जांच में धनउगाही की शिकायत मिली झूठी

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Varanasi Bureau

आजमगढ़। तहसील मेहनगर निवासी वीरेंद्र सरोज पुत्र सल्टन ने 13 सितंबर को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास आवंटन में धन लिए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्य विकास अधिकारी को शिकायती पत्र दिया था। परियोजना निदेशक ने अपनी जांच आख्या में आरोप को झूठा बताया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि आवास दिए जाने में 20-20 हजार रुपया लिया गया है। परियोजना निदेशक ने तीन अक्तूबर को की गई स्थलीय निरीक्षण की मुख्य विकास अधिकारी को भेजी गई जांच आख्या में बताया कि ग्राम पंचायत शेखूपुर में वर्ष 2011 की एसईसीसी सूची से 2016-17 में तीन और 2017-18 में दो लाभ्यार्थियों को आवास का आवंटन किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पांच लाभ्यार्थियों के आवासीय स्थिति का जब सत्यापन किया गया तो सभी पात्र पाए गए। लाभ्यार्थियों ने बताया कि ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी अथवा विकास खंड अधिकारी द्वारा किसी आवास आवंटन के लिए धन की मांग नहीं की गई थी। सभी के खातों में प्रथम किश्त की धनराशि में चार के खातों में पहुंच चुकी है। एक लाभ्यार्थी राजमंगल के खाते में प्रथम किश्त की धनराशि नहीं पहुंची है,जब कि खंड विकास अधिकारी द्वारा एफटीओ जारी किया जा चुका है। परियोजना निदेशक ने बताया कि जब शिकायतकर्ता की उपस्थिति में जांच की जा रही थी तो उसने बताया कि मैने शिकायत नहीं की थी। कोई मेरा फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत की थी। उसने इस बात को स्वीकार किया कि जितने लोगों को आवास दिया गया है सभी पात्र है। स्थलीय सत्यापन में धन उगाही किए जाने की शिकायत को निराधार पाया गया।
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