आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

पोंजी है कमाई का सब्जबाग

नई दिल्ली/कारोबार डेस्क

Updated Fri, 30 Nov 2012 03:18 PM IST
ponji scheme source of income for fraud
पोंजी स्कीम, पिरामिड स्कीम, मल्टी लेवल मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग सिस्टम यह ऐसा धंधा या बिजनेस है, जिसके जरिये लोगों को सपने दिखाकर लूटा जाता है। पोंजी स्कीम का सब्जबाग मानों यूं होता है कि एक भिखारी भी कुछ ही महीनों में अरबपति बन जाएगा। यह एक तरह से सुनियोजित कॉरपोरेट ठगी का मॉडल है।
इसमें निवेशकों को भारी भरकम रिटर्न (कई बार सौ फीसदी तक) का लालच देकर निवेश कराया जाता है। लेकिन, आखिरकार ऐसी स्कीम लाने वाली कंपनियां या फर्म कुछ महीनों या वर्षों में निवेशकों का लाखों-करोड़ों लेकर रफूचक्कर हो जाती हैं और मोटा रिटर्न मिलने की आस लगाए निवेशक हाथ मलते रह जाते हैं।

इसके बाद ठगी के शिकार निवेशक पुलिस थानों के चक्कर इस उम्मीद से लगाते रहते हैं आज नहीं तो कल जालसाज पकड़ा जाएगा और उनका मूलधन ही कमोबेश मिल जाएगा।

दरअसल, हकीकत यह है कि यह ठगी इतने सुनियोजित तरीके से की जाती है कि इसमें आरोपी के पकड़े जाने के बाद भी निवेशकों का पैसा मिलना काफी मुश्किल होता है। हाल में स्पीक एशिया, स्टाक गुरु और एन मार्ट जैसी कंपनियों की पोंजी स्कीमें कुछ इसी तरह की हकीकत बयां कर रही हैं।

देश में पोंजी स्कीम का जाल इस कदर फैला कि छोटे-छोटे किसानों तक को इसने अपनी चपेट में ले लिया। चाहे, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तराखंड या पंजाब तक के किसानों के एमु फार्मिंग के नाम पर डूब गए लाखों रुपये की बात हो या पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में बकरी पालन जैसी स्कीम के नाम पर की जाने वाली ठगी।

दरअसल, आज हम जिस पोंजी स्कीम की बात कर रहे हैं उसका जन्मदाता एक इतावली नागरिक था। इसे चार्ल्स पोंजी के नाम से जानते हैं, लेकिन उसका पूरा नाम कारलोस जियेन्नों गिवोवान्नी गुग्लिम्लों टोबाल्डो पोंजी था। 38 वर्ष की उम्र में अमेरिका में कदम रखने वाले पोंजी ने प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद यूरोपीय मौद्रिक व विनिमय अव्यवस्था का फायदा उठाया और उसी उद्देश्य से उसने एक स्कीम शुरू की।

इस स्कीम में उसने 45 दिन में प्रत्येक निवेशक को 50 फीसदी तक रिटर्न देने का लालच दिया। आगे पोंजी ने द सिक्युरिटीज एक्सचेंज कंपनी बनाई, जिसमें निवेश के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों निवेशकों ने पैसा लगाया।

कुछ दिनों के बाद आखिरकार निवेशकों के लिए पोंजी की यह स्कीम छलावा साबित हुई और हजारों लोगों को लाखों डूब गए। तो इस तरह शुरुआत हुई पोंजी स्कीम की। यह डरा-धमकाकर नहीं बल्कि सपने दिखाकर लूटने या लोगों को छलने का बिजनेस है।

दरअसल, पोंजी स्कीम के काफी हद तक सफल होने के पीछे एक मनोवैज्ञानिक कारण है। यूं कहें, जब कोई व्यक्ति यह महसूस करता या देखता है कि कुछ लोग अपनी निवेश पर भारी मुनाफा कमा रहे हैं, तो उसके मन में लालच उठता है और वह उनका अनुकरण करने लगता है। वह नहीं सोचता कि सामान्य स्थितियों में कानून के दायरे में रहते हुए इतना भारी मुनाफा असंभव है।

