अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने मांग की है कि भारत सरकार प्रयाग स्थित त्रिवेणी घाट पर सम्राट अशोक के किले को तत्काल खाली कराए। इस किले पर अंग्रेजों के जमाने से सेना का कब्जा है। परिषद ने कुंभ से पूर्व इस किले का दायित्व पर्यटन विभाग को सौंपने का आग्रह किया है।
संत जगत के लिए काफी महत्व
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महासचिव श्रीमहंत हरि गिरि ने शनिवार को जूना अखाड़े में पत्रकारों से कहा कि ब्रिटिश शासन काल में सम्राट अशोक के किले में सेना तैनात की गई थी। इस किले में अशोक के जमाने का बोधि वृक्ष है, जिसका संत जगत के लिए काफी महत्व है। कई बार यह सवाल उठाया गया है कि किले में सेना को रखने का कोई औचित्य नहीं है, इसके बावजूद सेना को किले से हटाया नहीं गया। हरि गिरि ने मांग की है कि प्रयाग कुंभ शुरू होने से पूर्व किले को सेना से खाली कराया जाए। इसके लिए प्रयाग कुंभ में भी अखाड़ा परिषद एक प्रस्ताव पारित करेगी।
अंग्रेजों ने किले में सेना को बैठाया था
यदि शाही स्नानों से पूर्व किला खाली न हुआ, तो संत समाज प्रयाग में बैठक कर महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि प्रयाग कुंभ के दौरान संतों के साथ स्वाधीनता सेनानी भी आंदोलन पर चर्चा करते थे। उस पर निगरानी रखने के लिए अंग्रेजों ने किले में सेना को बैठाया था। देश आजाद हो जाने के इतने वर्ष बाद भी सेना ने किले से कब्जा नहीं छोड़ा है। यह हिंदू जनता और स्नानार्थियों का अपमान है। हरि गिरि ने कहा कि मकर संक्रांति को कुंभ का पहला शाही स्नान होगा। लेकिन इस संबंध में वार्ता को अभी तक सरकार ने नहीं बुलाया है, यह अजीब है।
0
खबर पर अपनी राय दें