वेरिफिकेशन कराने पर फीस आई आड़े, स्कूल संचालकों ने स्टाफ से मांगी फीस, उठे विरोध के सुर

Home›   City & states›   वेरिफिकेशन कराने पर फीस आई आड़े, स्कूल संचालकों ने स्टाफ से मांगी फीस, उठे विरोध के सुर

Rohtak Bureau

वेरिफिकेशन कराने पर फीस आई आड़े, स्कूल संचालकों ने स्टाफ से मांगी फीस, उठे विरोध के सुरअमर उजाला ब्यूरो करनाल। गुड़गांव और पानीपत के स्कूलों में बच्चों के साथ हुई वारदात के बाद प्रदेश सरकार द्वारा सभी स्कूलों के स्टाफ की वेरिफिकेशन को लेकर एक के बाद एक परेशानी सामने आ रही हैं। एक तरफ 25 सितंबर वेरिफिकेशन की अंतिम तिथि है, वहीं जिलेभर में मात्र 55 प्रतिशत स्टाफ सदस्यों की ही वेरिफिकेशन हो पाई है, अन्य स्टाफ की अभी जांच नहीं हो सकी है। पहले पुलिस विभाग की वेबसाइट ही नहीं चल पाई तो अब निजी स्कूल संचालकों द्वारा स्टाफ से ही वेरिफिकेशन की फीस लेने को लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। सबसे पहले मोर्चा स्कूल के वाहन चालकों व परिचालकों ने खोला है। स्कूल ड्राइवर एसोसिएशन ने कहा है कि वे वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी संस्थान की है और इसके बदले फीस भी संस्थान ही भरे। वेरिफिकेशन के नाम पर स्टाफ सदस्यों से 50 से लेकर 500 रुपये तक लिए जा रहे हैं। एसो. ने यह भी कहा कि स्कूल संचालक व्यवस्थाएं पूरी नहीं करते हैं और जब हादसे होते हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी चालकों पर डाल देते हैं। उधर, स्कूल संचालकों ने मांग की है कि वेरिफिकेशन की तिथि एक माह और आगे तक बढ़ाई जाए, ताकि यह कार्य सुचारू रूप से कराया जा सके। बता दें कि जिले में सरकारी व निजी सभी स्कूलों को अपने स्टाफ सदस्यों की वेरिफिकेशन करानी है। प्रदेश सरकार के निर्देश हैं कि गर्ल्स स्कूल बस में महिला हेल्पर होनी चाहिए, सीसीटीवी कैमरे हों व स्टाफ की वेरिफिकेशन कराई जाए। इसके साथ ही ड्राइवर-हेल्पर पर आइडी होनी चाहिए। गौरतलब है कि मेनुअल जांच कराने पर 500 रुपये व ऑनलाइन कराने पर 50 रुपये फीस पुलिस विभाग द्वारा ली जाती है। हालांकि, पिछले 10 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक यह जांच करानी थी, लेकिन पिछले कई दिन तक विभाग की साइट हैंड होने के कारण जांच का कार्य नहीं हो सका। अब सोमवार को वेरिफिकेशन की तिथि अंतिम है, ऐसे में जिले की बात करें तो अभी तक मात्र आधे स्टाफ की ही जांच पूरी हो सकी है, अन्य के दस्तावेज अभी तक पुलिस के पास नहीं पहुंचे हैं। जिनके दस्तावेज पुलिस के पास पहुंच गए हैं, उनकी भी वेरिफिकेशन लंबित है, क्योंकि पुलिस के पास स्टाफ सदस्यों की कमी है, साथ ही पुलिस के पास कानून व्यवस्था को लेकर भी कार्य हैं। ऐसे में यह कार्य लगातार लटकता जा रहा है। बता दें कि पुलिस के ऑनलाइन वेरिफिकेशन के बाद भी दो बार एसपी सिक्योरिटी ब्रांच और संबंधित थानों में दो पड़ोसियों शिनाख्त के लिए बुलाना पड़ता है। आनलाइन वेरिफिकेशन में पुलिस 50 रुपये और मैनुअल तरीके से 500 रुपये जमा कराने पड़ते हैं। इस फीस को लेकर ही अब स्टाफ सदस्यों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। स्कूल संचालक मांग रहे पैसे : ड्राइवर एसो. निजी स्कूलों द्वारा पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर बस चालकों और परिचालकों से पैसे मांगने का स्कूल ड्राइवर एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन की मीटिंग रविवार को फव्वारा पार्क में हुई। बैठक में कहा गया कि स्कूल संचालक सुरक्षा को लेकर जो वेरिफिकेशन करवाई जानी है, उसके लिए चालकों परिचालकों से पैसे मांग रहे हैं। यह सरासर