पीजीआई में हड़ताल पर अड़े डॉक्टर, प्रबंधन भी झुकने को तैयार नहीं, अब तक 27 मौत

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Rohtak Bureau

अमर उजाला ब्यूरोरोहतक।पीजीआई में हड़ताल के चलते दिन पर दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पीजीआई प्रबंधन डॉक्टरों की मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म न करने की घोषणा की। पिछले तीन दिन से शुरू हुई हड़ताल में बुधवार देर रात तक करीब 27 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें करीब 18 मरीजों की मौत मंगलवार हुई थी। वहीं व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस के करीब 21 डॉक्टरों को भेजा गया है। बावजूद रेफर और अन्य मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा रहा है।हड़ताल के चलते पीजीआई में बुधवार को सामान्य दिनों की तुलना में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या कम रही। आठ हजार से ओपीडी की संख्या 4000 के आसपास पहुंच गई है। वार्ड में जहां 1400 मरीज दाखिल थे यह संख्या भी कम हो गई। कुल 1254 मरीज ही वार्ड में दाखिल रहे, इसमें 150 नये मरीज थे। बाकी के मरीजों को चिकित्सकों ने छुट्टी कर दे दी। आपात विभाग में मेडिसन विभाग का वार्ड नौ और सर्जरी विभाग का वार्ड पांच ने मुख्य व्यवस्था संभाली। बुधवार देर रात तक करीब नौ मरीजों की मौत हुईं। वहीं दो दिनों में यह संख्या अब तक 27 हो गई है। शव ले जाने वाले एंबुलेंस से भेज रहे मरीजहड़ताल की वजह से पीजीआई में आने वाले मरीजों को सिविल अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में जाने के लिए कहा जा रहा है। बुधवार को कई गंभीर मरीजों को सिविल अस्पताल भेजा गया। इसके लिए संस्थान से बाकायदा एंबुलेंस तक दी गई। वहीं मरीजों के परिजनों का आरोप है कि उन्हें शव ले जाने वाली एंबुलेंस दी जा रही है। हालांकि संस्थान ने परिसर में एडवांस लाइफ सेविंग एंबुलेंस खड़ी तो कर दी है, लेकिन चालक नहीं है।ऑपरेशन न होने से बढ़ी परेशानीहड़ताल के चलते वार्ड, ओपीडी और आपात विभाग में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी में मरीजों का जांच के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर भीड़ के चलते जल्दबाजी में देख रहे हैं। बस दिखाने के लिए ही कार्ड पर दवाएं लिखी जा रही है। संस्थान में न तो जांच हो रही है और न ही मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। हड़ताल की वजह से दो दिन से ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। मरीजों को छुट्टी देकर दोबारा आने के लिए कहा जा रहा है।टेंट लगाकर बैठे रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न और एमबीबीएस भी शामिलमांगे पूरी न होने पर रेजिडेंट डॉक्टरों ने विजय पार्क में टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया। अब वह रात को भी पार्क में रुकर विरोध करेंगे। वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों के समर्थन में इंटर्न और एमबीबीएस के भी कुछ छात्र-छात्राएं आए। सूत्रों की मानें तो संस्थान के कंसल्टेंट से भी एसोसिएशन हड़ताल में सहयोग की अपील कर रही है।एचसीएमएस डॉक्टरों ने संभाली स्थिति, प्रधान ने उठाया सवालपीजीआई में व्यवस्था सुधारने के लिए एचसीएमएस के डॉक्टरों को भेजा गया। वहीं एचसीएमएस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने कहा, एक दिन तो एचसीएमएस के डॉक्टरों ने व्यवस्था संभाल ली, लेकिन हड़ताल जारी रहीं तो सेवाएं नहीं दे सकेंगे। आरोप लगाया कि संस्थान के सीनियर फैकल्टी काम ही नहीं करना चाहते हैं। जबकि एचसीएमएस में भी डॉक्टरों की कमी है। पीजीआई में मरीजों के उपचार न करके जिला अस्पताल में भेजा जा रहा है। जब वहां भी डॉक्टरों की कमी हैं तो मरीजों का इलाज कौन करेगा। उन्होंने कहा, डीजीएचएस को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि संस्थान के 247 कंसलटेंट है, लेकिन वह आपात ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में कुलपति को भी बता दिया गया है।डायरेक्टर ने अधिकारियों के साथ की बैठकडायरेक्टर साकेत कुमार के साथ पीजीआई के अधिकारियों और सिविल सर्जन की बैठक हुई। इस बैठक में संस्थान के विभिन्न विभागाध्यक्षों ने हिस्सा लिया। इसमें आपात स्थिति में मरीजों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं पर मंथन हुआ।जिला अस्पताल पर बढ़ा वर्क लोड, निजी अस्पतालों की मौजपीजीआई से मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। इसके चलते जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। निजी अस्पतालों में भी पिछले दो दिनों से सरकारी अस्पतालों की तरह भारी भीड़ चल रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि बुधवार को 2000 तक ओपीडी रही और 15 सामान्य और सात सर्जरी की डिलीवरी करवाई गई है। वहीं अधिकारी ने कहा जिन गंभीर मरीजों को पीजीआई रेफर कर रहा है, उनको जिला अस्पताल कैसे ट्रीट कर सकता है। इसके अलावा एनिमिक मरीज को जिला अस्पताल कैसे रक्त दे सकता है, इसमें अकेले रक्त नहीं चढ़ाना होता।यह कहना है मरीजों काएनिमिक केस को जिला अस्पताल भेजापीजीआई से एक एनिमिक केस को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जबकि उसे रक्त की अधिक जरूरत थी। इस पर जिला अस्पताल ने भी हाथ खडे़ कर दिए। देर शाम तक मरीज के लिए असमंजस की स्थिति बनी रही। मरीज के परिजनों ने कहा कि ऐसी स्थिति में वह कहां जाए। पीजीआई भेजा और वहां से फिर जिला अस्पताल भेज दियाजिला अस्पताल में एक महिला ने एक लड़के को जन्म दिया। बच्चे को शौच का रास्ता न होने से डॉक्टरों ने उसको पीजीआइ रेफर कर दिया। आपातकालीन विभाग के डॉक्टरों ने मरीज को फिर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा कि पीजीआईमें उपचार तो होना नहीं है, वह कहीं और ले जाएं। जब वह जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने फिर हाथ खडे़ कर दिए और मरीज को उल्टा पीजीआई भेज दिया। इसके बाद जब परिजन बच्चे को लेकर पीजीआई पहुंचे तो डॉक्टरों ने कहीं शिकायत न करने की चेतावनी देते हुए दाखिल कर लिया।आरडीए ने बातचीत के लिए बनाई कमेटीडॉ. जंगवीर ग्रेवाल, डॉ. जय प्रकाश, डॉ. कुलसौरभ, डॉ. विक्रम, डॉ. परितव, डॉ. कुलदीप, डॉ. प्रियंका नारंग, डॉ. गीतांजली, डॉ. निशा, डॉ. हिना, डॉ. जहांआरा
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