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निवेश की नई राह पर नवाबों का शहर

नई दिल्ली/लखनऊ/ब्यूरो

Updated Mon, 29 Oct 2012 07:59 PM IST
investment incentives in lucknow
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आई तेजी और सर्विस सेक्टर के विकास का असर लखनऊ वासियों के निवेश के तरीकों में भी दिखने लगा है। राजधानी के लोग धीरे-धीरे बचत के परंपरागत तरीकों की जगह शेयर बाजार, रीयल एस्टेट क्षेत्र और आयकर बचत योजनाओं में निवेश बढ़ा रहे हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई का असर मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ने से उम्मीद के मुताबिक पूंजी बाजार में निवेश नहीं आया है।
छोटे शहरों में निवेश के तरीकों में आए बदलाव पर रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट के प्रसिडेंट और सीईओ संदीप सिक्का ने अमर उजाला को बताया कि पिछले दस साल में सेबी द्वारा नियमों में बदलाव करने से निवेशकों के निवेश के फैसले लेने की आदतों में बदलाव हो रहा है। अब ग्रोथ छोटे शहरों और कस्बों से आएगी जिसके लिए उद्योग जगत को अपनी रणनीति बदलनी होगी। म्यूचुअल फंड उद्योग का 80 फीसदी कारोबार अभी 15 बड़े शहरों तक सीमित हैं।

लखनऊ वासियों ने बीते वित्त वर्ष में परंपरागत सावधि जमाओं (फिक्सड डिपॉजिट) में जहां 500 सौ करोड़ का ही निवेश किया, वहीं रीयल इस्टेट सेक्टर में निवेश का यह आंकड़ा 2,000 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। नौकरी पेशा वर्ग की बढ़ती तादाद का असर कर बचत योजनाओं में लोगों की बढ़ती रुचि के रूप में भी सामने आ रहा है। शहर के लोगों ने पोस्ट ऑफिस इन्वेस्टमेंट प्लान, कर बचत बीमा योजनाओं और फिक्स मेच्योरिटी इन्वेस्टमेंट सहित बचत क्षेत्र की योजनाओं में बीते वित्त वर्ष में करीब 5,450 करोड़ के निवेश किया है।

वित्तीय बाजार में काम करने वाले पेशेवरों के अनुसार शहर का तीस फीसदी वर्ग ऐसा है जो कि पूंजी बाजार में निवेश करने और रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश का जोखिम उठाने को तैयार है। हालांकि इसमें अधिकतर निवेशक कम समय में ज्यादा रिटर्न लेने की रणनीति से निवेश कर रहे हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट मधु गर्ग के अनुसार  युवा नौकरी पेशा वर्ग सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को पूंजी बाजार में निवेश का एक बेहतर विकल्प मान रहा है।

इस तरह के प्लान में न्यूनतम पांच साल के निवेश पर भी अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना रहती है। बचत की यह राशि आवर्ती जमा (रेकरिंग डिपॉजिट) की तर्ज पर या बैंक खाते से हर महीने की तय किश्त कटा कर जमा कराई जा सकती है। इसमें निवेशक को न्यूनतम प्रतिशत बारह फीसदी रिटर्न मिलता है, जो फिक्स डिपॉजिट व पीपीएफ से बेहतर है। निवेश संबंधी मामलों के विशेषज्ञ प्रशांत डालमिया सीए ने बताया कि वर्तमान में 40 हजार से अधिक मासिक आय वाला नौकरी पेशा और व्यापार से जुड़ा तबका रीयल इस्टेट को में निवेश को खासी तवज्जो दे रहा है।

बीते मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में निवेश का आंकड़ा 2,000 हजार करोड़ के पार तक निकल गया। जमीनों की कीमतों में आए दिन होने वाली बढ़ोतरी ने रीयल एस्टेट क्षेत्र में रिटर्न को दो से पांच गुना तक कर दिया है। रीयल एस्टेट सेक्टर में बढ़ते निवेश के साथ ही हाल ही के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी ने राजधानी के लोगों को बुलियन मार्केट की तरफ भी आकर्षित किया है।

इन्वेटमेंट प्लानर इशू तायल के अनुसार सोने चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों ने अब वायदा कारोबार में लोगों की रुचि बढ़ा दी है। पुराने लखनऊ के सोना-चांदी व्यवसायी हो अथवा मझोले कारोबार से जुड़ा व्यापारी सभी का रुझान बीते एक साल में सोना चांदी के वायदा कारोबार की तरफ तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा मेंथा, एल्युमीनियम और जिंक की कीमतों के इजाफे से प्रड्यूस एक्सचेंज (कमोडिटी एक्सचेंज) इन्वेस्टमेंट पर भी निवेशकों को भरोसा बढ़ा है।

हालांकि उम्र दराज लोग, सेवानिवृत्त लोग और वरिष्ठ नागरिक परंपरागत तरीकों पर ही खास तौर पर भरोसा करते है। निवेश क्षेत्र से जुड़े जनार्दन अग्रवाल के अनुसार ऐसे निवेशक सरकारी व निजी कंपनियों के स्तर पर संचालित पब्लिक प्रोविडेंट फंड, डाक विभाग मासिक बचत योजना और विभिन्न इंश्योरेंस प्लान में ही डिपॉजिट करना ज्यादा बेहतर व भरोसेमंद समझते हैं।

प्रचलित निवेश प्लान और वार्षिक निवेश (अनुमानित)
1. रीयल एस्टेट इन्वेस्टमेंट- 2,000 करोड़ रुपये
2. प्रड्यूस अथवा कमोडिटी एक्सचेंज में इन्वेस्टमेंट- 300 करोड़ रुपये
3. फिक्स बैक डिपाजिट- 500 करोड़ रुपये
4. पोस्ट आफिस इन्वेस्टमेंट प्लान- 250 करोड़ रुपये
5. टैक्स सेविंग एलआईसी इन्वेस्टमेंट प्लान- 800 करोड़ रुपये
6. फिक्स मेच्योरिटी प्लान- 100 करोड़ रुपये
7. गोल्ड बॉड व स्टाक एक्सचेंज प्लान- 1000 हजार करोड़ रुपये  

(नोट- निवेश प्लान में अनुमानित निवेश राशि का आंकड़ा सालाना इन्वेस्टमेंट के अनुमान पर आधारित है।)
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