मत् स्य विभाग-City

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Jhansi Bureau

फोटोबेरोजगारों के जीवन में ‘रंग’ भरेंगी रंगीन मछलियां - कम पूंजी में बनाया जा सकता है आय का बेहतर साधन - मत्स्य पालक प्रशिक्षण शिविर में दी जा रहीं जानकारियां अमर उजाला ब्यूरोझांसी।घरों में रंगीन मछलियां पालने के चलन के साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कम पूंजी के इस व्यवसाय से जुड़कर बेरोजगार अपने जीवन में रंग भर सकते हैं। तीन दिवसीय मत्स्य पालक प्रशिक्षण शिविर में मछली पालन की जानकारियां दी जा रही हैं। मत्स्य विभाग के उप निदेशक डॉ. अरविंद मिश्रा ने कहा कि रंगीन मछलियां घर की शोभा तो बढ़ाती हैं, साथ ही सकारात्मक ऊर्जा भी देती हैं। कम पूंजी में रंगीन मछलियों का व्यवसाय शुरू कर बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। इससे पूर्व पंचतंत्र पार्क स्थित मत्स्य चेतना केंद्र में आयोजित शिविर का शुभारंभ कर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि बुंदेलखंड में मछलियों की उन प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाए, जिनकी बाजार में कीमत अच्छी मिलती है। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर सहयोग देने को तैयार है। प्रशिक्षण शिविर के पहले सत्र में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. इकबाल खान ने सजावटी मछली पालन की विधि, देखरेख और बिक्री की जानकारी दी। बताया कि सजावटी मछली की सौ से अधिक देसी प्रजातियां हैं। विदेशी प्रजाति की मछलियां भी यहां पैदा की जाती हैं। दूसरे सत्र में नाबार्ड के डीजीएम अजय सोनी ने बताया कि मत्स्य पालकों को इस व्यवस्था में चालीस प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाती है। साठ फीसदी पूंजी उसे खुद लगानी होती है। यह भी ऋण से प्राप्त की जा सकती है। शिविर में झांसी, जालौन और ललितपुर जिले के पचास प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। आज दूसरे दिन प्रशिक्षणार्थियों को पहूज जलाशय और डड़ियापुरा स्थित मत्स्य बीज उत्पादन एवं सजावटी मछली बीडिंग केंद्र का भ्रमण कराया जाएगा। महीने में बीस हजार की बचतबड़ागांव गेट बाहर डड़ियापुरा निवासी गुलाब रायकवार ने छह महीने पहले चार लाख रुपये की लागत से सजावटी मछली का प्रजनन केंद्र शुरू किया था। इसमें नाबार्ड से 1.60 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई थी। गोल्ड फिश, डॉलर, मोली, फेंटल समेत बारह प्रकार की रंगीन मछलियों का प्रजनन कराया जा रहा है। इन मछलियों की बाजार में अच्छी मांग है। बताया कि न्यूनतम बीस हजार रुपये प्रतिमाह की आसानी से बचत है। कभी-कभी इससे अधिक भी मुनाफा हो जाता है। मछली का बीज एक महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। झांसी के अलावा ललितपुर भी मछलियां जाने लगी हैं। आने वाले दिनों में अन्य जनपदों में भी भेजने की तैयारी है।सत्तर फीसदी मुनाफे का व्यवसायमत्स्य विभाग के उप निदेशक डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि सजावटी मछली के प्रजनन व्यवसाय में सत्तर फीसदी और इससे अधिक भी मुनाफा है। रंगीन मछली का कारोबार देश में तेजी से बढ़ रहा है। पहले यह मछलियां कोलकाता से आती थीं। प्रशिक्षण शिविर कौशल विकास मिशन के तहत आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी।
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