सोच बदलने के लिये 15000 किलोमीटर साइकिल पर अनोखी यात्रा

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टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर

15,000 kilometer cycle to change thinking on this amazing journeyPC: अमर उजाला

घुट-घुटकर जीती महिलाओं की मानसिकता जानने और लोगों की सोच बदलने जैसी अपनी महत्वाकांक्षी मुहिम के तहत बिहार के राकेश कुमार सिंह साइकिल यात्रा पर कानपुर आये हैं। कारपोरेट कम्युनिकेशन मैनेजर और 90 हजार रुपये सेलरी वाली नौकरी छोड़ने के बाद राकेश ने चेन्नई के चेपक से ‘राइड फॉर जेंडर फ्रीडम’ नाम से अनोखी यात्रा की शुरुआत की थी। अब तक तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, बिहार, नेपाल के सीमावर्ती इलाकों पर जाकर लोगों से बातचीत करते हुए राकेश ने ढाई सालों में अब तक 15 हजार किलोमीटर की यात्रा साइकिल से तय की है। कानपुर के ग्रामीण इलाकों में घूमने के साथ उन्होंने रामकृष्ण मिशन स्कूल के बच्चों से बातचीत कर उनकी जिज्ञासायें जानीं। बिहार राज्य के गांव तरियानी छपरा, जिला शिवहर से संबंध रखने वाले राकेश ने बताया कि उन्होंने जब दिल्ली में तेजाब पीड़िताओं से मुलाकात की तो उनका नजरिया ही बदल गया। लैंगिक असमानता को लेकर उनका विद्रोही हो उठा। हफ्तों गहरी सोच में डूबने के बाद उन्होेंने जो फैसला लिया उससे सभी रिश्तेदार, दोस्त और परिवार के लोग हैरान हो गए। अच्छे पैकेज वाली नौकरी छोड़ने के बाद राकेश ने अपनी साइकिल उठाई और चेन्नई से ‘राइड फॉर जेंडर फ्रीडम’ नाम से अपनी अनोखी यात्रा शुरू कर दी। ‘राइड फॉर जेंडर फ्रीडम’ के तहत राकेश पिछले पांच दिनों से कानपुर यात्रा पर हैं।  अनोखी मुहिम से बड़ी संख्या में जुड़े कानपुर के युवा  महिलाओं के प्रति सोच बदलने वाली राकेश की इस अनोखी मुहिम का हिस्सा बनने के लिये यूपी के कानपुर और लखनऊ शहरों के सबसे ज्यादा युवा सामने आये हैं। जेंडरफ्रीडमडॉटइन वेबसाइट और फेसबुक पेज के जरिये कानपुर के एक हजार से अधिक युवा और बुद्धिजीवी लोग शहरी और ग्रामीण महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिये आगे आये हैं। राकेश ने आर.के. नगर स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल जाकर बच्चों से बातचीत की और देश में हो रहे महिला अत्याचारों संबंधी गंभीर विषयों पर उनकी प्रतिक्रियायें जानीं।  दहेज के नाम पर नाक-मुंह सिकोड़ लेते हैं लोग राकेश बताते हैं कि जब उन्होंने गांव में जाकर बुजुर्गों और महिलाओं से दहेज का विरोध करने की बात कही तो लोग नाक मुंह सिकोड़ते हुए देखे गए। लोग दहेज को एक ओर अभिशाप मानते हैं तो दूसरी ओर इसका विरोध नहीं करना चाहते। मौजूदा भारतीय समाज में दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण, तेजाब कांड, घरेलू हिंसा ने अपनी जड़ें मजबूत कर रखी हैं केवल मानसिकता बदलकर इन बुराईयों को जड़ से हमेशा के लिये उखाड़ फेंका जा सकता है। 
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