्त
कई लैटिन अमेरिकी देशों में कैश ट्रांसफर योजना लागू है, लेकिन वहां इस योजना का पैसा गरीब परिवारों की महिलाओं के ही खातों में पहुंचाने की शर्त है। साथ ही उनके बच्चों के नियमित स्कूल जाने, बच्चों को बेहतर पोषण देने और स्वास्थ्य सुविधाएं लेने जैसी शर्तों को पूरा करने पर ही उन्हें सब्सिडी की रकम दी जाती है।

क्या होगा राजनीतिक असर
इस योजना को यूपीए सरकार के लिए गेम चेंजर भी कहा जा रहा है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह योजना सरकार के लिए 'कैश दो और वोट लो' की तर्ज पर साबित हो सकती है। वर्ल्ड बैंक के एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि कैश ट्रांसफर योजना का लाभ पाने वाले ज्यादातर लोग इसे लागू करने वाली सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में ही वोट देने की बात कहते हैं।

कौन सी योजनाएं होंगी दायरे में--
--सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की 14 छात्रवृत्ति योजनाएं
--मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 6
--अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की 3
--महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 2
--स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की 1
--श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की 5 योजनाएं

- 16 राज्यों के 51 जिलों में 1 जनवरी से शुरू होगी कैश सब्सिडी ट्रांसफर सुविधा।
- पूरे देश में अगले साल के अंत तक योजना लागू करने का लक्ष्य।
- हर साल 10 करोड़ परिवारों को करीब चार लाख करोड़ रुपये की कैश सब्सिडी दी जाएगी।
- गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हर परिवार को सालाना 30 हजार रुपये से ज्यादा की धनराशि मिल सकती है।
- शुरुआत में खाद, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी का नकद भुगतान नहीं होगा, लेकिन बाद में इन्हें भी योजना में शामिल किया जाना है।
- 29 योजनाएं होंगी दायरे में, वैसे कुल 42 कल्याणकारी योजनाएं चलाती है सरकार।
- 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करती है सरकार सब्सिडी पर।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, अल्पसंख्यक कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्रम एवं रोजगार मंत्रालयों की योजनाएं होंगी इसमें शामिल।
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