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अंतिम विकल्प के रूप में ही चुनें पर्सनल लोन का रास्ता

नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव

Updated Mon, 24 Sep 2012 01:24 PM IST
Choose a personal loan as the last option
यदि आप पर्सनल लोन लेने के लिए सोच रहे हैं, तो इसे हमेशा अंतिम विकल्प के रूप में ही चुने। ऐसा इसलिए है कि एक तो इस कर्ज पर आपको सामान्य कर्ज की तुलना में 5-7 फीसदी अधिक ब्याज चुकाना पड़ता है, वहीं पर्सनल लोन देने में भी बैंक खासतौर से सार्वजनिक बैंक काफी सतर्कता भरा रवैया अपनाते हैं। इन परिस्थितियों में पर्सनल लोन अंतिम विकल्प ही होना चाहिए। इसका अलावा, कर्ज की अवधि भी कम से कम रखने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे कि आपको अधिक ब्याज की राशि न चुकानी पड़े।
बैंकर आजाद सिंह के अनुसार, ‘पर्सनल लोन पर किसी तरह की गारंटी नहीं ली जाती है। ऐसे में इस कर्ज पर जोखिम ज्यादा होता है, साथ ही लागत भी ज्यादा होती है। इसे देखते हुए बैंक ऊंची ब्याज दर रखते हैं। सिंह के अनुसार, बैंक आजकल पर्सनल लोन देने में काफी सतर्क हो गए हैं। ज्यादातर कर्ज बैंक किसी संस्थान के साथ समझौता होने पर ही उसके कर्मचारी को देते हैं। गैर वेतनभोगी व्यक्ति या किसी संस्थान के साथ समझौता न होने पर कर्मचारियों के लिए कर्ज पाना मुश्किल होता है।

उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों में पर्सनल लोन का विकल्प ग्राहक को अंतिम विकल्प के रूप में ही रखना चाहिए।’ सामान्य तौर पर बैंक अधिकतम तीन साल के लिए ही पर्सनल लोन देते हैं। इसके अलावा, बैंक कर्ज देते वक्त आपकी आय और कर्ज चुकाने की क्षमता का खासतौर से आकलन करते हैं। पर्सनल लोन पर ग्राहकों को दूसरे कर्ज की तरह प्रोसेसिंग शुल्क भी चुकाना पड़ता है।

किन जरूरतों के लिए पर्सनल लोन
देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) इस समय यात्रा, इलाज, शादी या अन्य किसी वित्तीय जरूरत के लिए पर्सनल लोन दे रहा है। बैंक मेट्रो और दूसरे शहरों में न्यूनतम 24,000 रुपये और ग्रामीण- अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 10,000 रुपये कर्ज देता है। अधिकतम राशि के तौर पर बैंक पर्सनल लोन के रूप में 10 लाख रुपये या फिर वेतनभोगी की शुद्ध मासिक आय का 12 गुना तक कर्ज देता है। बैंक पर्सनल लोन अधिकतम 48 महीने के लिए 2-3 फीसदी की प्रोसेसिंग शुल्क के साथ देता है। बैंक इसके अलावा समय से पहले कर्ज चुकाने पर किसी तरह की कोई प्री-पेमेंट पेनॉल्टी ग्राहक से नहीं लेता है। हालांकि ग्राहक यदि छह महीने के अंदर पर्सनल लोन चुकाता है, तो उस पर बैंक एक फीसदी प्री-पेमेंट पेनॉल्टी लेता है।

बेस रेट से 8.5 फीसदी अधिक ब्याज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इस समय पर्सनल लोन स्कीम (एसबीआई सरल) पर ग्राहकों से मौजूदा बेस रेट पर 8.50 फीसदी अतिरिक्त ब्याज लेता है। यह ब्याज दर फ्लोटिंग रेट के आधार पर है। बैंक का बेस रेट इस समय 9.75 फीसदी है, ऐसे में पर्सनल लोन का मौजूदा रेट 18.25 फीसदी होगा। देश के दूसरे बैंक भी इसी ब्याज दर के करीब ग्राहकों से पर्सनल लोन पर प्रमुख रूप से कर्ज देते हैं। यानी, यदि आपने एक लाख रुपये का पर्सनल लोन चार साल की अवधि के लिए लिया है, तो उस पर आपको 41,648 रुपये ब्याज की राशि के रूप में चुकानी होगी। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि यदि आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं, तो सभी परिस्थितियों का आकलन कर ही इसे अंतिम विकल्प के रूप में चुनें।

