आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

आर्थिक सुधारों से सुधरेगी बीमा उद्योग की सेहत

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Wed, 26 Sep 2012 02:01 AM IST
 economic reforms improve health of insurance industry
देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान और संस्थागत निवेश पोर्टफोलियो वाली जीवन बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) के चेयरमैन डीके मेहरोत्रा का कहना है कि अर्थव्यवस्था के सुधरते हालात बीमा उद्योग की सेहत को भी दुरुस्त करेंगे। साथ ही स्टॉक मार्केट में हालात बेहतर होने से यूनिट लिंक्ड स्कीम (यूलिप) उत्पादों में निवेश तेज होगा।
हालांकि, उनका मानना है कि यूलिप उत्पादों की बीमा उत्पादों में हिस्सेदारी एक सीमा तक ही ठीक है और पहले की तरह 85 फीसदी प्रीमियम तक इनके पहुंचने की कोई जरूरत नहीं है। मेहरोत्रा कहते हैं कि एलआईसी में देश के लोगों का विश्वास इतना ज्यादा है कि निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र को खुले एक दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी 70 फीसदी बनी हुई है। अमर उजाला के सीनियर एडीटर हरवीर सिंह के साथ एक लंबी बातचीत में एलआईसी चेयरमैन डीके मेहरोत्रा ने यह बातें कहीं। पेश है एलआईसी चेयरमैन के साथ बातचीत के मुख्य अंश-
 
:- इस समय जीवन बीमा उद्योग का विकास धीमा है, इसके पीछे क्या कारण हैं और इसमें कब तक सुधार की संभावना है?

:- यूलिप के चलते उद्योग पर असर पड़ा था और बीमा उद्योग की गति कम हो गई थी। उसके बाद यूलिप को लेकर जो नए रेगुलेशन आए, उनका इंडस्ट्री पर असर हुआ। 2010 से गति में जो कमी आई है उसके बाद से इंडस्ट्री उबर नहीं पाई है। हमने अलग रणनीति अपनाई है और हम यूलिप की बजाय परंपरागत उत्पादों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। हमें यूलिप के पीछे ज्यादा नहीं जाना है, क्योंकि यह पूरी तरह से बीमा उत्पाद नहीं है। यूलिप की बजाय हम इन उत्पादों को बेच रहे हैं और हमें बहुत अच्छा रेस्पांस मिल रहा है। लेकिन, आने वाले समय में आर्थिक स्थिति सुधरती है और बाजार सुधरता है तो लोगों का निवेश में भरोसा लौटेगा। इससे इंडस्ट्री ठीक हो जाएगी। अभी लोग वेट एंड वाच की पॉलिसी अपनाए हुए हैं। बाजार में कोई यूलिप प्रोडक्ट चल नहीं रहा और परंपरागत उत्पादों में एलआईसी नंबर वन है।

:- जीवन बीमा में एलआईसी की ऊंची हिस्सेदारी निजीकरण के बावजूद बरकरार है?

:- उदारीकरण के बाद एलआईसी का शेयर कुछ घटा था, लेकिन पिछले तीन साल में हमने इसे रीगेन किया है। बाजार में हमारी हिस्सेदारी पॉलिसी के मामले में 80 फीसदी और प्रीमियम में 78 फीसदी है। लोगों को एलआईसी में विश्वास है और यही एलआईसी की पूंजी है।

:- क्या एलआईसी को सरकार की गारंटी होने का फायदा मिल रहा है?

:- नही, हम ऐसा नहीं मानते हैं। सरकार की गारंटी हमें मनोवैज्ञानिक मजबूती देती है। यह हमें हमारे कानून के तहत मिली है लेकिन हमने कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं किया। असल में हमने अपने ग्राहकों के साथ अभी तक जो भी वादा किया, उसे पूरा किया है। पिछले 56 साल में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ है कि हमने ग्राहकों से किये वादे को पूरा नहीं किया हो। हमारी पकड़ एकदम ग्रासरूट स्तर पर है। हमारा ग्राहकों के साथ कनेक्ट बहुत मजबूत है। वह एलआईसी को अपनी कंपनी मानता है। उनके पास जाकर हमने यह भावना जगाई है। यह हमने अपने एजेंट, कर्मचारियों और दूसरे उपायों से बनाए रखा है। उससे हमारा बहुत विकास हो रहा है।

:- नए उत्पाद और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल पर क्या कर रहे हैं?

