अमेरिका और यूरोप में मांग घटने की आशंका को देखते केरल ने आक्रामक रणनीति तैयार करते हुए अगले चार वर्ष में नारियल उत्पादों का कारोबार 4000 करोड़ रुपए तक पहुचाने का लक्ष्य रखा है।
केरल के नारियल उत्पाद मंत्री अडूर प्रकाश ने 'कयर केरल 2012' का उद्घाटन करते हुए बताया कि नारियल उत्पादों के निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। इस कारण से यह राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। देश के उत्तरी राज्यों में नारियल उत्पादों की भारी मांग है। उत्पाद मांग वाले क्षेत्रों में नारियल पहुंचाने के लिए परियोजना बनाई जा रही है।
प्रकाश ने कहा कि सरकार अगले तीन से चार वर्ष के बीच नारियल उद्योग में रोजगार के 60 लाख अवसर हर साल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। नारियल उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2001-02 में 320 करोड़ रुपए के नारियल उत्पाद निर्यात किए गए थे। 2010-11 में 807 करोड़ रुपए का नारियल उत्पाद निर्यात हुआ।
मौजूदा वित्त वर्ष में 1000 करोड रुपए के नारियल उत्पाद विदेशों को भेजे जाने की उम्मीद है। नारियल उत्पाद में भारत का दुनिया में तीसरा स्थान है। तकरीबन 110 देशों को नारियल उत्पाद भेजे जाते हैं।
प्रकाश ने बताया कि देश में भी नारियल उद्योग बढ़ रहा है। देश के भीतर नारियल उत्पादों का कारोबार लगभग 1600 करोड़ रुपए का है। मौजूदा वित्त वर्ष में इसे 2000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है। विशेष सचिव रानी जार्ज ने बताया कि अमेरिका और यूरोप में मंदी के कारण अन्य बाजार तलाशे जा रहे हैं।
एक सप्ताह तक चलने वाले 'कयर केरल' 2012 में 32 देश हिस्सेदारी कर रही है। इनके अलावा नारियल उद्योग से जुडी 140 घरेलू कंपनियां भी यहां मौजूद है। प्रकाश ने बताया कि अफ्रीका से नारियल उत्पादों की मांग आ रही है। इसलिए दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और जांबिया के प्रतिनिधि मंडल भी पहली बार कयर केरल में हिस्सा ले रहे हैं। आयरलैंड, बुल्गारिया, फ्रांस और स्वीडन ने भी नारियल के गैर परंपरागत उत्पादों के रूचि दिखाई है।
नारियल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष प्रावधान किए जा रहे है। इसके लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है।
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