सिक्योर हिमालय से संरक्षित होगा हिम तेंदुए और ग्रामीणों का जीवन

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Dehradun Bureau

उत्तरकाशी। भारत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुआ) और अन्य दुर्लभ वन्य जीवों के संरक्षण और ग्रामीणों के विकास के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। ग्लोबल एन्वायरमेंट फैसिलिटी (जीईएफ) और यूनाइटेड डेवलेपमेंट फंड प्रोग्राम (यूएनडीपी) की ओर से संचालित योजना में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और हिमाचल को जोड़ा गया है, जबकि उत्तराखंड के गंगोत्री नेशनल पार्क, गोविंद वन्य पशु विहार और अस्कोट नेशनल पार्क के दारमा क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है। करीब 20 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट को 2017-22 तक चलाया जाएगा, जिसके तहत हिम तेंदुए और अन्य दुर्लभ प्रजाति के जीवों के संरक्षण सहित उनके वास स्थल तथा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने पर कार्य किया जाएगा।सिक्योर हिमालय से जुड़े वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डीन डॉ. जीएस रावत के अनुसार यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है, जिसमें देश के हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ जीवों के वास स्थलों के संरक्षण, शोध आदि पर कार्य किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में ग्रामीणों की वनों पर निर्भरता को भी कम किया जाएगा, जिससे वन क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। इसके लिए विभिन्न विभागों से मिलकर ईको टूरिज्म, बागवानी, घरेलू उद्योग जैसी योजनाएं चलाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त भूकटाव, जलवायु परिवर्तन, वन कटान, मानव-वन्य जीव संघर्ष जैसी समस्याओं को भी दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट हिमालय की जैव विविधता और संस्कृति के संरक्षण का एक प्रयास है, जिससे हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ ही ग्रामीणों को भी बेहतर जीवन मिलेगा। सिक्योर हिमालय के बिंदु - उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मुखबा, बगोरी, झाला, ओसला, गंगाड़ और पंवाड़ी आदि गांवों सहित पिथौरागढ़ जिले के दारमा क्षेत्र के गांवों को मिलेगा फायदा। जम्मू कश्मीर का चांगथांग (लद्दाख) क्षेत्र, सिक्किम का कंचनजंगा और लहोनाक क्षेत्र तथा हिमाचल का लाहौल और पांगी क्षेत्र है शामिल। भूरा भालू, कस्तूरी मृग, मोनाल, तिब्बती भेड़िया, रेड फॉक्स, आइबेक्स, हिमालयी तहर, गोल्डन ईगल, ग्रिफ्फान वल्चर आदि जीवों को भी मिलेगा संरक्षण।
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