:- हर साल हम तीन-चार नए उत्पाद लाते हैं। इस साल भी लाएंगे। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने नए उत्पादों पर ड्राफ्ट गाइडलाइन दी है। जबतक अंतिम गाइडलाइन नहीं आ जाती, तो हम नए उत्पाद नहीं ला सकेंगे। हमने कुछ उत्पादों के लिए इरडा के पास आवेदन कर रखा है। हमारी गुजारिश है कि गाइडलाइन जल्दी आ जाए और हमने जो आवेदन किया है, उनको मंजूरी मिल जाए।

:- यह कनवेंशनल प्रोडक्ट हैं या यूलिप?

:- यह कनवेंशनल प्रोडक्ट हैं, लेकिन जब गाइडलाइन आ जाएंगी तो आने वाले समय में हम यूलिप उत्पादों के लिए भी आवेदन करेंगे। अगर, हमारे ग्राहकों में यूलिप की चाह है तो हम उसे लाएंगे। हम कोई भी ऐसा क्षेत्र नही छोड़ेंगे, जहां हमारी पहुंच न हो। डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में एक चुनौती आ गई है, जिसे पूरी इंडस्ट्री फेस कर रही है। एक तो एजेंट की परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम सीआईआई आधारित हो गया है और एजेंट की परीक्षा ऑनलाइन हो गई है। हमारा छोटे शहरों और गांवों में जो एजेंट है वह ऑनलाइन टेस्ट देने में सक्षम नहीं है। हमारे बिजनेस का 30 फीसदी ग्रामीण बाजार से आता है। हमने गुजारिश की है कि ऐसे स्थानों पर ऑफलाइन टेस्ट की इजाजत दे दी जाए। हम इसे एजेंट के रूप में नहीं देखते हैं, इसे रोजगार के रूप में देखते हैं। दो-ढाई साल से यह दिक्कत आ रही है। पहले इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसको मैनेज करता था। एजेंट जिस रफ्तार से पहले बनते थे वह नहीं बन पा रहे हैं। यह रोजगार का मामला है। मैने वित्त मंत्री से यही कहा था कि हम रोजगार के नए अवसर नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए, ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन परीक्षा की इजाजत दी जाए।

:- प्राइवेट सेक्टर से चैलेंज है डिस्ट्रीब्यूशन में? कुछ कंपनियां फिक्स सैलरी पर लोगों को रख रही हैं?

:- हमें प्राइवेट क्षेत्र से कोई चैलेंज नहीं है। हम डिस्ट्रीब्यूशन के वैकल्पिक चैनल बढ़ा रहे हैं। बैंक एश्योरेंस का उपयोग कर रहे हैं, कारपोरेट एजेंट हैं। बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट का उपयोग कर रहे हैं। खासतौर से माइक्रो इंश्योरेंस के लिए। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी पहुंच ज्यादा है। जहां तक फिक्स सैलरी की बात है तो यह बहुत कारगर नहीं है। चार हजार रुपये की सैलरी से काम नहीं चलेगा, उसकी आमदनी तो इंसेंटिव से ही आनी है। बीपीएल के लिए बिकने वाली माइक्रो इंश्योरेंस के लिए बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट कारगर साबित हो रहे हैं। यह हमारा फोकस है। पहले एनजीओ के माध्यम से यह उत्पाद बेच रहे थे। हमने ‘जीवनदीप’ के नाम से माइक्रो इंश्योरेंस पॉलिसी लांच की है और सिंगल प्रीमियम का प्रावधान किया है, जिस पर कुछ रिटर्न का प्रावधान भी है। थोड़े प्रीमियम में 30,000 से 50,000 रुपये का बीमा हो जाता है। किसानों को भी इंश्योरेंस चाहिए। उसके लिए हम बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट और ग्रामीण शाखाओं की मदद ले रहे हैं।

:- एलआईसी का निवेश पैटर्र्न कैसे तय होता है?

:- हमने पिछले साल करीब दो लाख करोड़ रुपये निवेश किया है। हमारा निवेश इंश्योरेंस एक्ट से गवर्न होता है। कैपिटल मार्केट के लिए हमारा थम्ब रूल है कि हम 10 से 15 फीसदी पूंजी बाजार में डालते हैं। यूलिप को छोड़कर, क्योंकि यूलिप में तो ग्राहक ही हमें बताता है। हमारे उत्पादों का 15 फीसदी यूलिप है और 85 फीसदी परंपरागत है। एक समय में यूलिप 85 फीसदी तक हो गया था। सरकार ने जो कदम उठाए हैं, मानसून सुधरा है उससे सुधार आएगा। एक बार जैसे ही हमारे निवेश करने वाले ग्राहकों का विश्वास बन जाएगा तो अर्र्थव्यवस्था को बूस्ट मिल जाएगा।

:- एलआईसी सबसे बड़ा वित्तीय संस्थान है, जो शेयर बाजार को दिशा देता है?

