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प्लानिंग से बुढ़ापा बनाएं शानदार

मणिकरण सिंघल

Updated Mon, 24 Dec 2012 12:54 PM IST
create old age good by planning
रिटायरमेंट के बाद जीवन आम दिनों की तरह ही चलता रहे, जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए मुट्ठी भरी रहे और आवश्यकता पड़ने पर परिवार के सदस्यों की सहायता के लिए आप तत्पर और तैयार रहें। यह सिर्फ सोचने से संभव नहीं है बल्कि इसके लिए आपको अपनी नौकरी या रोजगार के शुरुआती दिनों से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
इस तैयारी को ही सामान्य शब्दों में रिटायरमेंट प्लानिंग कहते हैं। अकसर देखा गया है कि लोग रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर अधिक सजग नहीं रहते और इसकी अनदेखी करते हैं। भविष्य के संदर्भ में लोगों का पूरा जोर बच्चों की शिक्षा, उनकी शादी, मकान बनवाने और कुछेक शानदार छुट्टियां बिताने आदि पर ही रहता है। जबकि, रिटायरमेंट के बाद अपनी जरूरतों और खर्चों को सामान्य रूप से पूरा करने को लेकर भी पहले से ही योजना बनानी चाहिए। यह संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है। लोग रिटायरमेंट प्लानिंग को जरूरी तो मानते हैं लेकिन इसमें अकसर लापरवाही करते हैं।

जब भी हम रिटायरमेंट की बात करते हैं, तो हम उन दिनों के बारे में सोचते हैं जब हमें नियमित रूप से वेतन या आमदनी की प्राप्ति नहीं होगी। हमें केवल अपने स्रोतों से ही आय करनी होती है। जो व्यक्ति पूरा जीवन अपने बलबूते पर जिया हो, रिटायरमेंट के बाद वह बच्चों पर निर्भर हो जाना पसंद नहीं करेगा। अपनी मौजूदा जीवनशैली और स्वास्थ्य जरूरतों को रिटायरमेंट के बाद भी सामान्य रूप से बनाए रखने की तैयारी पहले से कर लेना ही रिटायरमेंट प्लानिंग है। इसलिए, रिटायरमेंट प्लानिंग अनिवार्य है और इसे शुरुआती दिनों में ही कर लेनी चाहिए। सीधे शब्दों में कहें तो रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी जल्द, उतनी ही बेहतर।

कैसे करें प्लानिंग
अधिकांश लोग रिटायरमेंट प्लानिंग और पेंशन प्लानिंग को लेकर भ्रम की स्थिति में रहते हैं। उनका मानना होता है कि पेंशन प्लान खरीद लेना भर ही रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पर्याप्त है और यही रिटायरमेंट प्लानिंग है। लेकिन लोगों का यह आकलन उचित नहीं है। पेंशन को लेकर ही केवल तैयारी कर लेना रिटायरमेंट प्लानिंग नहीं है बल्कि यह उसका एक हिस्सा भर है। रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे पहले आपको अपनी जरूरतों को समझ लेना चाहिए।

यानी, रिटायरमेंट के बाद आप पर कौन-कौन सी और किस तरह की जिम्मेदारियां रहेंगी, जिनका आपको निर्वहन करना पड़ेगा। दूसरा, रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए निवेश की शुरुआत करने के साथ ही जोखिम प्रबंधन को लेकर भी तैयारी कर लेनी चाहिए। जैसेकि, यदि आपने ठीक-ठीक बीमा नहीं कराया है तो आपकी पूरी की पूरी बचत एक हादसे में समाप्त हो सकती है।

रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत मौजूदा खर्चों को समझकर करनी चाहिए। आपके पास इसका सीधा हिसाब होना चाहिए कि आप मासिक खर्चों मसलन राशन, फल, दूध, बेकरी आदि पर कितना खर्च करते हैं, मनोरंजन पर आपका व्यय कितना है, आपके व्यक्तिगत और सालाना छुट्टियों पर होने वाले खर्चें कितने तक चले जाते हैं। इससे आपको इसका अंदाजा हो जाएगा आपका बुनियादी, जरूरी और गैर जरूरी खर्च कितना है।

रिटायरमेंट प्लानिंग में इन कुल वाजिब खर्चों पर 10 फीसदी की सामान्य बढ़ोतरी निर्धारित कर लेनी चाहिए। रिटायरमेंट की बची अवधि में महंगाई दर से हिसाब से अपने बढ़े खर्चों का आकलन कर लेना चाहिए। निवेश के शुद्ध उत्पादों जैसेकि पीपीएफ, एफडी, म्यूचुअल फंड आदि में निवेश का पोर्टफोलियो तैयार कर इसकी शुरुआत कर देनी चाहिए। इसमें बीमा कवरेज को शामिल नहीं करें बल्कि उसे अलग से पर्याप्त सम एश्योर्ड राशि के साथ खरीद लें। सामान्यत: इस तरह रिटायरमेंट प्लानिंग कर आप अपने बुढ़ापे को सुखमय बनाने की दिशा कदम बढ़ा सकते हैं।

रिटायरमेंट प्लानिंग का हिसाब-किताब

उम्र ----- मासिक खर्च ----- महंगाई दर----- रिटायरमेंट के समय ----- रिटायरमेंट फंड ----- मासिक निवेश
          वर्तमान       औसत आकड़ा   संभावित मासिक खर्च        संभावित           अपेक्षित
30 ------ 35,000 -------- 7% सालाना -------- 2,66,430 ----------- 5.79 करोड़ ---------- 25,613
40 ------ 35,000 -------- 7% सालाना -------- 1,35,440 ----------- 2.94 करोड़ ---------- 38,716
50 ------ 35,000 -------- 7% सालाना ---------- 68,850 ----------- 1.49 करोड़ ---------- 72,738
(नोट: गणना मासिक निवेश की राशि पर 10 फीसदी सालाना की दर से रिटर्न के आधार पर की गई है और रिटायरमेंट के बाद फंड को ऐसे सुरक्षित निवेश में रखा गया है, जिसमें 8 फीसदी सालाना का सुनिश्चित रिटर्न मिले। गणना संकेतक मात्र है।)

एमआईएस से होगी नियमित आय
रिटायरमेंट के बाद आपकी रोजमर्रा की जरूरतें या खर्चे रिटायर नहीं होते हैं। कहने का मतलब है कि रिटायर होने के बाद नियमित खर्चों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी है कि मासिक आमदनी भी होती रहे। डाकघर की मासिक आय खाता योजना (एमआईएस) एक ऐसा विकल्प है, जिसके जरिए आप अपने रिटायरमेंट पर मिले पैसों में से कुछ एकमुश्त निवेश कर मासिक आधार पर उसका ब्याज कमा सकते हैं। रिटायर कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एमआईएस एक बेहतर स्कीम है।

एमआईएस खाते की परिपक्वता पांच साल की होती है। हर पांच साल बाद इसे आप नए सिरे से शुरू कर सकते हैं। इसमें खाताधारक को एकमुश्त जमा पर हर माह ब्याज मिलता है। लेकिन, परिपक्वता पर किसी तरह का बोनस नहीं दिया जाता है। अभी एमआईएस पर 8.50 फीसदी ब्याज मिल रहा है। एमआईएस पर मिलने वाला ब्याज खुद ब खुद बचत खाते में जमा हो जाता है। इस बचत खाते को सिंगल या ज्वाइंट अकाउंट दोनों तरह से किसी भी डाकघर में खोला जा सकता है। सिंगल अकाउंट के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम 4.5 लाख रुपये है। जबकि, ज्वाइंट अकाउंट में निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम सीमा 9 लाख रुपये है।