कम अवधि का कर्ज है पर्सनल लोन
पर्सनल लोन बैंकों की ओर से कम अवधि (शार्ट टर्म) के लिए दिया जाने वाला कर्ज है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह व्यक्ति की आर्थिक आवश्यकता को बहुत कम समय में नकद के रूप में पूरा करता है। यानी, पर्सनल लोन एक तरह का कर्ज है जिसे व्यक्तिगत जरूरतें, पारिवारिक जरूरतें (यात्रा, शादी, हनीमून, मेडिकल खर्चों आदि) या अन्य दूसरी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया जा सकता है। पर्सनल लोन ना तो बिजनेस लोन है ना ही लंबी अवधि के लिए रेहन के बदले मिलने वाला कर्ज। कर्जदार को इस लोन का पुनर्भुगतान एक निश्चित अवधि में करना होता है। सामान्यत: पर्सनल लोन दो तरह के होते हैं -

सिक्योर्ड लोन : इस तरह का पर्सनल लोन बैंक आमतौर पर ग्राहक की कार, घर या दूसरी चल संपत्तियों के बदले देते हैं। यानी, इसमें बैंक कर्ज की राशि को ग्राहक की किसी संपत्ति के मूल्य के बदले सुरक्षित कर लेते हैं। आमतौर पर सिक्योर्ड पर्सनल लोन पर मासिक किस्त कम रखी है। सिक्योर्ड लोन लेने से पहले ग्राहकों को इसकी ब्याज दरें और री-पेमेंट की अवधि के बारे में बैंक से पहले से ही बातचीत कर लेनी चाहिए।  

अनसिक्योर्ड लोन :
अनसिक्योर्ड लोन में बैंक ग्राहक से किसी तरह की सुरक्षा नहीं लेता है। लेकिन, इस लोन पर बैंक ग्राहक से ऊंची ब्याज दरें वसूलता है, क्योंकि इसमें बैंक का सबसे अधिक जोखिम जुड़ा होता है।

बेहतर पर्सनल लोन के लिए थोड़ी मशक्कत
अपनी आपात या अन्य आवश्यक आवश्यकता को पूरा करने के लिए यदि आप पर्सनल लोन लेने जा रहे हैं तो थोड़ी बहुत मशक्कत आपको अपने स्तर पर भी करनी चाहिए, जिससे कि आप किफायती और बेहतर लोन विकल्प चुन सकें। अलग-अलग बैंक पर्सनल लोन पर कई तरह के शुल्क वसूलते हैं। इसके चलते आपके लोन की कुल लागत बढ़ जाती है। इसलिए सिर्फ सस्ती ब्याज दर के आधार पर लोन की लागत का फैसला ना करें। यानी, अलग-अलग बैंकों की कुल लागत देखने के बाद ही पर्सनल लोन के लिए अपने लेंडर का चयन करें।

पर्सनल लोन पर ब्याज दरें विभिन्न बैंकों में अलग-अलग हो सकती हैं। बैंक आपके रिस्क प्रोफाइल, जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर ब्याज दरें तक करते हैं। इसलिए, पर्सनल लोन के लिए कई बैंकों में पड़ताल जरूर कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही आप यह भी जरूर जान लें कि बैंक जितना लोन दे रहा है, वह आपकी जरूरत को पूरा करने के लिए काफी है या नहीं। चूंकि पर्सनल लोन कम अवधि के लिए होता है, जिसके चलते इसकी ईएमआई अधिक होती है। इसलिए, लोन लेेने से पहले ईएमआई भुगतान की अपनी क्षमता का आकलन जरूर कर लें।

