- कहा, पराली जलाने वाले किसानों पर किया जायेगा 15 हजार रूपये तक का जुर्माना, मुकदमा भी हो सकता है दर्ज

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Rohtak Bureau

पटवारी व ग्राम सचिव पर होगी कार्रवाई, किसानों पर होगा 15 हजार रुपये तक का जुर्मानाअमर उजाला ब्यूरो अंबाला सिटी। उपायुक्त शरनदीप कौर बराड़ ने कहा कि जो पटवारी और ग्राम सचिव अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटना की सूचना नहीं देंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही इसके लिए कृषि उप निदेशक कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां सूचना प्राप्त करने के लिए 24 घंटे कर्मचारी तैनात रहेंगे। सभी तहसीलदार और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अपने क्षेत्र में किसानों को पराली न जलाने और इस पराली को गत्ता मिलों में बेचने, पशुओं के लिए साइलेज तैयार करने, ईंट-भट्ठा व फैक्ट्रियों में इंधन के रूप में उपलब्ध करवाकर आय अर्जित करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि किसान अपने क्षेत्र में स्थित गोशालाओं में भी चारे के लिए पराली उपलब्ध करवाएं। वे मंगलवार को अपने कार्यालय में राजस्व विभाग के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जिले के सभी चारों एसडीएम भी अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी करें और स्वयं औचक निरीक्षण भी करें। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ऐसा करने के लिए पहले से ही एयर एक्ट 1981 के तहत मामला दर्ज करने का प्रावधान किया हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया है। इसके तहत दो एकड़ भूमि तक के किसानों पर 2500 रुपये, 5 एकड़ तक के किसानों पर 5000 रुपये और उससे अधिक भूमि मालिक किसानों पर 15000 रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई करने के बाद शेष बचे अवशेषों को न जलाएं व इसके स्थान पर स्ट्रा रिपर, रिपर बाइडर, हैपी सीडर, स्ट्रा बेलर व रोटावेटर यंत्रों का इस्तेमाल कर धान के अवशेषों को खेत में ही दबा दें। उन्होंने कहा कि धान के अवशेषों को जलाने से जहां जमीन की उर्वरा शक्ति कम होती है बल्कि वातावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उपायुक्त ने राजस्व कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार सीएम विंडो के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों और उनके कोर्ट में लंबित मामलों के निपटान विशेष प्राथमिकता पर करें। उन्होंने कहा कि मुटेशन का कोई भी केस लंबित नहीं होना चाहिए और विभिन्न मामलों में की जाने वाली रिकवरी के लंबित मामलों का भी जल्द निपटान करें। उन्होंने कहा कि गिरदावरी से संबंधित लंबित मामलों के निपटान के लिए अक्तूबर, नवंबर सबसे उपयुक्त समय है। बैठक में एसडीएम मोनिका गुप्ता, अंबाला छावनी के एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग आदि मौजूद रहे।
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