राज्य आंदोलनकारियों ने काला दिवस मनाया

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Dehradun Bureau

‘शहीदों हम शर्मिंदा हैं, तुम्हारे कातिल जिंदा हैं’-- मुजफ्फरनगर कांड में शहादत देने वाले आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि-- मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा देने की उठाई मांग अमर उजाला ब्यूरो ऋषिकेश। विभिन्न संगठनों ने गांधी जयंती को काला दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर उत्तराखंड आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर कांड में शहादत देने वाले राज्य आंदोलनकारियों का भावपूर्ण स्मरण किया गया। राज्य आंदोलनकारियों ने सरकार से मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को जल्द सजा देने की मांग उठाई। चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति की ओर से मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर त्रिवेणीघाट स्थित गांधी स्तंभ पर काला दिवस मनाया गया। इस दौरान दो अक्टूबर 1994 को पृथक राज्य की मांग कर रहे राज्य आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर लाठीचार्ज व फायरिंग में शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी गई। समिति से जुड़े लोगों ने शहीदों हम शर्मिंदा हैं, तुम्हारे कातिल जिंदा हैं, आदि नारे भी लगाए। प्रदेश अध्यक्ष डा. कृपाल सिंह रावत, सावित्री नेगी, सरोज, राजेंद्र सिंह, मधु डबराल, पार्वती रतूड़ी, उषा नेगी, दीपा नेगी, संजय बुड़ाकोटी, ओमप्रकाश, प्रशांत भट्ट, सोम प्रकाश, मन्नू थापा, प्रभा जोशी आदि मौजूद थे। उधर, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से हरिद्वार रोड स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित सभा में मुजफ्फरनगर कांड में शहादत देने वाले आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी गई। समिति अध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा ने कहा कि दशकों बाद भी उत्तराखंड आंदोलनकारियों के हत्यारों को कोई सजा नहीं मिल पाई है। आरोप है कि केंद्र व राज्य सरकार दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाए उनका प्रमोशन कर रही है। समिति ने शहीदों के हत्यारों को जल्द सजा दिलाने की मांग की है। इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनका भावपूूर्ण स्मरण किया गया। मौके पर वीरेंद्र शर्मा, ऊषा रावत, बलवीर सिंह नेगी, गंभीर मेवाड़, संजय शास्त्री, युद्धवीर चौहान, प्यारेलाल जुगलाण आदि मौजूद थे। वहीं उत्तराखंड क्रांति दल ने आईडीपीएल में बैठक कर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा जिन उद्देश्यों के लिए शहीदों ने अपने प्राण न्यौछावर कर राज्य का निर्माण किया था, वह आज भी अधूरे हैं। यहां युद्धवीर चौहान, एमएस शाही, गुलाब सिंह, केडी जोशी, जितार बिष्ट, आनंद सिंह, बीसी रावत, शांति तड़ियाल, नत्थी असवाल आदि मौजूद थे।
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