10-15 साल पहले काफी चिट फंड स्कीमें आईं
करीब 10-15 साल पहले की बात करें तो काफी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां बाजार में एक से बढ़कर एक लुभावने ऑफर लेकर आईं। वह निवेशकों को भारी भरकम रिटर्न के साथ सुनिश्चित उपहार तक का लालच दे रही थीं। इनमें हॉली डे रिसॉर्ट बनाने से लेकर चाय बागान का स्वामित्व तक दिलाने की योजनाएं शामिल थीं। इसके साथ मुफ्त में विदेश यात्राओं का भी ऑफर हुआ करता था।

इस तरह पहचानें पोंजी स्कीम
आम लोगों या निवेशकों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है पोंजी स्कीमों की पहचान करना। इसका ऐसा कोई तय फार्मूला तो नहीं है, जिसके आधार पर कोई पोंजी स्कीम की पहचान कर लेगा, लेकिन किसी भी निवेश योजना में निवेश से पहले सतर्कता और विवेक का इस्तेमाल करे तो वह आसानी से इस तरह की ठगी से बच सकता है। यानी, यूं कहें कि यदि आप थोड़ा बहुत भी सतर्क हैं तो आपके लिए इन फर्जी स्कीमों की पहचान कर पाना मुश्किल नहीं है।

जैसेकि, यदि कोई स्कीम प्रचलित तौर पर मिलने वाले रिटर्न से अधिक देने का वादा कर रही है तो सतर्क हो जाएं, इसमें जालसाजी हो सकती है। वहीं, यदि कोई कहे कि आपका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है, तो इसमें भी छलावे की गुंजाइश है। क्योंकि, किसी भी वित्तीय योजना को सौ फीसदी फुल प्रुफ नहीं कहा जा सकता है।

एक अहम पहलू यह भी है कि यदि कोई कंपनी निवेशकों को स्कीम के कानूनी होने का दावा बार-बार कर रही है तो इसमें फर्जीवाड़े की आशंका है। इसके अलावा, यदि किसी स्कीम में ब्रांड बिल्डिंग पर अधिक जोर दिया जाए या सालाना 15 फीसदी से अधिक रिटर्न का दावा किया जाए तो समझिए की मामला संदिग्ध है। इन स्थितियों में पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद ही निवेश की ओर कदम बढ़ाएं। जहां तक संभव हो लुभावनी स्कीमों से दूरी ही बना कर रखें। क्योंकि, लालच ही ठगी का मार्ग प्रशस्त करता है।

पोंजी स्कीम या मल्टी लेवल मार्केटिंग का सब्जबाग मानों यूं होता है कि एक भिखारी भी कुछ ही महीनों में अरबपति बन जाएगा। यह एक तरह से सुनियोजित कॉरपोरेट ठगी का मॉडल है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

सोशल मीडिया: JIO के बाद अंबानी शुरू करेंगे PIO, 3 महीने सब फ्री

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

राजकुमार हो गए अपने ही घर में 'ट्रैप्ड', फिल्म का टीजर हुआ रिलीज

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

आखिर क्यों काट दिए गए 'रंगून' से 40 मिनट के सीन ? ये रही असली वजह

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

'लाली की शादी में लड्डू दीवाना' का पोस्टर रिलीज, दिखा अक्षरा का नया अंदाज

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

बुधवार के दिन करें यह पांच काम, सुख-समृद्धि से भर जाएगी जिंदगी

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

Most Read

ईपीएफ पर मिलेगा 8.65 फीसदी ब्याज, बनी सहमति

Labour Ministry AND Finance Ministry agree on 8.65% EPF interest SAYS Dattatreya
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

बजट में हो सकता है ऐलान, दो लाख तक पीएफ निकासी पर नहीं लगेगा टैक्स

Budget 2017: Govt may enhance PF withdrawal limit to 2 lac
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +

बुरी खबर: सेविंग अकाउंट पर घट सकती है ब्याज दर!

Now banks may cut interest rate in saving account
  • गुरुवार, 9 फरवरी 2017
  • +

सरकार ने लांच किया CPSE ETF, रिटेल निवेशकों को डिस्काउंट

Govt to launch ETF for PSU Companies on Jan 17
  • मंगलवार, 17 जनवरी 2017
  • +

EPFO ने पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर घटाई

EPFO likely to retain PF interest by 8.8 percent
  • सोमवार, 19 दिसंबर 2016
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top