पति की हत्यारोपी पत्नी की जमानत खारिज

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Kanpur Bureau

पति की हत्यारोपी महिला की जमानत खारिज- धोखाधड़ी के आरोपी बैंक के फील्ड ऑफीसर की जमानत भी खारिजहरदोई। जिला जज जयशील पाठक ने बुधवार को दो अलग-अलग मामलों से संबंधित जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई की। उन्होंने पति की हत्यारोपी महिला और धोखाधड़ी के आरोपी बैंक फील्ड आफीसर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोतवाली शहर थाना क्षेत्र के आवास विकास निवासी मायारानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके लड़के मनीष ने करीब नौ साल पूर्व शीतल के साथ प्रेम विवाह किया था। उन दोनों के एक पुत्र सिद्धांत भी है। मनीष ने मां को बताया था कि शीतल का राहुल के साथ गलत संबंध है। 21 जून 2017 को मनीष अपने लड़के सिद्धांत को मायारानी के पास छोड़ गया था। 22 जून को मायारानी पुत्र से मिलने उसके घर आवास विकास कालोनी गई। घर पर पहुंचते ही उन्हें फायर की आवाज सुनाई पड़ी। वादिनी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने शीतल और राहुल को घर से भागते देखा था। जब वह अंदर गई तो देखा कि मनीष तड़प रहा था। लोग उसे अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने अवैध संबंध के कारण मनीष की हत्या के आरोप में शीतल और राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद किया था। अदालत के समक्ष आरोपी शीतल ने जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर खुद को निर्दोष बताया। उसने तर्क दिया कि घटना के समय वह मंदिर गई थी और राहुल व मनीष के बीच रुपयों को लेकर विवाद था। राहुल मनीष का नौकर था। उसने अदालत से जमानत दिए जाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी कर आरोपी को जमानत दिए जाने के पर्याप्त आधार न पाते हुए उसकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी। वहीं दूसरा मामला धोखाधड़ी के अपराध से संबंधित रहा। मामले में कोतवाली शहर थाना क्षेत्र निवासी रघुवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज करा बताया था कि उसके भूखंडों पर कारपोरेशन बैंक की हरदोई शाखा की मिलीभगत से धोखाधड़ी कर आठ लाख अट्ठावन हजार रुपये ऋण निकाल लिया गया। मामले के आरोपी रहे बैंक के फील्ड आफिसर आफताब आलम अंसारी ने अदालत के समक्ष जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर खुद को निर्दोष बताया था। अदालत ने प्रार्थना पत्र की सुनवाई कर जमानत के पर्याप्त आधार न पाते हुए उसकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार वर्मा ने पैरवी की।
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