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महाभारत के पांडवों का बनाया यह मंदिर क्यों है खतरे में

डीडीहाट/इंटरनेट डेस्क।
Story Update : Sunday, February 05, 2012    9:49 AM
Pandava Mahabharata Sun temple at risk Konark

महाभारत के पांडव द्वारा स्‍थापित दुर्लभ मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में होने के बावजूद खस्ताहाल है। डीडीहाट के मड़ गांव में स्थित इस मंदिर को कोणार्क के सूर्य मंदिर का प्रतिरूप माना जाता है।

ऐतिहासिक सूर्य मंदिर से मिलती जुलती शक्ल
कोणार्क के सबसे बड़े और ऐतिहासिक सूर्य मंदिर से मिलती जुलती शक्ल का सूर्य मंदिरकुमाऊं में सिर्फ कोसी कटारमल में ही नहीं बल्कि यहां मड़ गांव में भी है। 12 साल पहले पुरातत्व विभाग ने मड़ गांव में स्थित इस प्राचीन विरासत को अपने अधीन ले लिया था। लेकिन देखरेख के अभाव में मंदिर जीर्णशीर्ण हालत में पहुंच चुका है।

पुरातत्व विभाग ने लौटकर नहीं देखा
पुजारी दिनेश जोशी का कहना है कि पुरातत्व विभाग ने मंदिर के आसपास के एरिया का सीमांकन भी किया था। अब क्षेत्रवासी इस प्राचीन विरासत का संरक्षण करना चाहें तो भी नहीं कर सकते। पुरातत्व विभाग ने भी लौटकर इस तरफ नहीं देखा है। मंदिर का पीछे का हिस्सा धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा है। मड़ गांव के लोगों के लिए यह सूर्य मंदिर आस्था का केंद्र है। मड़ गांव के बुजुर्गों का मानना है कि गांव में स्थित सूर्य मंदिर का इतिहास कोणार्क के सूर्य मंदिर से जुड़ा है। मगर इतिहासकार इससे सहमत नहीं हैं।

‘पांडवों ने बनाया था यह मंदिर’
मड़ गांव के बुजुर्ग मोहन चंद्र जोशी का कहना है कि पांडव जब अज्ञातवास पर जा रहे थे तो पांचों भाइयों ने मिलकर मड़ गांव में सूर्य मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर के आसपास आज भी पांडव काल से जुड़े कई अवशेष मौजूद हैं। मोहनचंद्र जोशी इसे कोणार्क के सूर्य मंदिर की एक शाखा ही मानते हैं।


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