शरद पूर्णिमा की चांदनी रात को छत पर पहुंच कर निहारा

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Varanasi Bureau

मुगलसराय। शरद पूर्णिमा पर लोगों ने संपूर्ण कलाओं से युक्त चांद का दर्शन किया तथा विष्णु की पूजा की। देवताओं की प्रतिमाओं अमृत पान के लिए छत पर रखा। साथ ही खीर बना कर कपड़े से ढक उसे भी छत पर रखा गया। आश्वनी मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पंडित कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि इस रात में अमृत की वर्षा होती है। चंद्रमा की आभा पूर्ण कला वाली होती है। इस चांदनी रात में सूई में धागा पिरोने से आंखों की ज्योति बढ़ती है। भगवान को भी रात में छतों पर अमृतपान के लिए विराजमान करना चाहिए और स्वयं भी छत पर टहलना चाहिए। अधिकतर घरों में सत्यनरायण की पूजा हुई। खीर बनाकर भगवान को भोग लगाया गया। इसके बाद उसे छत पर रखा गया। आरती कर भगवान से आरोग्य का वरदान मांगा गया। शुक्रवार को इसी ठंडे खीर का सेवन किया जाएगा। बड़े पैमाने पर लोग गंगा स्नान के लिए वाराणसी गए वहीं जिले में बलुुआ घाट, टांडा, विजयी पूरा, पूरा गनेश, रौना, कैली, कुरहना, भूपौली गंगा घाट पर भी स्नान करने वालों की भीड़ रही। मंदिरों पर दर्शन पूजन के लिए लोग पहुंचे। नगर के आरपीएफ कालोनी शिव मंदिर, नई सट्टी स्थित दुर्गा हनुमान मंदिर, एलबीएस कटरा स्थित संकट हरण दरबार में दर्शन पूजन के लिए लोग जुटे।
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