पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया आतंकवादी घटनाओं के बावजूद आर्थिक सम्भावनाओं के कारण बड़ी संख्या में भारतीयों को निवेश के लिए आकर्षित कर रहा है।
पिछले महीने हुए आतंकवादी हमलों में एक भारतीय सहित करीब 160 लोगों की मौत हो गई, लेकिन निवेश का आकर्षण कम नहीं हुआ। नाइजीरिया में भारत के उच्चायुक्त महेश सचदेव के अनुसार ऐसी घटनाओं से अन्य उद्यमी प्रभावित नहीं होंगे। 13 अरब डॉलर के सालाना द्विपक्षीय व्यापार के साथ भारत नाइजीरिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है।
सचदेव ने कहा, ‘वर्ष 2010 में भारत ने नाइजीरिया में सबसे अधिक निवेश किया। वर्ष 2011 में कई नए निवेश की भी घोषणा की गई। भारतीय दूरसंचार कम्पनी एयरटेल की नाइजीरिया में 60 करोड़ डॉलर के नेटवर्क विस्तार की योजना है।’
केवल भारतीय ही नाइजीरिया का रुख नहीं कर रहे, बल्कि बड़ी संख्या में नाइजीरियाई नागरिक भी भारत का रुख कर रहे हैं। सस्ती दरों पर मिलने वाली बेहतर चिकित्सा सुविधा के कारण भारत नाइजीरियाई लोगों की पहली पसंद है। एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2011 के दौरान करीब 33,000 नाइजीरियाई नागरिकों को भारतीय वीजा जारी किया गया, जो वर्ष 2010 से 40 प्रतिशत अधिक है।
करीब 15 करोड़ 80 लाख की आबादी वाले नाइजीरिया के राजस्व का मुख्य स्रोत तेल निर्यात है। नाइजीरिया अफ्रीका में भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है। यहां 35,000 भारतीय बिना किसी विवाद के नाइजीरियाई समुदाय के साथ शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में रह रहे हैं।
नाइजीरिया में आतंकवादी गुट ‘बोको हराम’ सक्रिय है, जिसके तार अलकायदा से जुड़े होने की बात कही जा रही है। 20 जनवरी को उसके हमले में भारतीय उद्यमी केवलकुमार कालिदास राजपूत (23) सहित 160 लोगों की मौत हो गई थी।
यह आतंकवादी गुट नाइजीरिया में पश्चिमी शिक्षा का विरोध और शरिया कानून लागू करने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन ने इस आतंकवादी गुट से हिंसा का रास्ता छोड़ बातचीत के लिए आगे आने को कहा है, लेकिन संगठन ने इसे ठुकरा दिया है।
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