अन्याय है। यह खर्च स्कूल को स्वयं वहन करना चाहिए। इस मौके पर प्रधान विजय राणा ने कहा कि स्कूल बसों में परिचालकों की कमी के चलते अव्यवस्था बनी रहती है। सरकार के आदेशों के अनुसार बस में एक पुरुष व एक महिला परिचालक तैनात होनी चाहिए। स्कूल संचालक इन आदेशों की पालना नहीं कर रहे। बाद में दुर्घटना का ठीकरा चालकों के सिर फोड़ दिया जाता है। बैठक में कहा गया कि जब बस चालक वेतन बढ़ाने की बात करते हैं उन्हें सीधा नौकरी से निकाल दिया जाता है। निजी स्कूल तानाशाही पूर्ण कार्य कर रहे हैं। अप्रशिक्षित को रखा जा रहाबैठक में यह मामला भी उठाया गया कि स्कूल खर्चा बचाने के लिए हरियाणा के बाहर से लाइसेंस लेकर आने वाले अप्रशिक्षित चालकों को नौकरी पर रख लेते हैं। इससे हर समय बच्चों की जान को खतरा रहता है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एसोसिएशन की ओर से मांग रखी गई कि स्कूल बस चालकों परिचालकों को डीसी रेट आधारित वेतन दिया जाए। वेरिफिकेशन चार्जेस स्कूल स्वयं भरें। जल्द से जल्द बसों में महिला परिचालक की व्यवस्था की जाए। पुलिस प्रशासन से कानून की धज्जियां उड़ाने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई। चालकों ने पहले भी कई बार प्रशासन से अपील की है कि प्रदेश के बाहर से लाइसेंस बनवाकर आने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें स्कूलों में नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। इस अवसर पर चेयरमैन जेएस कांबोज, उपप्रधान केएल बल्लू, महासचिव आरबी मलिक, सचिव राजिंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष बबला, दर्शन सिंह, सुनील कुमार, प्यारेलाल, कृष्णलाल, हरभजन सिंह, राजेश कुमार, किशोरी लाल, जोनी राणा, शमशेर, वीरेंद्र कुमार व प्रवीण कुमार मौजूद रहे।बाक्स बाक्स 30 अक्टूबर तक का समय हो : डा. लांबाइस बारे में सहोदय काम्पलेक्स के प्रधान डा. राजन लांबा का कहना है कि हमने भी स्टाफ सदस्यों की वेरिफिकेशन कराई है, 50 रुपये है, इसको लेकर किसी को आपत्ति नहीं है, जहां तक 25 सितंबर अंतिम तिथि है, इसको बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को सरकार के पास रखेंगे, ताकि प्रपोपर तरीके से यह कार्य हो सके। क्योंकि पहले तो पुलिस की साइट ही हैंग थी, अब रात को इस साइट पर दस्तावेज डाले जा रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों में जो लोग दूसरे प्रदेशों से हैं, उसकी वेरिफिकेशन कराने में भी समय लगेगा। इसलिए वेरिफिकेशन को लेकर तिथि को 30 अक्टूबर तक बढ़ाया जाए। वर्जन शिक्षण संस्थानों की ओर से स्टाफ सदस्यों की वेरिफिकेशन कराने को लेकर ऑनलाइन सुविधा दी हुई है। इसकी फीस मात्र 50 रुपये है, काफी स्कूलों ने इसका लाभ उठाया है और आनलाइन वेरिफिकेशन मेें एक सप्ताह के अंदर प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। वेरिफिकेशन की तिथि को लेकर प्रदेश स्तर पर फैसला होना है, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। -जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी करनाल।
Share this article
Tags: ,

Most Popular

हेमा मालिनी ने पहली बार खोला सौतेले बेटे सनी देओल के साथ संबंधों का राज

हर्षिता दहिया को पहले ही हो गया था मौत का अंदाजा, FB लाइव होकर किया था खुलासा

जेल में 52 दिन की जिंदगी में राम रहीम का हो गया वो हाल, पहचान नहीं पाएंगे

मुफ्त में देश घूम आया इलाहाबाद का युवक, तरीका बेहद अनोखा

जानिए आखिरी FB लाइव में ऐसा क्या बोली थी हर्षिता दहिया, कुछ घंटे में हो गया मर्डर

पहली बार मिलने आई पत्नी से राम रहीम ने कही ऐसी बात, फूट-फूट कर रोई वो