:- हम लोग लांग टर्म इनवेस्टर हैं, कुछ दिनों के लिए निवेश नहीं करते हैं। हमारी इनहाउस रिसर्च टीम है जो बाजार को स्कैन करती रहती है। हम तीन चीजों को देखते हैं। कंपनी का पास्ट परफार्मेंस, उसकी कॉरपोरेट गवर्नेंस और उसका आने वाले समय में वैल्यू क्या मिलेगा।

:- इरडा का कहना है कि कोई भी बीमा कंपनी किसी एक कंपनी में 10 फीसदी इक्विटी से ज्यादा निवेश नहीं कर सकती है। लेकिन, एलआईसी का निवेश कई कंपनियों में इससे ज्यादा है?

:- इस पर काफी समय से बात चल रही है। हम 56 साल से यह काम कर रहे हैं। इरडा के आने के पहले ही कुछ कंपनियों में हमारा निवेश इस सीमा से ज्यादा है। इनमें कई अच्छी कंपनियां हैं। यह हमारे लिए ऑपर्चुनिटी लास है क्योंकि हम अगर इन कंपनियों में बने रहते हैं तो इसका हमें फायदा होगा जो हमारे ग्राहकों के लिए बेहतर है। हमने वित्त मंत्रालय और रेगुलेटर से गुजारिश की है कि हमें कुछ हेडरूम दिया जाए और इस सीमा में ढील दी जाए। इरडा इस पर विचार कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही इस बारे में कुछ फैसला हो जाएगा।

:- क्या सरकार विनिवेश लक्ष्य के लिए एलआईसी पर दबाव बनाती है जैसा कि ओएनजीसी के मामले में आरोप लगा?

:- ऐसा नहीं है, हमारे ऊपर कोई दबाव नहीं है। आज भी मैं कहूंगा कि ओएनजीसी में निवेश का हमारा फैसला सही था और आने वाले समय में मैं लोगों को बताऊंगा कि इससे हमें कितना फायदा हुआ है।

:- यूलिप के बारे में आपकी क्या राय है। इसका भविष्य क्या है?

:- यूलिप एक अच्छा उत्पाद है, बाजार में थोड़ी स्थिरता आ जाए। इससे मार्र्केट बढ़ेगा। मेरा मानना है कि यूलिप और परंपरागत उत्पादों के बीच 35 और 65 फीसदी का अनुपात होना चाहिए।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

मालदीव में छुट्टियां मना रही हैं निया शर्मा, हॉट तस्वीरें हुई वायरल

  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

'हिन्दी मीडियम' में प्रिंसिपल की भूमिका में नजर आएंगी अमृता सिंह

  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

हल्दी का ये नुस्खा छूमंतर करेगा पैरों की सूजन, आजमा कर देखें

  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

VIDEO : 'टाइगर जिंदा है' का एक्शन सीन आया सामने

  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

क्या सोनाक्षी के आगे नाचने को राजी होंगे युवराज-हेजल?

  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

Most Read

अब सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा ट्रांसपोर्ट अलाउंस

government employees not to get hike in transport allowances, hra to remain at 30 percent
  • बुधवार, 1 मार्च 2017
  • +

ईपीएफ पर मिलेगा 8.65 फीसदी ब्याज, बनी सहमति

Labour Ministry AND Finance Ministry agree on 8.65% EPF interest SAYS Dattatreya
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

अब 15 दिन में मिल जाएगा जीपीएफ से पैसा

now in 15 days, get gpf payement as government bends rules
  • बुधवार, 8 मार्च 2017
  • +

इन 7 तरीकों से आसान हो जाएगा पैसा जमा करना

7 ways by which cash deposit at banks will be hassle free
  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

ईपीएफ पर मिलेगा 8.65 फीसदी ब्याज, बनी सहमति

Labour Ministry AND Finance Ministry agree on 8.65% EPF interest SAYS Dattatreya
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

बजट में हो सकता है ऐलान, दो लाख तक पीएफ निकासी पर नहीं लगेगा टैक्स

Budget 2017: Govt may enhance PF withdrawal limit to 2 lac
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top