ब्लू व्हेल खतरनाक खेल .....

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Rohtak Bureau

फोटो नंबर 7, 8 ,9 व 51 -माता पिता को बच्चों को छोटी उम्र में नहीं देना चाहिए मोबाइल अमर उजाला ब्यूरो अंबाला सिटी। जानलेवा गेम ब्लू व्हेल’ का आतंक अभी भी कायम है। आए दिन कोई न कोई किशोर इस गेम में फंस कर अपनी जान गंवा रहा है। आखिर क्या कारण है कि बच्चे इस गेम के जाल में फंस जाते हैं और आत्महत्या कर लेते हैं। इस मसले पर शिक्षाविद् का कहना है कि अभिभावक यदि बच्चों पर पैनी नजर रखें तो इससे बचा सकता है। उनका कहना था कि आसानी से उपलब्ध हो रहे गैजेट्स को 18 साल से छोटे बच्चों को न देने की सलाह दी। ----गेम खेल कर बच्चे अपनी जान गंवा रहे हैं। इसके सबसे बड़े गुनहगार स्वयं उनके अभिभावक है क्योंकि अभी तक जितने भी बच्चों ने अपनी जान गंवाई है उनमें से सबसे अधिक बच्चे 18 वर्ष से कम हैं। अगर बच्चों को मोबाइल ही नहीं दिया जाएगा तो वह ऐसे गेमों खेलेंगे ही नहीं और न ही इतनी रुचि दिखाकर अपनी जान गवाएंगे। इसलिए 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को या तो फोन ही न दें या अगर कोई जरूरी कार्य है तो अपनी निगरानी के अंतर्गत उस कार्य को करवाएं। -डॉ. बलविंद्र कौर, विभागाध्यक्ष, मास कम्युनिकेशन, गवर्नमेंट कॉलेज। यह सब बच्चों के आधुनिकता का प्रभाव है कि बच्चों को मोबाइल तो दे दिया जाता है परंतु इसमें क्या अच्छा है और क्या बुरा है, इसके बारे में नहीं बताया जाता है साथ ही बच्चों के फोन में लगे एप लोक के कारण माता पिता भी बच्चों के फोन में क्या क्या है एवं बच्चा फोन का किस प्रकार से प्रयोग कर रहा है इस बारे में नहीं जान पाते। अभिभावकों को चहिए कि वह अपने बच्चों से प्रति दिन बात करें उनके साथ कुछ समय व्यतीत करें उनके जीवन में क्या चल रहा है। इस बारे में जाने तथा दोस्तों की तरह व्यवहार कर उनकी समस्याओं के बारे में जानें। ताकि बच्चें फोन के स्थान अपना वह समय परिवार को दें। -प्रो. राम कुमार। अभिभावकों के साथ-साथ साइबर सेल को भी इसकी ओर अधिक ध्यान देना होगा। इस गेम के लिए स्पेशल टीम का गठन किया जाना चाहिए कि जो कि यह ट्रेस करे कि कोई बच्चा इस गेम को तो नहीं खेल रहा है। अगर वह खेल रहा है तो कहीं वह आखिरी टाक्स को तो पूरा नहीं कर रहा है ताकि मौके पर उस बच्चे की जान बचाई जा सके। क्योंकि इंटरनेट पर बहुत अधिक डाटा जिसमें प्रत्येक डाटा पर तो नजर नहीं रखी जा सकती है लेकिन उन लिंक्स की ओर जरूर ध्यान देना चाहिए जो बच्चों की जान ले रहा है। - प्रोफेसर, डा. सुरेश देशवाल गेम के प्रति युवाओं में आकर्षण बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में अभिभावकों को सजग होने की जरूरत है। यदि बच्चों के हाथ में मोबाइल है तो अभिभावकों को यह जानना जरूरी है कि मोबाइल में कौन कौन से गैजेट्स हैं। यदि बच्चों पर नजर रखी जाएगी तभी हादसों से बचा जा सकता है। सरकार को भी ऐसे ऐप या गेम पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इन्हें प्रतिबंधित कर देना चाहिए। -डॉ. नवीन गुलाटी, विभागाध्यक्ष गणित, एसडी कालेज।
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