खरीदें जमीन का एक छोटा टुकड़ा
जमीन का एक छोटा टुकड़ा लंबी अवधि में कमाल कर सकता है। युवावस्था में जब भी हाथ में पैसे हों कोशिश करें कि जमीन का एक छोटा टुकड़ा खरीद कर छोड़ दें। जमीन खरीदने में कुछ खास सावधानी की जरूरत होगी, जैसे कि जमीन वैसी खरीदें जिसमें कोई कानूनी अड़चन न हो। रिहायशी जमीन की कीमत में तेज बढ़ोतरी होती है। जमीन का टुकड़ा शहर के बीच न होकर शहर के बाहर ऐसी जगह हो जहां शहर का विकास संभावित है, तो भविष्य में वहां जमीन की कीमत बहुत ही तेज बढ़ेगी। रिटायरमेंट के समय इस जमीन को बेचकर रकम बैंक में जमा कर दी जाए तो बहुत संभव है कि अकेले ही यह पेंशन का कम कर जाए।

इक्विटी को न भूलें
अकसर जब भी रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो लोग ईपीएफ, पीपीएफ, एफडी और एनएससी जैसे विकल्पों को ही तरजीह देते हैं। इनमें से भी लोगों को सबसे अधिक भरोसा ईपीएफ और एफडी पर ही देखा गया है। हालांकि, बदलते परिवेश के साथ रिटायरमेंट प्लानिंग के परंपरागत तरीकों में थोड़ा बदलाव लाना चाहिए।

रिटायरमेंट प्लानिंग एक लंबी अवधि की योजना है। इस लिहाज से देखें तो लंबी अवधि के लिए इक्विटी यानी शेयरों में निवेश करना भी रिटायरमेंट प्लानिंग के मद्देनजर एक अहम कदम साबित हो सकता है। शार्ट टर्म में इक्विटी भले ही सर्वाधिक जोखिम का निवेश विकल्प नजर आता है लेकिन लंबी अवधि में अभी भी रिटर्न देने के मामले इक्विटी बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहा है। मान लीजिए, अभी यदि आपकी उम्र 30 साल के आसपास है, तो आपकी सेवानिवृत्ति में कम से कम 28 से 30 साल का समय बाकी है। यानी, यदि इस समय आप लंबी अवधि का लक्ष्य रखकर शेयरों में निवेश करते हैं तो रिटायरमेंट के समय या बाद में यह आपको अच्छा खासा एकमुश्त रिटर्न दे सकता है।

आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में एक सबसे अहम बात है महंगाई दर। आज के 10, 20 या 30 साल बाद महंगाई दर क्या होगी और उस लिहाज से आपके परंपरागत निवेश योजनाओं से मिलने वाला रिटर्न कितना मिलेगा। इस तरह देखा जाए तो रिटायरमेंट प्लानिंग में भले ही सुरक्षित निवेश विकल्प को शामिल करना बेहतर रहता है, लेकिन रिटर्न के मामले में इनसे कुछ बेहतर उम्मीद नहीं की जा सकती है। इसलिए, लंबी अवधि में इक्विटी में थोड़ा-बहुत जोखिम उठाकर निवेश करना बुरा नहीं माना जा सकता है।

पिछले करीब पांच साल के इक्विटी बाजार में बुरे दौर को भी देखें तो पाएंगे कि इस अवधि में तमाम उठापटक के बावजूद बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स ने सालाना रिटर्न औसतन करीब 20 फीसदी दिया है। इससे साफ पता चलता है कि लंबी अवधि के निवेश में हमेशा इक्विटी मार्केट अन्य निवेशों की तुलना में अच्छा रिटर्न देता है। इसलिए, रिटायरमेंट प्लानिंग में यदि धैर्यपूर्वक व समझदारी के साथ लंबी अवधि का नजरिया लेकर चला जाए तो यह अच्छा ही साबित होगा।

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