अपने क्रेडिट स्कोर का ध्यान जरूर रखें
आपका क्रेडिट स्कोर सस्ते ब्याज पर पर्सनल लोन दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी सिबिल क्रेडिट हिस्ट्री का लेखाजोखा रखती है, जिसके जरिए आपका क्रेडिट स्कोर रखा जाता है। इसकी जानकारी बैंकों के साथ बांटी जाती है। इसलिए, अपनी क्रेडिट रेटिंग को बेहतर रखें। यदि आपका पिछला री-पेमेंट रिकॉर्ड अच्छा नहीं है, तो आपको पर्सनल लोन लेने में काफी मुश्किलें आ सकती हैं। या तो बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं, या  आपको इसके लिए ऊंची ब्याज दरें चुकानी पड़ेंगी। अधिकांश बैंक उन ग्राहकों को अतिरिक्त लाभ देते हैं, जो उनके साथ नियमित तौर पर बने रहते हैं। अगर आप बैंक के नियमित ग्राहक हैं तो हो सकता है कि बैंक आपके लोन की प्रोसेसिंग फीस माफ  कर दे, आपका डॉक्यूमेंटेशन चार्ज ना वसूले या फिर आपको बेहतर ब्याज दरें मुहैया कराए। 

समस्या बन जाए पर्सनल लोन तो सूझबूझ से लें काम
अचानक किसी जरूरत को पूरा करने के लिए यदि आपने पर्सनल लोन लिया, लेकिन अब वह आपके लिए एक समस्या बना गया है तो घबराएं नहीं, बल्कि सूझबूझ से काम लें। पर्सनल लोन से छुटकारा पाने के लिए आपके पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। इन विकल्पों पर गौर करें तो आसानी से अपनी मुश्किल आसान कर सकते हैं।

सिक्योर्ड लोन में करा लें कन्वर्ट
पर्सनल लोन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसे आप सिक्योर्ड लोन में कन्वर्ट करा सकते हैं। इसके लिए आपको मकान, गाड़ी और म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल गारंटी के रूप में करना पडे़गा। इसके अलावा, आरबीआई बांड और गोल्ड ईटीएफ फंड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके बावजूद यदि आपको लगता है कि आप पर्सनल लोन की ईएमआई चुकाने में सक्षम नहीं है, तो आप कार, घर, जीवन बीमा पॉलिसी, शेयर, बांड, डिबेंचर, सोने के गहने, बैंक फिक्सड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड जैसे ऐसेट गिरवी रखकर कुछ लोन ले सकते हैं और इसका इस्तेमाल पर्सनल लोन को चुकाने में कर सकते हैं।
 
डेट कंसॉलिडेशन का ले सकते हैं सहारा
पर्सनल लोन का भुगतान करने के लिए आप अपने कर्जों को छोटी-छोटी किश्तों के जरिये लंबे समय में चुका सकते हैं। इसमें आप अपने सभी कर्जों को इकट्ठा कर एक डेट (कर्ज) पोर्टफोलियो बना सकते हैं, जिसे डेट कंसॉलिडेशन कहा जाता है। यदि, आपने काफी सारे लोन ले रखें हैं, तो डेट कंसॉलिडेशन के जरिये आप इन्हें धीरे-धीरे लंबे समय में चुका सकते हैं। हालांकि, डेट कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य छोटी अवधि में आपको मुसीबत से निकालना है। एक बार आपकी आर्थिक स्थिति ठीक हो जाए, तो आप अनुमानित समय से पहले अपने कर्ज चुका सकते हैं।

डिफॉल्टर होने से बढ़ जाएंगी मुश्किलें
जहां तक संभव हो डिफॉल्टर होने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। पर्सनल लोन में एक बार डिफॉल्ट होने पर भी आपको लोन चुकाने और भविष्य में जरूरत पड़ने पर लोन लेने में परेशानियां आ सकती हैं। यदि, लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति आए तो देनदार से बात करें और इसका समाधान खोजने की कोशिश करें। सामान्य परिस्थितियों में देनदार डिफॉल्ट पूंजी की 20 फीसदी राशि के बराबर पेनल्टी लगा सकता है, जो सिर्फ आपके ऊपर अतिरिक्त बोझ ही होगा। इसलिए ऐसी स्थिति से बचने के लिए देनदार से बात करें और समाधान ढ़ूंढ़ने की कोशिश करें।
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