अयोध्या में होगा कल्पवासी श्रद्धालुओं का जमावड़ा

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Lucknow Bureau

अयोध्या। कार्तिक मास की शुरुआत शुक्रवार से होने के साथ अयोध्या में कल्पवासी श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। इस दौरान रामनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कल्पवास के लिए आते हैं। अयोध्या के विभिन्न मंदिरों व गुरु स्थानों पर रुक कर कार्तिक कल्पवास करते हैं।कार्तिक मास सभी मासों में श्रेष्ठ व सर्वोत्तम फलदायक माना गया है। व्रत, स्नान व दीपदान के लिए सरयू तट पर सुबह-शाम कल्पवासी श्रद्धालुओं की भीड़ शुरू होने लगी है। कार्तिक मास त्योहारों का माह कहा जाता है। ऋतु परिवर्तन की दृष्टि से कार्तिक का महीना समशितोष्ण होता है।भारतीय परंपरा में इसे महीनों में सर्वोत्तम बताया गया है। अर्जुन को गीता का ज्ञान देते समय भगवान कृष्ण ने स्वयं को महीनों में कार्तिक बताया था। इसी महीने व्रत त्योहारों की संख्या भी अधिक होती है। करवा चौथ से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक शायद ही कोई दिन हो जिस दिन का विशेष महत्व न हो।कल्पवास एक प्रकार की साधना है, जो पूरे कार्तिक मास के दौरान पवित्र नदियों के तट पर की जाती है। कार्तिक व्रत स्नान की महिमा का वर्णन करते हुए पंडित कृष्ण कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि भविष्य पुराण में वर्णित है कि कार्तिक का व्रत आश्विन की पूर्णिमा को शुरू कर कार्तिक की पूर्णिमा को पूरा करें।स्नान, दीपदान, तुलसी के पौधों को लगाना और सींचना, पृथ्वी पर सयन, ब्रह्मचर्य का पालन, भगवान विष्णु के नामों का संकीर्तन व पुराणों का श्रवण, इन सब नियमों का कार्तिक मास में निष्काम भाव से पालन करने वाले श्रेष्ठकर हैं। पीपल के रूप में साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं, इसलिए कार्तिक में उसका पूजना करना चाहिए।
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