पौने दो साल में कहां गई गोशाला की 1400 गायें

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Rohtak Bureau

-2015 में 2100 गायें, तीन सौ गायों को नप ने भिजवाया, अब रही गईं सिर्फ 1100 गायें -मृत गायों को नसीब नहीं हो नमक, जिला उपायुक्त ने लिया जायजा अमर उजाला ब्यूरो नारनौल। एक ओर प्रदेश सरकार गायों के संरक्षण के लिए गोशालाओं को हरसंभव सहायता दे रही रही है, वहीं नारनौल की श्री गोपाल गोशाला में आए दिन गायें मर रही हैं। सरकार और गोभक्तों से करोड़ों रुपये का अनुदान प्राप्त करने के बाद भी हालात में सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा है। गोशाला में हालात यह है कि गायों को भरपेट चारा-पानी नहीं मिल रहा है। फिलहाल की स्थिति यह है कि गोशाला में हर रोज 4-5 गायों की मौत हो रही है। इसके पीछे जिला प्रशासन के अंदर पिछले बीस माह से काम कर रही एडहॉक कमेटी की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। गोशाला में जहां वर्ष फरवरी 2015 में 2100 गायें थीं। वहीं कुछ समय पूर्व शहर में घूमने वाली करीब 300 गायों को नगर परिषद ने भी भिजवाया था। अब यह संख्या 1100 पर पहुंच गई है। उधर, मृत गायों को दबाने के लिए गोशाला सदस्य न तो बड़ा गड्ढा खुदवाते हैं और ना ही पर्याप्त मात्रा में नमक देते हैं।गोपाल गोशाला में पौने दो साल में करीब 1400 गायें कम हो गई हैं। इनमें अधिकांश की मौत हुई है। मामला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद उपायुक्त गरिमा मित्तल ने बुधवार सायं को गोपाल गोशाला का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एडहॉक कमेटी के सदस्यों को दो से तीन में गोशाला की पूरी स्थित की जानकारी एसडीएम को देने के निर्देश दिए। इसके साथ उपायुक्त ने कमेटी सदस्यों को बीमार गाय को यदि उपचार के लिए किसी दूसरे स्थान पर ले जाना हो तो भी प्रशासन को सूचित करने की बात कही। वीरवार सुबह छह गायों की मौत रेवाडी रोड स्थित श्री गोपाल गोशाला में पिछले कुछ दिनों से गायों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को भी सुबह-सुबह छह गायों को नूनी सेखपुरा के नदी क्षेत्र में दबाया गया। वहीं दोपहर तक दो गाय और मृत पाई गई। इसमें भी एडहाक कमेटी की लापरवाही सामने आई है, क्योंकि मृत गायों को दफनाने के लिए नमक भी नहीं दिया जा रहा है। वीरवार दोपहर जब मीडिया के लोग गोशाला पहुंचे तो वहां काम करने वाले मथुरा के छह वेतनभोगी कर्मचारियों ने एडहॉक कमेटी के सदस्यों का सच मीडिया के सामने खोल कर रख दिया। कमेटी दे रही कर्मचारियों को हटाने की धमकी वहां पर काम करने वाले बच्चन सिंह, मूलचंद, रवि कुमार, दलीप सिंह व रामसिंह ने बताया कि गायों के मरने का मामला समाचार पत्रों की सुर्खियां बनने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वहीं कमेटी की ओर से उन्हें काम से हटाने की बात की जा रही है। इन कर्मचारियों ने बताया कि गोशाला में गायों के मरने का मुख्य कारण उन्हें भरपूर मात्रा में चारा-पानी नहीं देना है। बच्चन सिंह, रामसिंह, मूलचंद व दलीप ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से गोशाला में काम कर रहे हैं। मौजूदा कमेटी के सदस्यों की ओर से गायों की देखभाल में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने पिछले एक सितंबर से 5 अक्टूबर तक कुल 109 गायों के मरने के आंकड़ेे प्रस्तुत किए। बच्चन सिंह ने बताया कि पिछले पांच दिनों में ही 24 गायें मर चुकी हैं। उन्होंने तिथि अनुसार आंकड़े प्रस्तुत करने का दावा किया। उसने कहा कि यदि गोशाला कमेटी के सदस्य उनके बताए गए आंकड़ों को गलत बताते हैं तो वे प्रशासनिक अधिकारियों या शहर के लोगों को वह जगह खोदकर दिखा सकते हैं, जहां मृत गायों को दबाया जा रहा है। बाजरे के मंगाए केवल दस कट्टे गोशाला कर्मचारियों ने बताया कि समाचार पत्रों में मामला उछलने के बाद वीरवार को बाजरे के 10 कट्टे मंगवाये गए हैं। इन दस कट्टों से तो एक दिन भी काम नहीं चलता और सदस्य पूरा महीने इसी से काम चलाने की बात कह रहे हैं। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि मृत गायों को दबाने के लिए गोशाला सदस्य ना तो बड़ा गड्ढा खुदवाते हैं और ना ही पर्याप्त मात्रा में नमक देते हैं। कर्मचारियों ने माना कि वीरवार को जो छह गायें दबाई गई हैं वे केवल पांच-छह फीट के गड्ढे में और वह भी बिना नमक दबाई दी गई। कर्मचारियों ने बताई अपनी व्यथा गोशाला में वेतन पर काम करने वाले मथुरा के कर्मचारियों ने बताया कि वे महज छह हजार रुपये मासिक वेतन पर काम रह रहे हैं। इसके एवज में 24 घंटे की ड्यूटी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमेटी सदस्यों की लापरवाही का खुलासा मीडिया के सामने आ गया तो वे इसका दोषी उन्हें बताकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। इसके लिए वेे सभी जिला उपायुक्त से मिलकर अपनी व्यथा बताएंगे। एक कर्मचारी ने कहा कि उनके मोबाइल में रोजाना मर रही गायों का रिकार्ड था। इसकी वजह सेे कमेटी के एक सदस्य ने उसका मोबाइल ही जब्त किया हुआ है।
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