इजहार

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akanskha pandey

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सर्द सी रात और वो जनवरी की मुलाकात तुम्हारा वो प्यार, मेरा वो तुमसे मोहब्बत का इजहार वो तेरा सुहाना सा सफर और वो जनवरी की हमारी पहली मुलाकात, तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में आना और ज़िन्दगी का एक पल का सफर उम्र भर का तुम्हारा साथ और तुम्हारा वो अपनेपन का एक एहसास, और तुमसे मिलने का वो ख्वाब वो तुम्हारा पहला इनकार, और फिर वो तुम्हारा बेइंतहा प्यार, कितनी खास थी वो रात जब तुमसे मोहब्बत का इजहार किया था और तुम्हारा वो इंकार मुझे खलता बहुत था, मोहब्बत पर यकीं नहीं था तुम्हें आज शायद समझा तुमने चाहत को हमारी तभी तो आज भी हम हैं साथ, बस तेरा साथ मिलता रहे, और चाहिये मुझे ज़िन्दगी का भर प्यार।। - उपासना पाण्डेय हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
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