...क्या सचमुच में लड़की होना पाप है

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Dehradun Bureau

श्रीनगर। बैकुंठ नाट्य महोत्सव में प्रयास जागरूकता मंच की ओर से मंचित ‘क्या लड़की होना पाप है’ नाटक लोगों को अंदर तक झकझोर गया। नाटक ने यह सोचने को मजबूर कर दिया कि समाज आखिर बेटों को क्यों जीवन का सहारा मानता है। बेटी के साथ अन्याय किया जाता है। नाटक सवाल छोड़ जाता है कि क्या सच में लड़की होना पाप है?नाटक में दो कहानियां एक साथ चलती हैं। पहले दृश्य में गर्भवती महिला को उसके परिवार वाले जबरन अस्पताल ला रहे होते हैं। उसकी लाख मिन्नतों के बावजूद उसके गर्भ में पल रहे कन्या भ्रूण को मार दिया जाता है। इसके बाद मंच में एक घर का दृश्य आता है। घर में बैठे बुजुर्ग दंपति चर्चा करते हैं, कि हमारा घर कितना सूना है। जबकि पड़ोसी शर्मा की दो बेटियां है। एक इंजीनियर व एक डॉक्टर हैं। उनके घर में कितनी रौनक है। वह तय करते हैं कि जब इस बार बेटा घर आएगा, तो उसको शादी करने को कहेंगे। उनका बेटा घर आकर बताता है, कि वह तीन-चार माह के लिए कहीं जा रहा है। उसकी मां कहती है कि हम तो तेरी शादी की सोच रहे हैं। इस पर वह बिगड़ते हुए कहता है कि शादी का नाम मत लेेना। वह नहीं चाहता कि कल उसकी बेटी होने पर उसको मार दिया जाए। वहीं दूसरे घटनाक्रम में एक पागल को लोग पत्थर मार रहे होते हैं। वह लोगों से कहता है कि मैं पागल नहीं हूं। मैं पागल तब था, जब मेरे माता-पिता और भाई-भाभी ने मिलकर मेरी पत्नी के गर्भ में पल रहे शिशु को मार दिया था, क्योंकि वह लड़की थी। मेरी बेटी सपने में दिखाई देती है। वह पूछती है कि बाबा आपने मुझे क्यों मारा? वह समाज से कहता है कि जैसा बेटा वैसे ही बेटी होती हैं। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी और कार्यक्रम के सहप्रभारी हिमांशु नौडिय़ाल मौजूद थे। पात्रविशाल सावन (युवक)जसपाल राणा ( पिता)गायत्री टम्टा (माता)कीर्ति खत्री ( बेटी)मनीष बलूनी (पागल युवक)लियाकत अली (प्लेबैक सिगिंग )बैकुंठ चतुर्दशी मेला..............गढ़वाली स्टार नाइट में मचा धमाललोकगायकों के गीतों पर देर रात तक थिरके लोग>> हास्य कलाकार घनानंद के चुटकुलों ने श्रोताओं को हंसी से किया लोटपोटअमर उजाला ब्यूरोश्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में शुक्रवार को आयोजित गढ़वाली स्टार नाइट में जमकर धमाल मचा। लोकगायक रजनीकांत सेमवाल, अमित सागर, किशन महिपाल, मीना राणा और संगीता ढौंडियाल के गीतों पर जहां लोग देर रात तक थिरके वहीं कार्यक्रम के बीच-बीच में हास्य कलाकार घनानंद के चुटकुलों ने श्रोताओं को हंसी से लोटपोट किया।बैकुंठ चतुर्दशी मेले की आठवीं सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन बाल अधिकार संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने किया। गढ़वाली स्टार नाइट की शुरुआत किशन महिपाल के हरे कृष्णा भजन से हुई। रजनीकांत सेमवाल ने पोस्तू को छुमा, मेरी सुनीता रेशमी बांदा हाय तेरो मिजाजा और पुराणो मेरु दरजी गाना सुनाकर दर्शकों को नाचने पर विवश किया। कार्यक्रम में अमित सागर ने चैता की चैत्वाली गाने से जोश भर दिया। गायिका संगीता ढौंडियाल ने मेरी देवी ज्वाल्पा मां, उत्तराखंड की स्वर कोकिला मीना राणा ने हम उत्तराखंडी छां, पल्यों गौं का मोहना व लौंडा चंदना और किशन महिपाल ने किंगरी का झाला घुघती और फुलडिय़ा त्वै देखी कि ओंदू यू मन मां गीत सुनाए। श्रोता रात लगभग दो बजे अपने चहेते गायकों को सुनने के लिए जमे रहे।>>रमेश ने जीती सीनियर सिटीजन प्रतियोगिताश्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले के नौंवें दिन जीआईएंडटीआई मैदान में म्यूजिकल चेयर रेस प्रतियोगिता आयोजित हुई। पत्रकारों की इस प्रतियोगिता में राजीव खत्री पहले, तेजपाल चौहान दूसरे और श्रीकृष्ण उनियाल तीसरे स्थान पर रहे। महिला (ओपन) वर्ग में रीना ने पहला, बबीता नैथानी ने दूसरा व साक्षी बिष्ट ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सीनियर सिटीजन की प्रतियोगिता रमेश चंद्र बलूनी ने जीती। जबकि नरपत सिंह बिष्ट द्वितीय व बुद्धिबल्लभ उनियाल ने तीसरा स्थान हासिल किया।मेले में आजपूर्वाह्न 11 बजे ऑन द स्पॉट फोटोग्राफीशाम 6.00 बजे मेला समापन समारोहरात 8.00 बजे स्टार नाइट
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