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रिटायरमेंट के बाद हो फाइनेंशियल प्लानिंग

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Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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निश्चित तौर पर नौकरीपेशा जीवन में एक लंबा सफर तय करने के बाद सबकी इच्छा सुकून भरा जीवन जीने की होती है। लेकिन, समझदारी इसमें नहीं है कि रिटायरमेंट के बाद आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करना ही बंद कर दे। बल्कि, वास्तविक सूझबूझ यह है कि अपने रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल यानी निवेश इस तरह करें कि उससे आपकी आमदनी कमोबेश पहले की तरह ही बनी रहे।
यह जरूर याद रखना चाहिए कि आगे अभी आपका जीवन लंबा है। इसमें स्वास्थ्य देखभाल के खर्चे और बढ़ती महंगाई का दबाव भी झेलना है। इसके साथ ही यदि आपको कुछ संपत्तियों पर रिटर्न मिलता है तो उस टैक्स भी चुकाना होगा। ऐसे में यदि कुछ बातों को ध्यान में रखा जाए तो रिटायरमेंट बाद के जीवन को सही मायने में सुखमय बनाया जा सकता है।

जैसेकि, आप कभी भी ऐसा मत सोचिए कि आप अपने फंड से मिलने वाले ब्याज पर जीवन गुजार लेंगेे। यह ध्यान रखें कि हमेशा कुछ न कुछ पैसे आवश्यक खर्चों के लिए निकालना पड़ता है। ऐसे में अपने फंड से उतना ही पैसा निकालें, जिससे कि आपकी जीवन शैली पर खास असर न पड़े।

अपने पोर्टफोलियो के लिए उपयुक्त उत्पादों को लगातार पहचानते रहें। विविधता महत्वपूर्ण चाबी है। यानी, आपके पास विभिन्न ऐसेट वर्ग होने चाहिए। जिससे आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न सहज रहें। सिर्फ किसी एक ऐसेट वर्ग में विविधता होने से कोई लाभ नहीं होगा। टैक्स के नियम बदलते रहते हैं, रोज नए आर्थिक उत्पाद बाजार में आते हैं।

इसलिए जरूरी है कि आर्थिक जगत के नए बदलाव से लगातार संपर्क बनाए रखें। अपनी प्लानिंग को पूरी तरह आराम न दें।

आपने अपनी संपत्तियां बड़ी मेहनत से बनाई हैं। आप उन्हें योग्य व्यक्ति को ही देना चाहेंगे। इसलिए एक वसीयत बनाए, जिससे आपके फंड और संपत्ति उसी तरह बांटे जाएं जैसे आप चाहते हैं। आपको ऐसेट वितरण के लिए योजना बनाने की जरूरत है, जिससे वो कम से कम कीमत और टैक्स देयता पर जमा और स्थानांतरित हो सके।

रिटायरमेंट के बाद रहें थोड़ा सतर्क
रिटायरमेंट के बाद कुछ महीनों तक ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। क्योंकि इस समय यदि आप जल्दबाजी में अपने पोर्टफोलियो का समय पूरा होने से पहले ही पैसा निकाल लेते हैं तो इसका उस पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ता है।

कैश फ्लो पर बराबर ध्यान रखना चाहिए
आदर्श रूप से आपको अपने कैश फ्लो को वैसे ही देखते रहना चाहिये जैसे आप पोर्टफोलियो को दुबारा संतुलित करते हैं। क्योंकि, हर साल जब भी आप अपने फंड को संतुलित और आवंटित करें तो आपको उस धन को निकाल लेना चाहिए, जिसकी जरूरत आपको किसी अन्य ऐसेट में निवेश करने के लिए पड़ेगी। साथ ही यह लंबी अवधि में आपके फंड प्रबंधन और निकासी शुल्क को कम करने में मदद भी करेगा।

टैक्स देयता भी रखें ख्याल
यह जरूरी नहीं है कि सेवानिवृत्ति के बाद आप निम्न टैक्स वर्ग में ही रहेंगे। इसलिए अपने निवेशों की योजना बनाते समय आप मौजूदा टैक्स संरचना के तहत मिलने वाले लाभों का भी ध्यान रखें।

पोर्टफोलियो में संतुलन है जरूरी
पोर्टफोलियो में संतुलन इस तरह होना चाहिए कि निवेश के साथ जरूरत पर पैसे निकालने का भी सहज विकल्प उपलब्ध हो। अपने ऐसेट में से 4 फीसदी से अधिक पैसा निकालना अच्छा संकेत नहीं है। म्यूचुअल फंड निवेश में आपको डिविडेंट के तरीके से पैसा निकालने का विकल्प रखना चाहिए, क्योंकि वह आपको टैक्स में लाभ दिलाता है।

डिविडेंट को आप हमेशा दुबारा निवेश कर सकते हैं और यह आपके पोर्टफोलियो को दुबारा संतुलित करने में भी मदद करता है। साथ ही जो डिविडेंट आप प्राप्त करते हैं, उन्हें आप लिक्विड फंड (जैसे म्यूचुअल फंड) में भी लगा सकते हैं और आप इन्हें जब चाहे तब निकाल सकते है। सामान्यतया आपको तीन महीने का कैश फ्लो अपने बैंक खाते में रखना चाहिए। ताकि, आपकी जरूरतों की देखभाल होती रहे।

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