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जल्द शुरू हो सकती है गोल्ड बॉन्ड योजना

अजीत सिंह/नई दिल्ली

Updated Sat, 24 Nov 2012 11:13 PM IST
gold bond scheme is likely to start soon
सोने के बढ़ते आयात से चिंतित सरकार ने अब इसी के जरिए सरकारी खजाने में दम फूंकने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। एक ओर जहां कॉरपोरेट द्वारा सोने की जमा पर पाबंदियां लगाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर घरों में रखे करीब 20 हजार टन सोने की मदद से सरकार इसके आयात में कमी लाना चाहती है। सोने से जुड़ी नीति तय करने के लिए बनी रिजर्व बैंक की समिति की सोमवार को अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
भले ही सरकार सोने को एक निष्क्रिय निवेश के तौर पर देखे लेकिन सोने के भाव और लोकप्रियता दोनों बढ़ती जा रही हैं। अनुमानों के मुताबिक, भारतीयों के पास करीब 20 हजार टन सोना जमा है और पिछले साल 900 टन से ज्यादा सोने का आयात हुआ है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की मजबूती पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।

आयात-निर्यात असंतुलन बढ़ने से राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए सरकार गोल्ड बॉन्ड के जरिए इस समस्या से निपटना चाहती है। आरबीआई सूत्रों का कहना है कि एक विशेषज्ञ समिति ने सोने की अर्थव्यवस्था के गहन विश्लेषण के बाद कुछ सुझाव दिए हैं, जिनसे न सिर्फ सोने का आयात कम हो सकता है बल्कि सोने के जरिए हुई आम आदमी की बचत का फायदा सरकारी खजाने को मिल सकता है।

बुलियन मार्केट के जानकार श्रीनिवास वरदराजन का कहना है कि अगर लोगों के पास जमा कुल सोने का 10 फीसदी भी बाजार में आ जाता है तो इससे अर्थव्यवस्था को करीब 5.87 लाख करोड़ रुपये की मदद मिलेगी जो सरकार के सालाना कर्ज से ज्यादा है। इस सोने के सक्रिय इस्तेमाल का सबसे अच्छा तरीका गोल्ड बॉन्ड ही हैं। अगर सरकार लोगों को उनकी निष्क्रिय बचत (सोने) पर 5 फीसदी टैक्स फ्री ब्याज दे तो यह लोगों के लिए फायदे का सौदा होगा और इस तरह सरकार जितना सोना इकट्ठा करेगी उतनी ही विदेशी मुद्रा बचेगी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में सोने का आयात 9 फीसदी दर से बढ़ रहा है। वर्ष 2011-12 में कुल 60 अरब डॉलर के सोने का आयात हुआ था। सोने के बढ़ते आयात से चिंतित रिजर्व बैंक ने बैंकों सख्त हिदायत दी है कि वे सोना खरीदने के लिए कर्ज को बढ़ावा न दें। उधर, ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी एसोसिएशन ने भी सरकार से मांग की है कि वे ईटीएफ के पास जमा रखने वाले सोने को बाजार में लाने के रास्ते तलाशे।
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