अधिकारी बोले : हड़ताल खत्म करों वरना कार्रवाई, डॉक्टर बोले : एमएस हैं जिम्मेदार

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Rohtak Bureau

अमर उजाला ब्यूरोरोहतक। पीजीआई में चल रही हड़ताल के तीसरे दिन हड़ताल पर बैठे डॉक्टर और प्रबंधन से मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च के डायरेक्टर आईएएस साकेत कुमार ने मुलाकात की। पीजीआई प्रबंधन के साथ चंडीगढ़ से आए डीएमईआर साकेत कुमार ने रेजिडेंट डॉक्टरों से बात की। उन्होंने हड़ताल को समाप्त करने के लिए कहा। इस बार रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगे रख दी और तभी हड़ताल खत्म करने की बात कही। इस पर डायरेक्टर भड़क गए और एस्मा के तहत कार्रवाई के लिए चेताया। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा चोरी में डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं बनती, यह प्रबंधन को देखना चाहिए। रेजिडेंट डॉक्टरों पर कार्रवाई की जगह चिकित्सा अधीक्षक पर कार्रवाई होनी चाहिए। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जंगबीर ग्रेवाल ने बताया कि बुधवार को पहले उनको अधिकारियों ने बातचीत के लिए बुलाया था। जब वह और उनके पदाधिकारी बातचीत के लिए गए तो उन्होंने सिर्फ अपनी ही बात रखी, उनकी मांगों पर कोई बात नहीं की। अधिकारी ने कहा कि बच्चा चोरी मामला लीगल है, इसमें जांच के दौरान सभी कार्रवाई से गुजरना होगा। उन्हें प्रशासन की सारी बात माननी होगी, यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो प्रदेश में एस्मा एक्ट लागू है। डॉ. ग्रेवाल ने कहा कि अधिकारी ने सीधे-सीधे एस्मा एक्ट लगाने की धमकी दी। इसके बाद वह विजय पार्क में आकर सभी डॉक्टरों से बात की। इस पर हड़ताल समाप्त करने पर सहमति नहीं बनी। डॉक्टरों के बीच आए अधिकारीडीएमईआर साकेत कुमार संस्थान के अधिकारियों के साथ विजय पार्क में आए और यहां हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों से बातचीत की। सभी डॉक्टरों ने फिर अपनी मांग आगे रख दी। इससे अधिकारी ने मानने से इंकार कर दिया और वे एस्मा लागू होने के तहत कार्रवाई की धमकी देकर चले गए। पुलिस जांच में अधिकारी भेजने की बात मनी, फिर भी हड़ताल पर डटेवीसी डॉ. ओपी कालरा ने डॉक्टरों से बातचीत करते हुए कहा, जांच में यदि किसी को बुलाया जाएगा तो उसके साथ एक अधिकारी भी जाएगा, जब तक इस मामले में पूरी पूछताछ नहीं हो जाती। विश्वास दिलाते हैं कि किसी का शोषण नहीं होने देंगे। लेकिन पुलिस थाने और कोर्ट में जब भी बुलाया जाएगा, सभी को जाना पडे़गा। यदि किसी को समस्या होती है तो वह डीन, एमएस, रजिस्ट्रार और मुझसे से बात कर सकते हैं। वह डॉक्टरों के सहयोग के लिए आभारी हैं कि वह लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए मान गए हैं। ऐसे मामले में व्यक्ति को खुद ही जाना होता है। यदि वह नहीं जाएगा तो पुलिस कोर्ट में अन-कोपरेटिव की रिपोर्ट दे देगी। इससे आप लोगों को ही मुश्किल हो सकती है। जो दोषी नहीं है उसे पुलिस जांच में मदद करने में कोई समस्या नहीं है। कौन बच्चे को चुरा कर ले गया है इसकी जांच हो रही है। जांच के दौरान आपको बुलाने से यह नहीं हो गया कि आप दोषी हैं, पुलिस विटनेस के रूप में बुलाती है और पूछताछ करती है। यदि आप लोग जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो शक की सुई आप लोगों पर ही रहेगी। इससे आप लोग और उलझते चले जाएंगे। पुलिस में कंडीशन न रखें डॉक्टर, जांच सबकी हो रहीडीएमईआर आईएएस साकेत कुमार ने कहा, जिसका बच्चा चोरी हुआ है उसके परिवार को नुकसान हुआ है। इस पर परिवार तो न्याय मांगेगा ही। अब प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह कानून का रास्ता अपनाए और पुलिस जांच में सहयोग करे। पुलिस की एक जांच प्रक्रिया है वह तो उसी पर चलेगी। इसमें रुकावट का अधिकार किसी को नहीं है। कानून का सम्मान करते हुए इसमें सभी सहयोग करें। मैं विश्वास दिलाता हूं काननू निष्पक्ष काम करेगा। कानून के सिस्टम में रहकर आप सभी जांच में सहयोग करें। पुलिस जांच में किसी प्रकार की कंडीशन को नहीं रखा जा सकता है। जांच अकेले डॉक्टरों की ही नहीं हो रही है यह नर्स, बेयरर व अन्य स्टाफ की भी हो रही है। इस मुद्दे पर हड़ताल करना सही नहीं है। निवेदन है कि सभी हड़ताल बंद करें, प्रदेश में एस्मा लगा है। समाज में आपकी जिम्मेदारी है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वहीं निर्णय ले जो सबके हित में हो, कोई भी कानून के दायरे से बाहर न जाएं।
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