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    Thursday, May 24, 2012  |  Last Update - 1:24 PM IST
ज़िन्दगी लाइव
आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाएगा यह उपाय   - राकेश झा  
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दुर्घटनाओं से बचने के लिए हम सभी अपनी ओर से सतर्कता का ध्यान रखते हैं लेकिन फिर भी छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हम सभी के साथ होती रहती है। परंतु कभी कभी दुर्घटनाएं ऐसी भी हो जाती हैं कि जान पर बन आती है। इन दुर्घटनाओं में जन बच जाने पर भी जीवनभर उसका दुःखद परिणाम भुगतना पड़ता है। ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए यह उपाय कारगर होता है। पंचमुखी हनुमान लॉकेट तांबे का पंचमुखी हनुमान लॉकेट बनवाकर मंगलवार के दिन सिंदूर और लाल फूल से इसकी पूजा करके अपने वाहन में इसे बांध दें। यह कार्य राहु काल में नही करना चाहिए। विस्तृत >>
 
au इन उपायों से शत्रु होंगे परास्त    ( राकेश झा   )
जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं। उसी प्रकार शत्रुता और मित्रता भी जीवन के दो पहलू हैं। मित्रों से हमेशा सहयोग और मदद मिलती है तो शत्रुओं से नुकसान और परेशानी। इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि उसका कोई शत्रु नहीं हो। लेकिन जाने-अनजाने परिस्थितियां कुछ    विस्तृत >>
au पानी बचाएं    ( किरण मिश्रा   )
आपको सहज विश्वास न हो, मगर अंदेशा यह जताया जा रहा है कि पानी की बढ़ती कमी के मद्देनजर अगला विश्वयुद्ध अगर होगा, तो वह पानी के लिए होगा। टी.वी. रेडियो के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की अपील की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन चीजो   विस्तृत >>
au करे कोई, पर भरता है हर कोई    ( रामविलास जांगिड़   )
एक था पंडित जाना-माना। प्रकांड विद्वान। एक प्रसिद्ध मंदिर का था प्रधान पुजारी। मंदिर के वार्षिकोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। कई-कई व्यक्ति लगे थे इन तैयारियों में। पंडित जी उत्साह-उमंग से हर एक तैयारी का जायजा ले रहे थे। एक व्यक्ति एक बड़ी सी पताका    विस्तृत >>
au खुद को जानना भी भक्ति है    ( चित्रांगदा सिंह   )
मेरा मानना है कि अध्यात्म या ईश्वर के प्रति भक्ति के पीछे हम खुद को पहचानने की कोशिश करते हैं, जो बाहर से देखने में ईश्वर की खोज लगती है। इस तरह हम अपने जीवन की कई कठिन समस्याओं को सरल बना लेते हैं। दरअसल हम क्या करते हैं, कैसे रहते हैं, इसके बीच मे   विस्तृत >>
au कोख का प्रतिशोध    ( डॉ. श्रीगोपाल काबरा   )
चिकित्सकों की विचार गोष्ठी में आज का विषय था मातृ भू्रण संवाद। प्रवर्तक ने विस्तार से बताना शुरू किया। ओवम ओवरी से निकलते समय और निकलने पर, ओवरी हॉर्मोन्स स्रावित करती है; वे गर्भाशय को गर्भ के लिए अनुकूल बनाते हैं। फर्टिलाइज्ड ओवम जब गर्भाशय में पह   विस्तृत >>
au तब धरम पा जी नहीं थे गरम    ( रामकृष्ण   )
आज से करीब आधी सदी पहले लुधियाने का एक मेकैनिक अपने काम से परेशान था। नौकरी करते हुए उसने दो बरस से अधिक गुजार दिए थे, लेकिन तब भी वह इतना पैसा नहीं एकत्र कर पाया था कि वह उस नौकरी को आखिरी सलाम कर सके। उसने नौकरी शुरू करते वक्त सोचा था कि वह पैसे जम   विस्तृत >>
au कन्फ्यूजन के मजे    ( रवींद्र त्रिपाठी   )
साहित्य की दुनिया में कन्फ्यूजन ने काफी बावेला मचा दिया है। कहानीकार कन्फ्यूज्ड हैं, कवि और आलोचक भी। सिद्धांतकार भी कन्फ्यूज्ड हैं। हिंदी के इसके समतुल्य शब्द- ‘भ्रम’ की हालत खस्ता है। आप किसी को कह दें कि वह ‘भ्रमित’ है तो वह नाराज हो सकता है। आपस   विस्तृत >>
au धूप तब खिलखिलाती थी    ( प्रतिभा कटियार   )
ये लो तुम्हारी फेवरेट बटर स्कॉच...लड़के ने आइसक्त्रीम का कोन लड़की की ओर बढ़ाया। दिन के बढ़े हुए टेम्परेचर को आइसक्त्रीम के मेल्ट होने की बेताबी से नापा जा सकता था। लड़की उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। खाओ भी। ऐसे देख क्या रही हो। मेल्ट हो जायेगी। लड़क   विस्तृत >>
au धरती बचाने को उतरे सितारे    ( प्रतिमा पांडेय   )
एक बात तो माननी होगी कि आज का बॉलीवुड अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति काफी जागरूक हो गया है। भले ही बॉलीवुड की बुढ़ा चुकी पीढ़ी इस मामले में पीछे दिखती हो, लेकिन नई पीढ़ी जब-तब किसी न किसी जागरूकता अभियान का हिस्सा बनती दिखाई दे जाती है। अब विश्व   विस्तृत >>
au लड़कियां ही क्यों बाजी मारती हैं!    ( सुमन वाजपेयी   )
बारहवींके रिजल्ट आ गए, उससे पहले दसवीं के आए थे और हर अखबार की यही हेडलाइन थी कि लड़कियों ने फिर बाजी मारी ली है। चाहे सीबीएसई की परीक्षा हो या आईसीएसई या फिर आईएएस की, हर परीक्षा में हर साल लड़कियां ही बाजी मारती हैं और पिछले 10-15 सालों से यह जैसे    विस्तृत >>
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