सीबीआरआई में वैज्ञानिक गतिविधियों से रूबरू हुए नौनिहाल

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Dehradun Bureau

अमर उजाला ब्यूूरोदेश के युवाओं में वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने के लिए तथा स्कूली विद्यार्थियों को सीएसआईआर जैसे संस्थानों द्वारा किए जा रहे कार्यों से प्रेरित करने के उद्देश्य से केंद्रीय विद्यालय संगठन और और सीएसआईआर ने अपनी 38 प्रयोगशालाओं और 10,151 केंद्रीय विद्यालयों के साथ मिलकर एक वैज्ञानिक विद्यार्थी संयोजन कार्यक्रम जिज्ञासा की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के जरिए सीएसआईआर ने सालाना देश के एक लाख विद्यार्थियों और दस हजार शिक्षकों में वैज्ञानिक प्रवृत्ति विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत सीएसआईआर -सीबीआरआई रुड़की में विज्ञान और रचनात्मकता की खोज करते विद्यार्थियों के लिए सीएसआईआर योजना जिज्ञासा -उत्सुकता की खोज के अंतर्गत वैज्ञानिक पोषण देने के लिए विद्यार्थी प्रशिक्षु कार्यक्त्रस्म का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने किया। कार्यक्रम के तहत रुड़की स्थित सीबीआरआई में केंद्रीय विद्यालय एक और दो के 72 विद्यार्थी चयनित किये गए हैं जो एक माह तक संस्थान के वैज्ञानिको के निर्देशन में संस्थान की प्रयोगशालाओं और संसाधनों का उपयोग करते हुए अपने वैज्ञानिक नवविचारों को जीवंत मॉडल के रूप में विकसित करेंगे।छात्रों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य और कृषि, जीवन शैली और आजीविका, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, ऊर्जा के क्षेत्रों मे किए जा रहे वैज्ञानिक शोधोें के बारे में जानकारी दी गई। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं जिज्ञासा कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अतुल अग्रवाल ने बताया कि जिज्ञासा का अर्थ है उत्सुकता। किसी भी विषय में क्या? क्यों ? कैसे जानने की? यह विज्ञान का अध्ययन करने में पहला कदम है। यह हमारी जिज्ञासा है जो हमें अन्य प्राणियों से अलग करती है। आइंस्टाइन, हेनरी फोर्ड और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षा का मूल्य तथ्यों को याद करना नहीं अपितु बुद्धि को सोचने के योग्य बनाने का प्रशिक्षण देना है। युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जुनून के संचार से भारत दुनिया के समक्ष एक बौद्धिक सामर्थ्य की मिसाल के रूप में खड़ा होगा और विश्व भर में सम्मान पाएगा। डॉॅ. अग्रवाल ने बताया कि इसी अवधारणा के साथ सीएसआईआर -सीबीआरआई रुड़की में जिज्ञासा योजना के तहत साल भर में अनेक वैज्ञानिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. पीसी थपलियाल, डॉ एसआर कराड़े, डॉ. सुवीर सिंह डॉ एके मिनोचा, डॉ एस सरकार, डॉ एलपी सिंह, देबदत्ता घोष, सिद्धार्थ बेहेरा, डा. अचल मित्तल, मोनालिसा बेहेरा, सांथा कुमार, डॉॅ. किशोर एस कुलकर्णी, डॉ. शैलजा सिंह, चंदन स्वरूप और सायंतनी लाला समेत कई उपस्थित थे।
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