मेरा काका रो रहा था...अभी तक मेरे कानों में उसकी आवाज गूंज रही

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Rohtak Bureau

अमर उजाला ब्यूरोरोहतक। मैने नौ महीने तक काका को अपनी कोख में रखा। दो मिनट के लिए डॉक्टर ने उसे दिखाया। मेरे सामने लेटा दिया और फिर ले गए। वह रो रहा था, उसकी आवाज मेरे कानों में अभी भी गूंज रही है। कोई उसका चेहरा तो दिखा दो..., मेरा काका भूखा होगा। अपने चोरी हुए बच्चे को याद कर इस दर्द को बयां करते मां रंजू के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे थे। आसपास से जो निकलता उससे काका के बारे में पूछती तो कभी शांत होकर बैठ जाती। यह हालात थे पीजीआई के वार्ड दो भर्ती रंजू के। रंजू 25 दिन पहले पीजीआई के लेबर रूम में आई थी। डिलीवरी के चंद मिनटों बाद उसके बच्चे को किसी ने चोरी कर लिया था।रंजू ने बताया कि उसके बच्चे को कपडे़ में लपेट कर टेबल पर लिटाया गया था। वहां एक अन्य बच्चा भी शीशे में रखा था। डिलीवरी के बाद उसे लेबर रूम से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। उसके साथ लेबर रूम के बाहर कुछ दूरी पर बने गेट पर उसकी सास दर्शना खड़ी थी। उसे आधे घंटे बाद बताया गया कि बच्चा ही चोरी हो गया है। पति सन्नी ने बताया कि लेबर रूम के गेट के आगे किसी को जाने की अनुमति नहीं थी। बाहरी व्यक्ति भी नहीं आ सकता था। न जाने किसने बच्चा चोरी कर लिया। सास दर्शना कपडे़ लेकर बच्चे का इंतजार कर रही थी। पति से पूछा तो पता चला कि बच्चा बाहर गया ही नहीं, अंदर से ही किसी ने चोरी कर लिया। लेबर रूम के दूसरी ओर जाने का रास्ता है, लेकिन किसी को जाने की अनुमति नहीं है। डॉक्टर आता न कोई स्टाफ, अकेली हो गई हूंरंजू ने बताया कि घटना के बाद वह अकेली हो गई है उससे न तो कोई डॉक्टर बात करता है और न ही कोई अन्य स्टाफ। वह अकेले अपने कमरे में बैठी रहती है। उससे पुलिस भी कुछ पूछने के लिए नहीं आई है। उसका बच्चा चोरी होने में किसी की साजिश हो सकती है, जो पहले से ही इसकी फिराक में होगा। उसके बच्चे के साथ एक दूसरा बच्चा भी वहां टेबल पर था। लेकिन स्वस्थ्य बच्चे को ही चोरी किया गया है। 25 दिन से बच्चे की मां रंजू भी वार्ड दो के लेबर रूम में धरने पर बैठी है। सामान्य डिलीवरी होने के तीन दिन बाद अकसर महिलाओं को छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन रंजू को डिस्चार्ज करने की किसी की हिम्मत नहीं हो रही है। रंजू की जिद है कि उसका बच्चा जहां चोरी हुआ, उसे वहीं उसका बच्चा चाहिए। इसके बिना वह घर नहीं जाएगी। घटना के बाद से वार्ड दो के मरीज सहमेबच्चा चोरी होेने की घटना के 25 दिन बाद भी वार्ड दो और लेबर रूम के मरीज सहमे हुए हैं। लेबर रूम के कक्ष में अपने बच्चे का इंतजार कर रही मां और लेबर रूम के बाहर बच्चा चोरी होने के लगे बैनर संस्थान की नाकामियों की हर पल पोल खोल रहे हैं। यहां आने वाली जच्चा और परिजन के मन में बच्चे की सुरक्षा को लेकर एक भय जरूर बना हुआ है। अब स्थिति यह है कि हर कोई बच्चे को लेकर घूमने वालों पर नजर रखता है। वहीं सुरक्षा कर्मचारी भी हर आने-जाने वाले पर नजर बनाए रखे हैं। प्रशासन ने वार्ड में रंग रोगन करवा कर सफाई करवानी शुरू कर दी है। उसी के बगल में नवजात को लेटाया गया है। फर्श पर गंदगी फैली हुई है। अस्पताल प्रबंधन को इस बात का भय है कि बच्चा चोरी की घटना के बाद यहां कभी भी किसी का दौरा हो सकता है। इसके लिए प्रशासन की ओर से वार्ड की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाई जा रही हैं।
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