17 करोड़ 23 लाख का फायदा देने वाला वन निगम डिपो समाप्त

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Lucknow Bureau

श्रावस्ती। स्थापना से लेकर लगातार मुनाफा देने वाला वन निगम डिपो को अचानक सोमवार को समाप्त कर दिया गया। इसके कर्मचारियों को जल्द ही गैर जिले में समायोजित किया जाएगा। जबकि दस्तावेज बहराइच व लखनऊ भेजे जाएंगे। इस वर्ष 17 करोड़ 23 लाख रुपये का मुनाफा देने वाले इस निगम को तोड़ने के बाद जिले में कई तरह की प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। जिले में वन संपदा अधिक मात्रा में है। यहां पुराने व गिरे पड़े पेड़ों को वन विभाग वन निगम के माध्यम से बेचता है। जिससे सरकार को एक मोटी रकम लाभ के रूप में मिलती है। यह रकम जिले की आय के रूप में भी दर्ज होती है। इन सब लाभों को देखते हुए एक नवंबर 2003 को भिनगा में वन निगम डिपो की स्थापना की गई थी। इस डिपो के माध्यम से भिनगा ककरदरी सहित अन्य रेंजों में प्रति वर्ष काटी गई लकड़ियों को यहां से नीलाम किया जाता था। जिसके चलते केवल इस वित्तीय वर्ष में ही भिनगा वन निगम डिपो को 17 करोड़ 23 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। इस मुनाफे के बाद भी अचानक सोमवार को इस डिपो को समाप्त करने का फरमान राज्य की ओर से जारी कर दिया गया है। यह आदेश जिले में पहुंचते ही कई रह की प्रतिक्रियाएं आने लगी। इस डिपो से प्रत्यक्ष रूप से लगभग 200 मजदूरों को रोजगार मिलता था। जबकि अप्रत्यक्ष रूप से एक हजार से अधिक लोग डिपो से जुडे़ हुए थे। इनमें से सभी मजदूरी पेशा थे। अचानक जिले से डिपो समाप्त होने के कारण एक हजार से अधिक लोगों के परिवारों के सामने रोजगार का संकट भी आ खड़ा हुआ है। जिसको लेकर मजदूर मंगलवार को सड़क पर आंदोलन करने की बात कह रहे हैं। जिला पुनर्गठन में भी थी डिपो की भूमिका श्रावस्ती जिले को 2006 में अचानक तत्कालीन सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया था। उसी के बाद जिले के अधिवक्ताओं में उच्चतम न्यायालय में मामला दायर किया था। इस दायरे का आधार भिनगा वन निगम डिपो से अर्जित आय से सरकार को होने वाला मुनाफा बताते हुए लाभान्वित जिला पुनर्बहाल की मांग की गई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान भी लिया था। निगम का है फैसला भिनगा वन निगम डिपो समाप्त करने का फैसला निगम का है। इसमें मेरे द्वारा कुछ भी नहीं किया जा सकता। निगम के निर्देश पर जल्द ही सभी दस्तावेज दूसरे जनपदों को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। -जीसी सिन्हा, डीएसएम
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